विदेशी परिंदे बार हेडेड गूज से गुलजार हुआ पौंग बांध

विदेशी परिंदे बार हेडेड गूज से गुलजार हुआ पौंग बांध

हमीरपुर/ नई दिल्ली. प्रवासी पक्षी बार हेडेड गूज हर साल तरह इस बार भी अंतरराष्ट्रीय रामसर वेटलैंड पौंग में पहुंचना शुरू कर दिया है. हर साल सर्दियों के मौसम में हजारों की संख्या में यह पक्षी यहां मेहमान बनकर आता है. वर्षों से विदेशी प्रजाति के पक्षी बार हेडेड गूज की पहली पसंद पौंग झील बनी हुई है. शीतकालीन सत्र में विश्व भर में सबसे ज्यादा इस प्रजाति के पक्षी ही हिमाचल पहुंचते हैं.

तीस हजार फीट तक की ऊंचाई पर उड़ने वाले ये पक्षी आधी रात को हिमालय पार करके हिमाचल पहुंचते हैं. पौंग पहुंचने वाली इस प्रजाति का आंकड़ा साल दर साल बढ़ रहा है. इस बार भी करीब 50 हजार पक्षी इस प्रजाति के पहुंचने की उम्मीद है. अनुमान है कि इस बार नवंबर तक हजारों पक्षी इस प्रजाति के पौंग झील पहुंच जाएंगे. यहां इसके संरक्षण के लिए वाइल्ड लाइफ विभाग तत्पर हो गया है. पिछले साल पहुंची इस प्रजाति पर विभाग ने कॉलर लगाए हैं.

पूरी तरह शाकाहारी है यह विदेशी मेहमान

बार हेडेड गूज पूरी तरह से शाकाहारी होने के कारण झील किनारे उगी घास खाने के लिए ही पौंग झील में पहुंचते हैं. बार हेडेड गूज हजारों किलोमीटर का सफर तय कर सेंटर एशियन फ्लाई-वे से होकर हिमाचल में प्रवेश करता है. चीन, मंगोलिया, साइबीरिया व तिब्बत देशों में यह प्रजाति पाई जाती है. अक्तूबर की शुरुआत में ही इन सभी देशों में बर्फ पड़ गई है. इस वजह से भोजन इस प्रजाति के लिए लगभग समाप्त हो चुका है. ये पक्षी सिर्फ घास पर निर्भर हैं. पानी वाली जगह उगी घास को ही यह अपना भोजन बनाते हैं. यही कारण है कि इन देशों के बर्फ जमने के बाद यह भारत का रुख करते हैं. ठंड शुरू होते ही भारत में कई झीलों पर ये पक्षी अपना डेरा डाल देते हैं. जिला वन अधिकारी कृष्ण कुमार का कहना है कि सर्दियों में भारत में सबसे पहले इस प्रजाति के पक्षी पौंग झील पहुंचते हैं. पौंग झील में इनका संरक्षण और निगरानी किया जाता है.

जोड़े में रहना पसंद करता है यह प्रवासी पक्षी

शांतप्रिय स्वभाव का यह पक्षी हल्की सी आहट पाकर एक स्थान को छोड़कर दूसरे स्थान की ओर रुख कर लेता है. बैठते समय गर्दन झुका लेने वाला यह पक्षी जोड़े में रहना पसंद करता है. बत्तख प्रजाति का बड़े आकार का यह लगभग 71 से 76 सेमी लंबा और तीन किलोग्राम वजन का होता है. इसका सिर सफेद होता है. जिसके ऊपर दो काले रंग की क्षितिज धारियां होती हैं, जिस कारण इसको बार हेडेड गूज कहा जाता है.

गर्मियों के मौसम में यह पक्षी तिब्बत, कजाकिस्तान, मंगोलिया और रूस आदि देशों में पहाड़ों के पास ठंडे स्थानों तथा झीलों के किनारे रहते हैं. वहां अंडे देकर बच्चे पैदा करते हैं. शीतकाल के प्रारंभ में अक्तूबर में इन देशों में सर्दी बढ़ जाती है और तापमान शून्य डिग्री आ जाता है. तब ये पक्षी सर्दी से बचने तथा भोजन की तलाश में वहां से उड़कर भारत में आते हैं. यह पक्षी पहाड़ों के पास ठंडे स्थानों और झीलों के किनारे जमीन पर उच्च ऊंचाई पर घोंसला बनाता है.

सामाजिक प्रवृत्ति का पक्षी बार हेडेड गूज

बार हेडेड गूज मई-जून में छह से आठ अंडे देकर बच्चे पैदा करता है. मादा पक्षी अंडों को सेते हैं और 27 से 30 दिन में बच्चे पैदा हो जाते हैं. बच्चे 53 दिन में उड़ने योग्य हो जाते हैं. यह एक सामाजिक प्रवृत्ति का पक्षी है जो पारिवारिक समूहों में रहते हैं. समूह में एक नर और पांच मादाओं साथ रहते हैं. इसके खून के हीमोग्लोबिन में एक विशेष एमीनो एसिड होने के कारण काफी ठंडे स्थानों पर रहने के लिए इनका शरीर उपयुक्त है. आठ घंटे बगैर रूके एक बार में यह उड़ सकता है.

बार हेडेड गूज दुनिया का सबसे ऊंचे उड़ने वाले पक्षियों में से एक है. यह तिब्बत से उड़कर बगैर रूके हिमालय की ऊंची-ऊंची पहाड़ियों को पारकर भारत में आते हैं. यह पक्षी समूह में वी आकृति में उड़ान भरते हैं. ठंड कम होते ही प्रवासी पक्षी 15 मार्च के बाद हिमालय की लगभग 8000 मीटर की ऊंचाई को पार करके पुन: अपने देश चले जााते हैं. यह शाकाहारी पक्षी है और इसका मुख्य भोजन विभिन्न प्रकार की घासें हैं.