हेल्थ कार्ड होने के बाद भी खर्च करने पड़ रहे पैसे

जोगिंद्रनगर (मंडी). मुख्यमंत्री के गृहजिला मंडी के उपमंडल जोगिंद्रनगर अस्पताल में उपचाराधीन एक मरीज ने अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधा पर गंभीर आरोप लगाए हैं. अस्पताल में दाखिल मरीज बीपीएल परिवार से संबधित है. जिसे स्वास्थ्य विभाग की ओर से हेल्थ कार्ड भी जारी किया गया है. बावजूद उसके भी मरीज को इलाज के लिए अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है.

मरीज का कहना है कि अभी तक उसकी ओर से उपचार के लिए करीब दो हजार रूपये का खर्चा अपने स्तर पर किया गया है. स्थानीय अस्पताल में उसे स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी किए गए हेल्थ कार्ड का लाभ नहीं मिला है.

जोगिंद्रनगर के टिकरू पंचायत के चांदनी गांव के निवासी हरनाम सिंह अस्पताल में करीब चार दिन पहले दाखिल हुआ था. इस दौरान चिकित्सकों की ओर से अल्ट्रासांउड और बीमारी से सबंधित कुछ टेस्ट करवाने के लिए कहा गया था. मरीज का कहना है कि अस्पताल में अल्ट्रासांउड न होने पर उन्हें निजी क्लीनिक में मुंह-मांगे दाम अदा कर अल्ट्रासांउड करवाने को मजबूर होना पड़ा, जबकि चिकित्सकों की ओर से लिखे गए टेस्ट पर भी हजारों रूपये वहन करने पड़ रहे हैं. यही नहीं कुछ दवाईयों और इंजेक्शनों का भी खर्चा उठाना पड़ा है.

अस्पताल की एम्बुलेंस न मिलने पर रोष

स्थानीय अस्पताल से बेड नंबर 3 में दाखिल मरीज के स्वास्थ्य में सुधार न आने पर अस्पताल की ओर से मरीज को शहर के बाहर बड़े सरकारी अस्पताल में उपचार के लिए रैफर किया गया. उपचाराधीन मरीज का कहना है कि उनकी ओर से अस्पताल की एम्बुलेंस की मांग की गई, लेकिन उन्हें एंबुलेंस उपलब्ध नहीं करवाई गई. बाद में उन्हें टैक्सी लेकर टांडा उपचार के लिए पहुंचना पड़ा.

क्या कहते हैं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी

अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाओं पर अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्साधिकारी से फोन पर संपर्क किया गया तो उनके मोबाईल से कोई जवाब नहीं आया. जबकि मुख्य चिकित्साधिकारी ने मामले पर व्यस्तता जाहिर कर कन्नी काट दी. बाद में स्वास्थ्य विभाग सह निदेशक देश राज शर्मा के ध्यान में मामला लाया गया. उन्होंने तमाम बातों को ध्यानपूर्वक सुनते हुए नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाने का भरोसा दिलवाया. वहीं विभागीय अधिकारियों की लापरवाही पर भी कार्रवाई करने के आदेश पारित किए.