नहीं रहे डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह जिन्होंने ग्रामीण भारत की रीढ़ माने जाने वाली मनरेगा को बनाने में निभाई थी बड़ी भूमिका

नही रहे डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह जिन्होंने ग्रामीण भारत की रीढ़ माने जाने वाली मनरेगा को बनाने में निभाई थी बड़ी भूमिका - Panchayat Times
File photo source :- Internet

नई दिल्ली. 6 जून 1946 को वैशाली के शाहपुर में जन्में साइन्स ग्रेजुएट और गणित में मास्टर डिग्री कि शैक्षणिक योग्यता रखने वाले पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह का दिल्ली के एम्स में रविवार को निधन हो गया.

जेपी आंदोलन से राजनीतिक सफर शुरू करने वाले रघुवंश प्रसाद सिंह 1977 में पहली बार विधायक बने और बाद में बिहार में कर्पूरी ठाकुर सरकार में मंत्री भी बने. वह बिहार के वैशाली लोकसभा क्षेत्र से पांच बार सांसद रह चुके हैं.

अपने 3 दशक से अधिक के राजनीतिक जीवन में बेबाक और बेदाग अंदाज में रहने वाले रघुवंश प्रसाद सिंह ‘मनरेगा’ योजना लागू कर हमेशा के लिए अमर हो गए. 23 मई 2004 से 2009 तक वे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की कैबिनेट में ग्रामीण विकास विभाग मंत्री रहे.

राष्ट्रीय सलाहकार समिति ने रोजगार गारंटी कानून बनाने का प्रस्ताव दिया

इस बीच सोनिया गांधी की अध्यक्षता में गठित राष्ट्रीय सलाहकार समिति ने रोजगार गारंटी कानून बनाने का प्रस्ताव दिया. इस कानून बनाने की जिम्मेदारी श्रम मंत्रालय को दी गई. लेकिन श्रम मंत्रालय ने इस कानून को बनाने को लेकर हाथ खड़े कर दिए. बाद में ग्रामीण विकास मंत्रालय को कानून बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई.

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The then Prime Minister, Dr. Manmohan Singh at the launch of programmes under National Rural Employment Guarantee Act (NREGA) at Bandlapalle village, Anantapur District of Andhra Pradesh, on Feb 2, 2006. The UPA Chairperson Smt. Sonia Gandhi, the then Union Minister for Rural Development, Dr. Raghuvansh Prasad Singh and the then CM of Andhra Pradesh, Dr. Y. S. Rajasekhara Reddy. Source:- Internet

रघुवंश प्रसाद सिंह ने इस कानून को बनवाने और पास कराने में अहम भूमिका निभाई. हालांकि कानून को लेकर उनकी कैबिनेट के ही कई मंत्री सवाल खड़े कर रहे थे. आखिर में रघुवंश बाबू इस योजना के लिए सभी को साथ लाने में कामयाब रहे और

2 फरवरी 2006 को एक साथ देश के 200 पिछड़े जिलों में इस कानून को लागू किया

2 फरवरी 2006 को एक साथ देश के 200 पिछड़े जिलों में इस कानून को लागू किया गया. 2008 तक यह कानून महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) भारत के सभी जिलों में लागू की जा चुकी थी. इस कानून के तहत ग्रामीणों को 100 दिन की न्यूनतम रोजगार की गारंटी दी गई थी.

का मजदूरी या कमाने के लिए शहरों की ओर हो रहा पलायन रुका

इस कानून के चलते ग्रामीणों का मजदूरी या कमाने के लिए शहरों की ओर हो रहा पलायन रुक गया था. राजनीतिक रूप से इसका फायदा यूपीए को मिला. लोगों का मानना हैं कि यूपीए-2 को दोबारा सत्ता में लाने में इस योजना की काफी भूमिका रही. एक समय मनरेगा को यूपीए की सबसे बड़ी असफलता बताने वाले एनडीए सरकार ने भी इस योजना को हू-ब-हू लागू किया.