देश बड़े संकल्पों और बड़े लक्ष्य की प्राप्ति से ही आगे बढ़ता है : नरेन्द्र मोदी

देश बड़े संकल्पों और बड़े लक्ष्य की प्राप्ति से ही आगे बढ़ता है : नरेन्द्र मोदी-Panchayat Times
साभार इंटरनेट

वाराणसी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी से भाजपा के देशव्यापी सदस्यता अभियान की शुरुआत की. भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जयंती पर प्रधानमंत्री ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर नमो ऐप से शहर के पांच विशिष्ट लोगों को मोबाइल से मिस कॉल देने पर भाजपा का सदस्य भी बनाया.

इस मौके पर प्रधानमंत्री ने जनसंघ के कार्यकर्ता बैजनाथ प्रसाद का सम्मान कर कहा कि दल की शक्ति सादगी और सदाचार की रही है. भारतीय परंपरा के ये चिरस्थायी मूल्य हमें विरासत में मिले हैं. अटल जी, आडवाणी जी, जोशी जी सहित अनेक महापुरुषों ने हर स्तर पर पार्टी का नेतृत्व किया है. सबने इन मूल्यों को अपने जीवन का हिस्सा बनाया है.

देश के दूत बनकर हमें काम करना :मोदी

मोदी ने कहा कि दल के साथ देश के दूत बनकर हमें काम करना है. सदस्यता अभियान को हम राष्ट्र की प्रगति के लिए विश्वास, दोस्ती और बंधुत्व का मजबूत सूत्र मानते हैं. प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि आज से जो सदस्यता अभियान शुरू हो रहा है, उसके मूल में भी यही भावना है. एक कार्यकर्ता के तौर पर भाजपा का सदस्य होने के नाते अपने आपको हमें कभी कम नहीं आंकना चाहिए. भाजपा का कार्यकर्ता कमाल कर सकता है. आज अगर हमें विजय मिल रही है तो इसके पीछे कार्यकर्ताओं का खून पसीना ही है. हमें उन जगहों में भी विजय प्राप्त करना है, जहां पार्टी को सफलता नहीं मिली.

जल संरक्षण और जल संचयन पर जोर

प्रधानमंत्री ने जल संकट का जिक्र कर जल संरक्षण और जल संचयन पर खासा जोर दिया. उन्होंने कहा कि जल सरंक्षण के लिए पूरे देश को एकजुट किया जा रहा है. हमारे सामने पानी की उपलब्धता से भी अधिक पानी की फिजूलखर्ची और बर्बादी बहुत बड़ी समस्या है. उन्होंने बूद-बूंद पानी बचाने का आह्वान कर कहा कि घर के उपयोग में या सिंचाई में पानी की बर्बादी को रोकना आवश्यक है. देश के हर घर को पानी मिल सके, इसके लिए जल शक्ति मंत्रालय तो हम बना ही चुके हैं. साथ ही जल शक्ति अभियान भी शुरू किया गया है. इसका बहुत बड़ा लाभ हमारी माताओं-बहनों को मिलेगा, जो पानी के लिए अनेक कष्ट उठाती हैं.

कुछ निराशावादी लोगों को भारतीयों के सामर्थ्य पर शक

प्रधानमंत्री ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले आम बजट का जिक्र कर कहा कि टीवी पर और आज अखबारों में एक बात आपने पढ़ी सुनी और देखी होगी. पांच ट्रिलियन अर्थव्यवस्था की. इस फाइव ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य का मतलब क्या है. एक आम भारतीय की जिंदगी का इससे क्या लेना-देना.

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि आमजन के लिए यह जानना बहुत जरूरी है. कुछ निराशावादी लोग हैं जो हम भारतीयों के सामर्थ्य पर शक कर रहे हैं। वो कह रहे हैं कि भारत के लिए ये लक्ष्य प्राप्त करना बहुत मुश्किल है. प्रधानमंत्री ने शायराना अंदाज में कहा कि ‘‘वो जो सामने मुश्किलों का अंबार है, उसी से तो मेरे हौसलों की मीनार है. चुनौतियों को देखकर घबराना कैसा, इन्हीं में तो छिपी संभावना अपार है. विकास के यज्ञ में परिश्रम की महक, यहीं तो मां भारती का अनुपम श्रृंगार है.गरीब-अमीर बनें नए हिंद की भुजाएं, बदलते भारत की यही तो पुकार है. देश पहले भी चला और आगे भी बढ़ा है, अब न्यू इंडिया दौड़ने को बेताब है.”

सामूहिक प्रयास से पांच ट्रिलियन के आर्थिक पड़ाव तक पहुंचाएंगे

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें आगे बढ़ने का संकल्प लेना है. नए संकल्प नए सपने लेकर आगे बढ़ेंगे.अर्थव्यवस्था का लक्ष्य बड़ा होगा तो समृद्धि भी बड़ी होगी.अच्छी आय से जीवन स्तर में बदलाव होता है. एक राष्ट्र के तौर पर हमारे सामूहिक प्रयास हमें पांच वर्ष में पांच ट्रिलियन डॉलर के आर्थिक पड़ाव तक जरूर पहुंचाएंगे.

पेशेवर निराशावादियों से सतर्क रहने की जरुरत

प्रधानमंत्री ने पेशेवर निराशावादियों पर तंज कसते हुए कहा कि आप किसी सामान्य व्यक्ति के पास समस्या लेकर जाएंगे तो वो आपको समाधान देगा, लेकिन पेशेवर निराशावादियों के पास आप समाधान लेकर जाएंगे तो वो उसे समस्या में बदल देंगे. देश को ऐसे नकारात्मक लोगों से सतर्क रहने की जरुरत है. प्रधानमंत्री ने अंग्रेजी की कहावत का जिक्र कहा कि जितना बड़ा केक होगा उसका उतना ही बड़ा हिस्सा लोगों को मिलेगा. अर्थव्यवस्था का लक्ष्य भी जितना बड़ा होगा, देश की समृद्धि उतनी ही ज्यादा होगी. उन्होंने भारत के पिछले पांच साल की विकास यात्रा का जिक्र कहा कि कुछ साल पहले क्या किसी व्यक्ति ने सोचा था कि ईज ऑफ डूइंस बिजनेस की रैंकिंग में भारत का स्थान 142 से 77 हो जाएगा. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को लेकर भी हमने लक्ष्यों को प्राप्त करके दिखाया.

बजट में स्टार्ट अप इकोसिस्टम पर जोर

उन्होंने कहा कि बजट में स्टार्ट अप इकोसिस्टम को बल दिया गया है. टैक्स में छूट या फंडिंग से जुड़े मुद्दे हर पहलू के समाधान का प्रयास किया गया है. बिजली से चलने वाली गाड़ियां बनाने, खरीदने और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है. मोदी ने कहा कि हमारे पास कोयला, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और जल ऊर्जा मौजूद है. इनसे बिजली उत्पादन की क्षमता को आधुनिक तकनीक के उपयोग से हम बढ़ा सकते हैं. कचरे से ऊर्जा पैदा करने के अभियान को मजबूती देने के लिए भी बजट में प्रावधान किया गया है.

खेती के साथ-साथ ब्लू इकोनॉमी पर भी विशेष ध्यान

कृषि क्षेत्र का जिक्र कर प्रधानमंत्री ने कहा कि खेती के साथ-साथ ब्लू इकोनॉमी पर भी हम विशेष बल दे रहे हैं. समुद्री संसाधनों और तटीय क्षेत्रों में पानी के भीतर जितने भी संसाधन है, उनके विकास के लिए बजट में विस्तार से बात की गई है. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत गहरे समुद्र में मछली पकड़ना, स्टोरेज, उनकी वैल्यू एडिशन को बढ़ावा दिया जाएगा. इससे मछली के एक्सपोर्ट में हमारी भागीदारी कई गुना बढ़ेगी. देश को विदेशी मुद्रा भी मिलेगी और मछुआरों को अधिक दाम भी मिल पाएगा. अब हम किसान को पोषक से आगे निर्यातक के रूप में देख रहे हैं. अन्न, दूध, फल,.सब्जी, शहद या फिर ऑर्गेनिक उत्पाद इन सबके निर्यात के लिए हमारे पास भरपूर क्षमता है. इसलिए बजट में कृषि उत्पादों के निर्यात के लिए माहौल बनाने पर विशेष बल दिया गया है.

काशी में भी स्वच्छता और सुंदरता का लाभ दिख रहा

प्रधानमंत्री ने स्वच्छता कार्यक्रम का जिक्र कहा कि स्वच्छता का संबंध स्वास्थ्य से तो है ही सुंदरता से भी है. यहां काशी में भी स्वच्छता और सुंदरता का लाभ हम सभी को देखने को मिल रहा है. गंगा घाट से लेकर सड़कों और गलियों तक में साफ-सफाई के कारण यहां आने वाले पर्यटक अब बेहतर अनुभव कर रहे हैं. हम 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुसार पूरे देश में ढांचागत निर्माण कर रहे हैं.

सौर उर्जा के इस्तेमाल पर जोर

प्रधानमंत्री ने लोगों से सौर उर्जा के इस्तेमाल पर जोर देकर कहा कि इससे जहां पर्याप्त बिजली मिलेगी वहीं बिजली को बेच भी सकते है. देश बड़े संकल्पों और बड़े लक्ष्य की प्राप्ति से ही आगे बढ़ता है. इच्छा शक्ति चाहिए कि जो ठान लिया, वो ठान लिया. फिर उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए खुद को समर्पित कर देना चाहिए.

देश की ताकत को कम आंकना गलत

प्रधानमंत्री ने कहा कि पांच-छह वर्ष पहले जब उत्तराखंड में तबाही आई थी तो क्या स्थिति थी. तब कहा जाता था कि केदारनाथ में अब यात्री नहीं आ पाएंगे लेकिन देखिये पहले से ज्यादा यात्री अब वहां दर्शन के लिए जा रहे हैं. इस देश की ताकत को कम आंकना गलत है. जनता की ताकत असंभव को संभव बना सकती है.

पीएम नरेन्द्र मोदी वाराणसी से करेंगे भाजपा के देशव्यापी सदस्यता अभियान की शुरुआत

उन्होंने कहा कि एक समय था जब देश अनाज के संकट से जूझ रहा था. हमको विदेशों से अनाज मंगवाना पड़ता था. उसी दौर में शास्त्री जी ने जय जवान-जय किसान का आह्वान किया और देश के किसानों ने अनाज के भंडार भर दिए. प्रधानमंत्री ने सवाल किया आखिर क्यों हमारा देश बाहर से खाने वाला तेल मंगवाए. मैं जानता हूं अगर देश का किसान ठान ले, अपनी जमीन के दसवें हिस्से को भी तिलहन के लिए समर्पित कर दें, तो तेल आयात में बहुत बड़ा फर्क आ जाएगा.