ग्रामीण गैर-नियोजित युवा/प्रवासी मजदूर के लिए ‘पॉटरी एक्टिविटी’ और ‘मधुमक्खी पालन योजनाओं का ऐलान जानिए कैसे ले सकते है इन योजनाओं का फायदा

ग्रामीण गैर-नियोजित युवा/प्रवासी मजदूर के लिए 'पॉटरी एक्टिविटी' और 'मधुमक्खी पालन योजनाओं का ऐलान जानिए कैसे ले सकते है इन योजनाओं का फायदा - Panchayat Times
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नई दिल्ली. सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) दो योजनाओं के लिए नए दिशानिर्देश लेकर आया है, जिनमें ‘पॉटरी एक्टिविटी’ और ‘मधुमक्खी पालन गतिविधि’ शामिल हैं.

क्या है पॉटरी एक्टिविटी’ और सरकार कैसे करेगी सहायता प्रदान

‘पॉटरी एक्टिविटी’ अर्थात मिट्टी के बर्तन बनाने के काम के लिए सरकार चाक, क्ले ब्लेंजर और ग्रेनुलेटर जैसे उपकरणों की सहायता प्रदान करेगी. इसके अलावा वह स्व-सहायता समूहों को पारंपरिक बर्तन बनाने वाले कारीगरों के साथ ही गैर पारंपरिक बर्तन बनाने वाले कारीगरों के लिए व्हील पॉटरी और प्रेस पॉटरी और जिगर जॉली पाटरी बनाने के प्रशिक्षण की सुविधा भी देगी.

क्या होंगे फायदे

i) मिट्टी के बर्तन बनाने वाले स्वसहायता समूहों के कारीगरों के लिए बगीचों में रखे जाने वाले गमले, खाना पकाने वाले बतर्न, कुल्लहड़, पानी की बोतलें, सजावटी उत्पाद और भित्ति आदि जैसे उत्पादों पर केन्द्रित कौशल-विकास प्रशिक्षण शुरू किया गया है.

ii) नई योजना का मुख्य जोर उत्पाद बढ़ाने तथा उत्पादन की लागत को कम करने के लिए कुम्हारों की तकनीकि दक्षता बढ़ाने तथा उनकी भट्टियों की क्षमता वृद्धि करना है.

iii) निर्यात और बड़ी खरीदार कंपनियों के साथ गठजोड़ करके आवश्यक बाजार संपर्क विकसित करने के प्रयास किए जाएंगे.

कुल 6,075 पारंपरिक और अन्य (गैर-पारंपरिक) मिट्टी के बर्तनों के कारीगर/ग्रामीण गैर-नियोजित युवा/प्रवासी मजदूर इस योजना से लाभान्वित होंगे.

वर्ष 2020-21 के लिए वित्तीय सहायता के रूप में, एमजीआईआरआई, वर्धा, सीजीसीआरआई, खुर्जा, वीएनआईटी, नागपुर और उपयुक्त आईआईटी/एनआईडी/एनआईएफटी/एनआईएफटी आदि के साथ 6,075 कारीगरों की मदद के लिए उत्पाद विकास, अग्रिम कौशल कार्यक्रम और उत्पादों के गुणवत्ता मानकीकरण पर 19.50 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी.

मंत्रालय की स्फूर्ति योजना के तहत टेराकोटा और लाल मिट्टी के बर्तनों को बनाने तथा पाटरी से क्रॉकरी बनाने की क्षमता विकसित करने और टाइल सहित अन्य नए नवीन मूल्य वर्धित उत्पाद बनाने के लिए क्लस्टर्स विकसित किए जाएंगे. इनके लिए 50 करोड़ रूपए का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है.

‘मधुमक्खी पालन गतिविधि’  योजना के तहत सरकार प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार योजना के तहत मधुमक्खी के बक्से, टूल किट आदि की सहायता प्रदान करेगी. इस योजना के तहत प्रधान मंत्री कल्याण रोज़गार अभियान वाले जिलों में प्रवासी मजदूरों को मधुमक्खियों की बसावट वाले इलाकों के साथ ही मधुमक्खी बक्से भी दिए जाएंगे. लाभार्थियों को निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार 5 दिनों का मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण भी विभिन्न प्रशिक्षण केंद्रों / राज्य मधुमक्खी पालन विस्तार केंद्रों / मास्टर ट्रेनरों के माध्यम से प्रदान किया जाएगा;

• मधुमक्खी पालकों / किसानों के लिए स्थायी रोजगार पैदा करना;

• मधुमक्खी पालकों / किसानों के लिए पूरक आय प्रदान करना;

• शहर और शहद से बने उत्पादों के बारे में जागरूकता पैदा करना;

• कारीगरों को  मधुमक्खी पालन और प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीके अपनाने में मदद करना;

• मधुमक्खी पालन में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करना;

•  मधुमक्खी पालन में परागण के लाभों के बारे में जागरूकता पैदा करना.

मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि इन रोजगार के अवसरों के माध्यम से अतिरिक्त आय के स्रोत बनाने के अलावा, इनका अंतिम उद्देश्य भारत को इन उत्पादों में आत्मनिर्भर बनाना है और अंततः निर्यात बाजारों में अच्छी पैठ बनाना है.

 मधुमक्खी पालन योजना में निम्नलिखित सुधार किए गए हैं:

– कारीगरों की आमदनी बढ़ाने के लिए प्रस्तावित शहद उत्पादों के लिए अतिरिक्त मूल्य की व्यवस्था करना

–  मधुमक्खी पालन और प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाने की सुविधा प्रदान करना

– शहद आधारित उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने में मदद करना

 बीकीपिंग हनी क्लस्टर्स के विकास के लिए अतिरिक्त 50 करोड़ रुपये का प्रावधान

शुरुआत में ही, 2020-21 के दौरान योजना में प्रस्तावित तौर पर जुड़ने वाले 2050 मधुमक्खी पालक, उद्यमी, किसान, बेरोजगार युवा, आदिवासी इन परियोजनाओं/कार्यक्रमों से लाभान्वित होंगे. इसके लिए, 2050 कारीगरों (स्वयं सहायता समूहों के 1,250 लोग और 800 प्रवासी कामगारों) को समर्थन देने के लिए 2020-21 के दौरान 13 करोड़ रुपये के वित्तीय समर्थन का प्रावधान किया गया है, इसके साथ ही सीएसआईआर/आईआईटी या अन्य शीर्ष स्तर के संस्थानों के साथ मिलकर सेंटर फॉर एक्सीलेंस शहद आधारित नए मूल्य वर्धित उत्पादों का विकास करेगा.

वहीं, ‘मंत्रालय की एसएफयूआरटीआई योजना’ के अंतर्गत बीकीपिंग हनी क्लस्टर्स के विकास के लिए अतिरिक्त 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.

कार्यक्रम से तात्कालिक तौर पर लगभग 1,500 कारीगरों को लाभ होगा, जिसके तहत ज्यादा आय के साथ ही उन्हें टिकाऊ रोजगार भी मिलेगा. इस कार्यक्रम से विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले कारीगर, स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) और ‘प्रवासी कामगारों’ को लाभ होगा. यह कार्यक्रम स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी के अलावा ऐसे उत्पादों के निर्यात बाजार को हासिल करने में भी सहायता मिलेगी.