पूर्वी सिंहभूम : नारदा पंचायत के अंतर्गत नारदा गांव में सफल होती दिख रही है गोबर से बायोगैस बनाने की विधि

पूर्वी सिंहभूम : नारदा पंचायत के अंतर्गत नारदा गांव में सफल होती दिख रही है गोबर से बायोगैस बनाने की विधि

पूर्वी सिंहभूम. जिला प्रशासन के सहयोग से झारखंड ट्राईबल डेवलपमेंट सोसाइटी (जेटीडीएस) की पहल पर पोटका प्रखंड के नारदा पंचायत अंतर्गत नारदा गांव में गोबर से बायोगैस बनाने की विधि सफल होता दिख रहा है.

शुरुआत में गोबर गैस संयंत्र साकरो सोरेन के घर में लगाया गया, जो खाना बनाने के लिए लकड़ी से पूरी तरह मुक्त हो गया, वहीं अब गांव के अन्य लोग भी बायोगैस से खाना बनाने एवं बिजली जलाने की तैयार कर रहे हैं.

साकरो सोरेन के रसोई में गोबर से निर्मित बायो गैस से पूरे परिवार का खाना बनता है, वही गोबर बाद में खाद के रूप मे उपयोग किया जाता है.

गोबर गैस के उपयोग को लेकर खुशी जताते हुए साकरो सोरेन ने बताया कि उनका चुनाव बायो गैस लाभार्थी के रूप में ग्राम सभा द्वारा किया गया था, इसके बाद झारखंड ट्राईबल डेवलपमेंट सोसायटी (जेटीडीएस) के द्वारा उसके रसोई घर से 10 कदम की दूरी पर बायोगैस डाईजेस्टर का निर्माण किया गया.

यहां घर के मवेशियों का गोबर डाइजेस्टर में डाल कर गैस बनाया जाता है. इस तरह पहले गोबर केवल खेत में खाद के रूप में उपयोग किया जाता था और आज वही गोबर से पहले गैस तैयार होता है, फिर उसके अवशिष्ट से खाद भी बनता है.

साकरो सोरेन कहती हैं कि इससे प्रदूषण भी नही होता, अपने चयन को लेकर उन्होंने जिला प्रशासन, जेटीडीएस व ग्राम सभा का आभार जताया है.

इस संबंध में झारखंड ट्राईबल डेवलपमेंट सोसायटी (जेटीडीएस) के जिला परियोजना प्रबंधक रूसतम अंसारी ने कहा कि लोगों को जागरूक करने एवं इस योजना से लाभ प्राप्त करने में जिला/प्रखंड प्रशासन का काफी सहयोग मिला.

उन्होंने बताया कि जेटीडीएस की यह योजना अनुसूचित जनजाति गरीब परिवार के लिए है, जहां उन्हें गोबर से दोहरा लाभ लेने की तकनीक बताया जाता है. यहां गोबर से पहले गैस तैयार किया जाता है, जिसके बाद उसके अवशिष्ट को एकत्र कर गोबर खाद के रुप में प्रयोग किया जाता है.

इसके लिये चयनित परिवार के पास कम से कम दो मवेशी गाय या भैंस का होना जरूरी है. इस डाइजेस्टर से वैसी ही ऊर्जा मिलती है, जैसा एलपीजी गैस से मिलता है.