पर्यटन मंत्रालय द्वारा ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है देखो अपना देश वेबिनार श्रृंखला का आयोजन

पर्यटन मंत्रालय द्वारा ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है देखो अपना देश वेबिनार श्रृंखला का आयोजन - Panchayat Times

नई दिल्ली. पर्यटन मंत्रालय के देखो अपना देश वेबिनार श्रृंखला के 26 सितंबर 2020 को आयोजित “ग्रामीण पर्यटनः पूर्व की विशिष्टता से लेकर भविष्य के मानक तक (रूरल टूरिज्म: फ्रॉम प्रीवियस निश टू फ्यूचर नॉर्म)” नामक कार्यक्रम में गांव, लोग, खेती, संस्कृ​ति और स्थिरता, जिम्मेदारी और सामुदायिक जीवन के विचार के बारे में बताया गया.

शहरी उद्योगों के करीब-करीब ध्वस्त होने के कारण लाखों लोगों की नौकरीयां चली गई या लोगों के वेतन में कटौती हो गई. हमारे शहरों और शहरी उद्योगों में जीवन यापन करने वाले अधिकांश लोग ग्रामीण भारत में एक वैकल्पिक इको-सिस्टम बनाने की वास्तविक संभावना के कारण कठिन यात्रा कर अपने गांव वापस गए है.

भारत के खूबसूरत गांवों के माध्यम से पर्यटन के क्षेत्र में बदलाव को लेकर आयोजन

इस वेबिनार के माध्यम से पर्यटन मंत्रालय ग्रामीण पर्यटन के जरिए भारत के खूबसूरत गांवों के माध्यम से पर्यटन के क्षेत्र में बदलते प्रतिमान के साक्षी बने हैं. ग्रीन पुपील के संस्थापक द गोट विलेज एंड बकरी छाप के संस्थापक रूपेश राय ने इसे प्रस्तुत किया.

उन्होंने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि केदारनाथ तबाही के बाद के महीनों ने उनके जीवन को हमेशा के लिए बदल दिया. रूपेश के कुछ कामों में द गोट विलेज (ग्रामीण और स्थायी पर्यटन), बकरी स्वयंवर (सोशल इंजीनियरिंग द्वारा पशुधन का जीन पूल सुधार) और बकरी छाप (सीमांत हिमालयी किसानों का प्रतिनिधित्व करने वाला एक ब्रांड) शामिल हैं.

तबाही ने पानी में डूबे राज्य के बड़े हिस्से वाले राज्य उत्तराखंड के पूरे स्वरूप को बदल दिया

तबाही ने पानी में डूबे राज्य के बड़े हिस्से वाले राज्य उत्तराखंड के पूरे स्वरूप को बदल दिया. प्रस्तुतकर्ता ने पहली परियोजना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ​कुछ लोगों के बेहतर जीवन की तलाश में बाहर जाने के कारण 1800 गांव खाली हो गए. ग्रामीण पर्यटन वास्तव में ग्रह और लोगों को लाभान्वित कर सकता है. यह सामुदायिक पर्यटन की एक छवि की तरह है. भारत में लगभग 6,47,000 गांव हैं. पर्यटन संस्कृति, कृषि, कला, प्रकृति, भोजन आदि के उत्प्रेरक की भूमिका निभाता है.

1990 के दशक तक पर्यटन के केवल दो रूप मौजूद थे

1990 के दशक तक पर्यटन के केवल दो रूप मौजूद थे- तीर्थयात्रा और ग्रामीण पर्यटन. सामान्य तौर पर बच्चे छुट्टी के दौरान गांव में दादा-दादी के घर जाते हैं. धीरे-धीरे हम उपभोक्तावाद के शिकार हो गए. ग्रामीण पर्यटन का सबसे अनिवार्य हिस्सा कहानी है. एक यात्री के रूप में स्थानीय लोगों, संस्कृति, भोजन, रीति-रिवाजों का अनुभव मिलता है और सभी देसी चीजों का आनंद लेते हैं.

एक प्रस्तुतकर्ता ने कहा कि अगर जिम कॉर्बेट के गांवों के आसपास आने—जाने वाले की संख्या को बढ़ावा जाए तो ग्रामीण पर्यटन को अच्छी तरह से और जिम्मेदारी से भी बढ़ावा दिया जा सकता है.

दूसरे प्रस्तुतकर्ता 23 वर्षीय मणि महेश ओरोरा थे जो हिमालय में एक आत्म-प्रत्यक्षीकरण विश्राम पर थे. उन्होंने ग्रीन पीपुल के साथ एक ट्रेकर के रूप में अपनी शुरुआत की थी. उसके बाद वे एक रेसिडेंट स्वयंसेवक बन गए और आखिरकार वह बकरी छाप एंड द हाइडआउट के एक सह संस्थापक की भूमिका में आ गए.

गांव के जीवन की सादगी की सराहना करते हुए, उन्होंने शहरों में घुटन भरी जिंदगी के बारे में भी बताया. उन्होंने कहा कि हमें रहने और कमाई के अन्य देसी स्वदेशी पारंपरिक तरीकों को एकीकृत करने की आवश्यकता है. एक आदर्श बदलाव के लिए भारी पैमाने पर सतत पर्यावरणीय गतिविधि से आता है जिससे ग्रामीणों को बार—बार आय मिलती है.

देखो अपना देश वेबिनार श्रृंखला को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस विभाग, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ तकनीकी साझेदारी में प्रस्तुत किया गया है. वेबिनार के सत्र अब https://www.youtube.com/channel/UCbzIbBmMvtvH7d6Zo_ZEHDA/featured पर उपलब्ध हैं और पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार के सभी सोशल मीडिया हैंडल पर भी उपलब्ध हैं.

अगला वेबिनार “गांधीजी: द बॉम्बे इयर्स” शीर्षक से 1 अक्टूबर 2020 को सुबह 11.00 बजे निर्धारित किया गया है.