नई दिल्ली. Supreme Court Chief Justice बीआर गवई ने देश की न्याय प्रणाली में बढ़ती एक अहम चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि ‘जमानत नियम है, जेल अपवाद है।’ जैसे महत्वपूर्ण सिद्धांत को आजकल नजरअंदाज किया जा रहा है। CJI गवई ने यह बात कोच्चि में Justice VR Krishna Iyer Memorial Law Lecture के दौरान कही। उन्होंने बताया कि अदालतों ने वर्षों तक इस सिद्धांत को माना, लेकिन अब इसका पालन कम होता दिख रहा है।
CJI ने कहा कि उन्होंने कई बड़े मामलों में इस नियम को दोबारा लागू करने की कोशिश की है, ताकि High Courts और Lower Courts भी इसी दिशा में काम कर सकें।
सिसोदिया से लेकर कविता तक – CJI ने किन मामलों का किया ज़िक्र?
CJI गवई ने Manish Sisodia, Prabir Purkayastha और Kavita vs ED जैसे चर्चित मामलों का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने इन केसों में भी ‘बेल’ को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि Justice Krishna Iyer हमेशा बिना ट्रायल के जेल में बंद लोगों के हक में खड़े रहे और हमें भी उनके इसी दृष्टिकोण को अपनाना चाहिए।
Supreme Court ने बदले ‘Serious Offence Bail Norms’ – क्या अब PMLA/UAPA में भी राहत संभव?
Supreme Court ने हाल के वर्षों, खासतौर पर 2024 में कई महत्वपूर्ण फैसलों से यह स्पष्ट कर दिया है कि Long Trial Delays की स्थिति में Accused को Bail मिलनी चाहिए, चाहे वह PMLA (Prevention of Money Laundering Act) या UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) जैसे कड़े कानूनों के तहत ही क्यों न हो। कोर्ट ने दो टूक कहा – अगर ट्रायल में देरी हो रही है और व्यक्ति वर्षों से जेल में है, तो उसे जमानत मिलनी चाहिए।
Lower Courts को मिला Supreme Court का स्पष्ट संदेश
Chief Justice ने यह भी दोहराया कि Lower Courts और High Courts को Bail Granting Process में उदारता दिखानी चाहिए। उन्होंने अगस्त 2024 में SC द्वारा दिए गए एक महत्वपूर्ण निर्णय की ओर भी ध्यान दिलाया, जिसमें कहा गया कि जमानत सिर्फ IPC अपराधों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह Special Acts जैसे UAPA पर भी लागू होती है, बशर्ते Bail Conditions पूरी हों।
क्या भारत की न्याय प्रणाली बदलेगी अपना नजरिया?
CJI और Supreme Court दोनों का यह स्पष्ट संदेश है – Unnecessary Jail Custody से बचा जाए और Bail को Default Option माना जाए। ऐसे समय में जब देश में न्याय प्रक्रिया में कई केस लंबित हैं और हजारों आरोपी बिना ट्रायल के जेल में हैं, ये बयान कानूनी सिस्टम को नया दृष्टिकोण दे सकते हैं।
