नई दिल्ली. देश में पंजीकृत 40.7 करोड़ वाहनों में से 70 प्रतिशत से अधिक किसी न किसी अनिवार्य नियम का पालन नहीं कर रहे हैं। इनमें प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC), फिटनेस सर्टिफिकेट या बीमा जैसे मानकों की कमी पाई गई है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई है।
पिछले सप्ताह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ हुई बैठक में साझा किए गए डेटा के मुताबिक, नियमों का पालन न करने वाले कुल वाहनों में से लगभग 23.5 करोड़ यानी दो-तिहाई से अधिक दोपहिया वाहन हैं। मंत्रालय ने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए राज्यों को एक नया ढांचा प्रस्तावित किया है, जिसके तहत वाहन मालिकों को तय समय-सीमा में वैधानिक अनुपालन पूरा करना होगा। ऐसा न करने पर गैर-अनुपालक वाहनों का चरणबद्ध तरीके से स्वतः डी-रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि वाहन (वाहन) डेटाबेस में बड़ी संख्या में ऐसे वाहन दर्ज हैं जो कानूनी या परिचालन रूप से सड़कों पर चलने योग्य नहीं हैं, जिससे कुल आंकड़ा कृत्रिम रूप से बढ़ा हुआ दिखाई देता है।
सरकार डेटाबेस को साफ करना चाहती है
एक अधिकारी ने कहा, “सरकार डेटाबेस को साफ करना चाहती है। राज्यों से फीडबैक देने और डेटाबेस की सफाई की योजना बनाने को कहा गया है।”आंकड़ों के अनुसार, देश में करीब 8.2 करोड़ वाहन पूरी तरह सक्रिय और नियमों के अनुरूप हैं, जबकि 30 करोड़ से अधिक वाहनों में किसी न किसी प्रकार की अनुपालन कमी है। इसके अलावा 2.2 करोड़ वाहन पहले ही आर्काइव किए जा चुके हैं।
मंत्रालय ने वाहनों को चार श्रेणियों में बांटा है—
एक्टिव-कम्प्लायंट (सभी दस्तावेज वैध),
एक्टिव नॉन-कम्प्लायंट (कुछ दस्तावेज अमान्य),
टेम्पररी आर्काइव्ड (लंबे समय या बार-बार अनुपालन में विफल),
परमानेंट आर्काइव्ड (स्क्रैप, आरसी रद्द, डी-रजिस्टर या सरेंडर किए गए वाहन)।
बड़े राज्यों में तमिलनाडु, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और बिहार में 40 प्रतिशत से अधिक पंजीकृत वाहन ऐसे हैं जो सक्रिय होने के बावजूद नियमों का पालन नहीं कर रहे। तेलंगाना एकमात्र राज्य है जहां यह अनुपात 20 प्रतिशत से कम है। वहीं, टेम्पररी आर्काइव्ड श्रेणी में राजस्थान, ओडिशा, बिहार, मध्य प्रदेश और कर्नाटक में 40 प्रतिशत से अधिक वाहन शामिल हैं।
प्रस्तावित ढांचे के तहत, एक्टिव नॉन-कम्प्लायंट वाहनों के मालिकों को एक वर्ष के भीतर फिटनेस, बीमा और PUC प्रमाणपत्र नवीनीकरण कराना होगा। ऐसा न करने पर वाहन टेम्पररी आर्काइव श्रेणी में चला जाएगा। यदि दो वर्षों तक भी अनुपालन नहीं किया गया तो वाहन को परमानेंट आर्काइव में डाल दिया जाएगा।
अधिकारियों के मुताबिक, यह पुनर्वर्गीकरण स्वतः प्रणाली के माध्यम से होगा। परमानेंट आर्काइव को अंतिम माना जाएगा। हालांकि, डेटा त्रुटि, अदालत के आदेश या पुराने माइग्रेशन डेटा से जुड़ी विशेष परिस्थितियों में ही वाहन को वापस सक्रिय करने की अनुमति होगी। इसके लिए परिवहन आयुक्त की मंजूरी जरूरी होगी। सभी रिकवरी डिजिटल रूप से लॉग होंगी, ऑडिट योग्य होंगी और पारदर्शिता के लिए रिपोर्ट की जाएंगी।
