नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत के बाद कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य का खुला, सुरक्षित और सुलभ रहना पूरी दुनिया के लिए बेहद जरूरी है। यह बातचीत ऐसे समय हुई, जब पश्चिम एशिया में ईरान को लेकर युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है और तेल-ऊर्जा आपूर्ति पर वैश्विक चिंता बढ़ गई है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत तनाव कम करने और जल्द से जल्द शांति बहाली के पक्ष में है।
यह अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद मोदी और ट्रंप के बीच पहली बातचीत बताई जा रही है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की स्थिति और होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने की अहमियत पर चर्चा की। पीएम मोदी ने भी X पर कहा कि ट्रंप के साथ उनकी “उपयोगी बातचीत” हुई और भारत शांति के प्रयासों के समर्थन में खड़ा है।
पीएम मोदी ने अपने संदेश में कहा कि भारत डी-एस्केलेशन, यानी तनाव कम करने, और क्षेत्र में जल्द शांति बहाल करने का समर्थन करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य का खुला रहना सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा का सवाल है। रॉयटर्स के मुताबिक, होर्मुज में व्यवधान ने तेल बाजारों पर गहरा असर डाला है और यह मार्ग दुनिया के तेल व LNG व्यापार के लिए बेहद अहम बना हुआ है।
होर्मुज जलडमरूमध्य, फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ने वाला एक संकरा समुद्री रास्ता है। मौजूदा संकट में इस रूट पर जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। एपी और रॉयटर्स की रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने जलडमरूमध्य पर दबाव बनाए रखा है, जबकि अमेरिका इस मार्ग को फिर से खुलवाने के लिए कूटनीतिक और सैन्य दबाव दोनों बनाए हुए है।
ईरान ने ऐसी किसी प्रत्यक्ष वार्ता से इनकार किया
यह फोन कॉल उस दावे के एक दिन बाद आई, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने ईरान पर ऊर्जा ठिकानों, खासकर पावर प्लांट्स, पर प्रस्तावित हमले को पांच दिन के लिए टाल दिया है। ट्रंप ने इसका कारण तेहरान के साथ “उत्पादक बातचीत” बताया था, लेकिन ईरान ने ऐसी किसी प्रत्यक्ष वार्ता से इनकार किया है। रॉयटर्स और एपी, दोनों ने बताया है कि ट्रंप के दावों और ईरान के रुख में स्पष्ट विरोधाभास बना हुआ है।
भारत ने इस पूरे घटनाक्रम में संतुलित रुख अपनाया
ऊर्जा बाजारों में इस संकट का असर साफ दिख रहा है। रॉयटर्स के अनुसार, होर्मुज में रुकावट और क्षेत्रीय तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया, जबकि विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि अगर यह जलडमरूमध्य लंबे समय तक बाधित रहा, तो कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। यही वजह है कि भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह मुद्दा रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।
भारत ने इस पूरे घटनाक्रम में संतुलित रुख अपनाया है। एक ओर उसने शांति और स्थिरता की बात की है, दूसरी ओर ऊर्जा आपूर्ति के सबसे अहम समुद्री मार्ग को खुला रखने पर साफ चिंता जताई है। पीएम मोदी और ट्रंप के बीच सहमति बनी कि दोनों नेता क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने के प्रयासों पर संपर्क में बने रहेंगे।
