‘माउंट विन्सन’ फतह करने वाली ताजूपुर की बहू का हुआ भव्य स्वागत

विधायक ने 'माउंट विन्सन' फतह करने वाली ताजूपुर की बहू का किया स्वागत

फरीदाबाद. दुनिया की सात प्रमुख पर्वत चोटियों में आखिरी बची ‘माउंट विन्सन’ को फतह करने वाली फरीदाबाद के गांव ताजूपुर की बहू विश्व रिकॉर्डधारी पर्वतारोही डॉ. अरुणिमा सिन्हा का मंगलवार को अपने क्षेत्र पहुंची. जहां पर तिगांव विधानसभा क्षेत्र के विधायक ललित नागर ने उनको भव्य स्वागत किया. साथ ही ललित नागर ने खुली जिप्सी में घूमकर उनका हौसला बढ़ाया.

नागर ने कहा कि गांव की इस बहू ने अपने हौसले और मजबूत इरादों से देश ही नहीं बल्कि दुनिया में प्रसिद्धी हासिल की है और साथ ही साथ भारत और फरीदाबाद का नाम भी रौशन किया है. आज पूरे ताजूपुर गांव को अपनी इस बेटी पर गर्व हो रहा है और वह जिले और प्रदेश की अन्य बेटियों के लिए प्रेरणास्त्रोत बनकर उभर रही हैं. उन्होंने अरुणिमा के पति और उसके ससुराल वालों को भी इस उपलब्धि पर शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की.

विधायक ने 'माउंट विन्सन' फतह करने वाली ताजूपुर की बहू का किया स्वागत-Panchayat Times
फोटो साभार इंटरनेट : डॉ. अरुणिमा सिन्हा

उल्लेखनीय है कि अरुणिमा अब तक एवरेस्ट (एशिया) के अलावा किलीमंजारो (अफ्रीका), एल्ब्रुस (रूस), कास्टेन पिरामिड (इंडोनेशिया), किजाश्को (आस्ट्रेलिया) और माउंट अकंकागुआ (दक्षिण अमेरिका) पर्वत चोटियों पर आरोहण कर चुकी हैं. उन्होंने मांउट विन्सन को फतह कर अपनी अंतिम मंजिल को भी प्राप्त कर लिया है.

तमाम उपलब्धियों पर सरकार ने उन्हें ‘पद्मश्री’ अवार्ड से नवाजा था. हाल में उन्हें ब्रिटेन की एक यूनिवर्सिटी ने डॉक्टरेट की मानद उपाधि से भी सम्मानित किया था. अरुणिमा ने बताया कि प्रधानमंत्री ने माउंट विन्सन पर तिरंगा लहराने के लिए उन्हें विदा किया था.

अरुणिमा ने बताया कि इस महत्वाकांक्षी सफर पर उनके पति गौरव सिंह भी साथ थे. तापमान शून्य से 45 डिग्री नीचे था. मन में देश के लिए विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर करीब 4095 मीटर पर तिरंगा फहराने का लक्ष्य था. कृत्रिम पैर होने के कारण रास्ते में कई अड़चने आईं, लेकिन उसे उन्होंने आड़े नहीं आने दिया.

विधायक ने 'माउंट विन्सन' फतह करने वाली ताजूपुर की बहू का किया स्वागत-Panchayat Times
फोटो साभार इंटरनेट : डॉ. अरुणिमा सिन्हा

एक कृत्रिम पैर के सहारे एवरेस्ट फतह करने वाली दुनिया की वह एकमात्र महिला है. उल्लेखनीय है कि डॉ. अरुणिमा को अप्रैल 2011 में लखनऊ से नई दिल्ली जाते समय कुछ बदमाशों ने चलती रेलगाड़ी से बाहर फेंक दिया था. उसी दौरान दूसरी पटरी पर ट्रेन आ रही थी, इससे उनका बायां पैर कट गया था. कृत्रिम पैर के माध्यम से उन्होंने विजय पाई है.