बढ़ती जा रही बाढ़ की विभीषिका, एक लाख से ज्यादा लोगों की हो चुकी है मौत

बढ़ती जा रही बाढ़ की विभीषिका, एक लाख से ज्यादा लोगों की हो चुकी है मौत

नई दिल्ली. केरल में आई बाढ़ से अभी तक 370 से ज्यादा लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है. लेकिन आप यह जानकार चौंक जाएंगे हमारे देश में हर साल औसतन 1,654 लोगों की मौत बाढ़ से होती है. सबसे भयावह सच यह है कि भारत में 1953 से 2017 के बीच 64 वर्षो में भारी बारिश और बाढ़ के कारण करीब एक लाख, 7 हजार 487 लोग बाढ़ के कारण काल में समा गए हैं.

इसी साल 19 मार्च को राज्यसभा में केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों को पेश करते हुए सरकार की तरफ से यह जानकारी दी गई. इस आंकड़े के मुतबिक पिछले 64 वर्षो में बाढ़ के कारण लगभग 365860 करोड़ रुपये की फसलों, घरों और जन सुविधाओं का नुकसान हुआ है. विश्व बैंक ने ही अपनी भारत में बाढ़ के खतरे की चेतावनी देते हुए अपनी रिपोर्ट में बताया है कि दुनिया में बाढ़ से होने वाली मौतों पांचवा हिस्सा भारत में है.

बाढ़ को लेकर इसरो की चेतावनी:

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानि इसरो ने भी अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया है कि विश्‍वभर में सर्वाधिक बाढ़ के खतरों का सामना कर रहे देशों में भारत का भी नाम है. भारत की लगभग सभी नदी बेसिनों में बाढ़ आती है. देश के राज्‍यों व केन्‍द्र शासित प्रदेशों में से 22 में बाढ़ आती है. इस कारण 40 मिलियन हेक्‍टेयर इलाके अर्थात देश के भौगोलिक क्षेत्रफल के लगभग आठवें भाग में बाढ़ का खतरा बना रहता है.

विश्व बैंक ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि दुनिया भर में बाढ़-संबंधित मौतों के कुल मामलों में से 20 फीसदी भारत में होते हैं. इसमें चेतावनी दी गई है कि आने वाली सदी में भारत के कोलकाता और मुंबई के अलावा पड़ोसी देशों बांग्लादेश की राजधानी ढाका और पाकिस्तान के कराची जैसे महानगरों में लगभग पांच करोड़ लोगों को बाढ़ की गंभीर विभीषिका झेलनी पड़ सकती है.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पूरे दक्षिण एशिया क्षेत्र में तापमान बढ़ रहा है और यह अगले कुछ दशकों तक लगातार बढ़ता रहेगा. जलवायु परिवर्तन का देश में बाढ़ की स्थिति पर व्यापक असर होगा. इसकी वजह से बार-बार बाढ़ आएगी और पीने के पानी की मांग बढ़ेगी.

वर्ष 2040 तक ढाई करोड़ लोगों को करना पड़ेगा बाढ़ की विभीषिका का सामना:

रिपोर्ट के मुताबिक, इससे कई स्वास्थ्य-जनित समस्याएं भी पैदा होंगी. रिपोर्ट में ओडीशा, आंध्र प्रदेश, केरल, असम, बिहार, गुजरात, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब को बाढ़ के प्रति सबसे संवेदनशील राज्यों की सूची में रखा गया है. विश्व बैंक ने कहा है कि वर्ष 2050 तक छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य बन जाएंगे जबकि देश के 10 सबसे प्रभावित जिलों में से महाराष्ट्र में विदर्भ के सात जिले शामिल होंगे. इससे पहले इसी साल फरवरी में इंडिया स्पेंड ने एक साइंस जर्नल में छपे अध्ययन में कहा था कि वर्ष 2040 तक देश के ढाई करोड़ लोगों के सामने बाढ़ का खतरा बढ़ जाएगा.

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुम्बई के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर डॉ कपिल गुप्ता ने देश में हर साल बढ़ रही बाढ़ की विभीषका को लेकर एक अध्ययन रिपोर्ट तैयार की है. जिसमें उन्होंने बताया है कि हमारे सभी शहरों में बाढ़ की संभावना है. क्योंकि शहरों के अनियंत्रित विकास के कारण शहरो में पानी निकास का मार्ग अवरुद्ध हो चुका है.

उन्होंने बताया है कि बाढ़ की रोकथाम के लिए अनेक ढांचागत सुधारों की आवश्यकता है. सबसे पहले हमारे पास जो मौजूद जलनिकासी मार्ग हैं उन्हें चिन्हित करके ठीक करना होगा. साथ ही यह ध्यान रखना होगा कि शहर के प्राकृतिक जलनिकासी तंत्र में कोई अतिक्रमण नहीं होना चाहिए.

डॉ. कपिल गुप्ता के अनुसार शहरों में बड़ी मात्रा में पुल, खंभों समेत मेट्रो परियोजनाओं का निर्माण मौजूदा जलनिकासी मार्गों में किया जा रहा है. यह घातक है इसके लिए कुछ दूसरे उपाय करने होंगे. उन्होंने बताय है कि इसलिये जब भी किसी शहर में कम समय में भारी वर्षा होती है, बाढ़ के आसार उत्पन्न हो जाते हैं. उदाहरण के लिए जयपुर में वर्ष 2012 में मात्र दो घंटों में 170 मिलीमीटर वर्षा हुई.

इसी प्रकार दिसम्बर 2015 में चेन्नई भारी वर्षा से बुरी तरह प्रभावित हुआ और 2016 में गुरुग्राम (गुड़गांव), बंगलुरु एवं हैदराबाद ने वर्षा से अवरोध झेले. इसलिये आज के दौर में चाहे तटीय शहर हों, अंतर्देशीय शहर हों, पहाड़ी शहर या फिर बड़ी नदियों, बांधों और जलाशयों के किनारे बसे शहर हों, सभी शहर समान रूप से बाढ़ के ख़तरे में हैं.

 

भारत में आई वह 10 सबसे बड़ी बाढ़, जब गई हजारों की जान :

1-असम की बाढ़ 2017- पिछले साल देश के उत्तरपूर्वी राज्य असम में बाढ़ ने काफी तबाही मचाई. असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार असम की बाढ़ से राज्य के 20 ज़िलों के 12.55 लाख से ज़्यादा लोग प्रभावित हुए. इस बाढ़ में सैकड़ों लोगों और जानमाल का भारी नुकसान हुआ. इस बाढ़ के प्रभाव से कोकड़ाझार, लखीमपुर, डिब्रुगढ़, मजुली, बिस्वनाथ, बरपेटा, धीमाजी, गोलाघाट, सिवसागर, करीमगंज, दक्षिण सालमारा और नलबाड़ी ज़िलों में कई सड़कें, तटबंध और पुल क्षतिग्रस्त हुए हुए और भारी तबाही हुई.

2-दक्षिण भारत की बाढ़ 2015- दक्षिण भारत में तीन साल पहले बाढ़ नवंबर-दिसंबर के महीने में उत्तर-पूर्वी मॉनसून के कारण भारी बारिश हुई और बाढ़ ने भारी तबाही मचाई. इस बाढ़ में सबसे ज्यादा प्रभावित तमिल नाडु, आंध्र प्रदेश और पुदुच्चेरी हुए. इस बाढ़ ने चेन्नई शहर को विशेष रूप से प्रभावित किया. इस बाढ़ के कारण लगभग 300 लोग मारे गए, 18 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए, और 20 हजार करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ.

3-जम्‍मू-कश्‍मीर बाढ़ 2014-जम्‍मू-कश्‍मीर भी बाढ़ के प्रकोप से नहीं बच सका. चार साल पहले भीषण बारिश ने पूरे इलाके को जलमग्‍न कर दिया था. इसमें 200 लोग मारे गए थे.

4-उत्‍तराखंड बाढ़ 2013-उत्‍तराखंड में हुई भारी बारिश ने 2013 में भीषण तबाही मचाई थी. चार धाम यात्रा का दर्शन करने आए हजारों श्रद्धालुओं ने लैंडस्‍लाइड में अपनी जान गंवा दी थी. यह भारतीय इतिहास की सबसे भयानक बाढ़ मानी जाती है.

5-हिमालय बाढ़ 2012-3 अगस्‍त 2012 की रात हुई भारी बारिश ने बाढ़ की स्‍थिति पैदा कर दी थी.इसमें कुल 31 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी.

6-ब्रह्मपुत्र बाढ़ 2012-ब्रह्मपुत्र नदी में आई बाढ़ ने काफी नुकसान किया था. इसमें 124 लोग मारे गए थे. यही नहीं बाढ़ का पानी काजीरंगा नेशनल पार्क में भी घुस गया था.जिसमें कि 500 जानवरों की मौत हो गई थी.

7-लद्दाख बाढ़ 2010- 6 अगस्‍त 2010 को लद्दाख का आधे से ज्‍यादा इलाका पानी में डूब गया था. इस इलाके में बाढ़ के पानी ने काफी तबाही मचाई थी. इसमें 255 लोगों की जान चली गई थी.

8-बिहार बाढ़ 2008-बिहार की यह सबसे भयानक बाढ़ थी. जिससे लगभग 2.3 मिलियन लोग प्रभावित हुए थे.

9-महाराष्‍ट्र बाढ़ 2005-2005 में महाराष्‍ट्र में आई भारी बारिश ने काफी नुकसान पहुंचाया था. इस आपदा में 5,000 लोग मारे गए थे.

10- बिहार बाढ़ 2004-बिहार में 2004 में काफी भयंकर बाढ़ आई थी. इसमें 885 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी जबकि 3272 जानवरों की मौत हो गई थी.