कोरोना महामारी के चलते मनरेगा के तहत होने वाले कार्यों की मांग में वृद्धि, पहली बार 96 प्रतिशत से अधिक ग्राम पंचायतों में योजना के तहत काम की मांग

कोरोना महामारी के चलते मनरेगा के तहत होने वाले कार्यों की मांग में वृद्धि, पहली बार 96 प्रतिशत से अधिक ग्राम पंचायतों में योजना के तहत काम की मांग
MGNREGA-Officals-in-a-Ranchi-panchayat File photo

नई दिल्ली. देश के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए 2005 से चलाी जा रही राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) पोर्टल पर नवंबर माह तक उपलब्ध आंकड़ों से पता चलता है कि देश में कोरोना महामारी के चलते मनरेगा के तहत होने वाले कार्यों की मांग में तेजी से वृद्धि हुई है.

क्यों बढ़ी काम की मांग

कोरोना महामारी के चलते इस वर्ष काफी बड़ी संख्या में लोगों का शहरों से गांवों की ओर पलायन हुआ है. क्योंकि मनरेगा एक मांग आधारित योजना है, जिसने कोरोना वायरस महामारी के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में वापस लौटने वाले बेरोजगार हुऐ प्रवासी मजदूरों को रोजगार प्रदान करने में बड़ी भूमिका निभाई है.

96 प्रतिशत से अधिक ग्राम पंचायतों में योजना के तहत काम की

आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि लॉकडाउन में ढील देने के बाद वित्तीय वर्ष 2020-21 में पहली बार 96 प्रतिशत से अधिक ग्राम पंचायतों में योजना के तहत काम की मांग की गई है.

चालू वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान शून्य कार्यदिवस वाली ग्राम पंचायतों की कुल संख्या देश भर की 2.68 लाख यानी केवल 3.42 प्रतिशत है, जो कि बीते आठ वर्षों का सबसे निचला स्तर है. 2019-20 के दौरान शून्य कार्यदिवस वाली ग्राम पंचायतों की कुल संख्या 2.64 लाख यानी 3.91 प्रतिशत थी.

अप्रैल की शुरुआत से नवंबर के अंत तक तकरीबन 6.5 करोड़ घरों (9.42 करोड़ लोग शामिल) को मनरेगा के तहत काम दिया गया

आंकड़ों के अनुसार अप्रैल की शुरुआत से 2 दिसंबर के अंत तक तकरीबन 6.54 करोड़ घरों (9.46 करोड़ लोग शामिल) को मनरेगा के तहत काम दिया गया है, जो कि अब तक की सबसे अधिक संख्या है.

2020-21 में अब तक 268.24 करोड़ व्यक्ति दिवस (Working days) उत्पन्न

2020-21 में अब तक 268.24 करोड़ व्यक्ति दिवस (Working days) उत्पन्न किये गए, जो साल 2019-20 के 265.43 करोड़ व्यक्ति दिवस से अधिक है. अक्टूबर 2020 में 1.98 करोड़ परिवारों ने इस योजना का लाभ उठाया, जो वर्ष 2019 की इसी अवधि की तुलना में 82 प्रतिशत अधिक है.

काम की सबसे अधिक मांग तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में

मनरेगा (MGNREGA) के तहत काम की सबसे अधिक मांग तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में देखी गई. इस अवधि के दौरान वेतन व्यय भी 53,522 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है, जो कि अब तक का सबसे अधिक है. तमिलनाडु में जुलाई माह के बाद से पूरे देश में इस कार्यक्रम का लाभ उठाने वाले परिवारों की संख्या सबसे अधिक है, जिसके बाद पश्चिम बंगाल का स्थान है.

गरीब कल्याण रोजगार अभियान

इस अभियान की शुरुआत जून 2020 में देशव्यापी लॉकडाउन के कारण अपने गृह राज्यों में लौटे प्रवासी श्रमिकों और ग्रामीण नागरिकों को आजीविका के अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी. यह कुल 125 दिनों का अभियान था, जिसे कुल 50,000 हजार करोड़ रुपए की लागत से मिशन मोड में संचालित किया गया था.

इस अभियान के तहत छह राज्यों- बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड तथा ओडिशा से कुल 116 जिलों को चुना गया था. आंकड़ों के अनुसार, इन जिलों में लॉकडाउन के कारण वापस लौटे प्रवासी श्रमिकों की संख्या सबसे अधिक थी.