राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी से कितनी बदलेगी SSC, RRB तथा IBPS की भर्ती प्रक्रिया, जानिए इसमें कौन-कौन सी भर्तियां होंगी शामिल

राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी से कितनी बदलेगी SSC, RRB तथा IBPS की भर्ती प्रक्रिया, जानिए कौन-कौन सी भर्तियां होंगी शामिल - Panchayat Times
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नई दिल्ली. 19 अगस्त को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केंद्र सरकार की नौकरियों के लिये भर्ती प्रक्रिया में सुधार लाने हेतु राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी (National Recruitment Agency- NRA) के गठन को हरी झंड़ी दे दी है.

क्या कुछ बदलेगा

नई व्यवस्था के अनुसार, सरकारी नौकरी के इच्छुक सभी उम्मीदवार राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी (NRA) द्वारा आयोजित एक सामान्य योग्यता परीक्षा (Common Eligibility Test-CET) में केवल एक बार हिस्सा लेंगे, जिसके बाद वे सामान्य योग्यता परीक्षा (CET) के अंकों के आधार पर उच्च स्तर की परीक्षा के लिये किसी भी भर्ती एजेंसियों में आवेदन कर पाएंगे.

राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी (NRA) एक बहु-एजेंसी निकाय होगी, जिसके शासी निकाय में रेलवे मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, वित्तीय सेवा विभाग, SSC, RRB तथा IBPS के प्रतिनिधि शामिल होंगे. एक विशेषज्ञ निकाय के रूप में राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी (NRA), केंद्र सरकार की भर्ती प्रक्रिया में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी और सर्वोत्तम प्रक्रियाओं का पालन करेगी.

क्या है विशेषताएं

सामान्य योग्यता परीक्षा (CET) तीन स्तरों पर आयोजित की जाएगी- स्नातक (Graduation), उच्च माध्यमिक (12वीं उत्तीर्ण) और मैट्रिक (10वीं उत्तीर्ण). SSC, RRB तथा IBPS जैसी एजेंसियां पहले कि तरह बनी रहेंगी. सामान्य योग्यता परीक्षा (CET) के अंकों के स्तर पर की गई स्क्रीनिंग के आधार पर भर्ती की अंतिम चयन प्रक्रिया के लिये परीक्षा का आयोजन संबंधित एजेंसी (SSC, RRB तथा IBPS) द्वारा किया जाएगा.

देश के प्रत्येक जिले में परीक्षा केंद्र स्थापित किये जाएंगे, जिससे दूर-दराज़ के क्षेत्रों में रहने वाले उम्मीदवारों को काफी लाभ प्राप्त होगा. देश भर के 117 ‘आकांक्षी जिलों’ (Aspirational Districts) में परीक्षा संरचना बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जिससे आगे चलकर उम्मीदवारों को अपने निवास स्थान के निकट परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में मदद मिलेगी.

सीईटी में प्राप्‍त स्कोर परिणाम घोषित होने की तिथि से 3 वर्षों की अवधि के लिये वैध

उम्‍मीदवारों द्वारा सीईटी में प्राप्‍त स्कोर परिणाम घोषित होने की तिथि से 3 वर्षों की अवधि के लिये वैध होंगे. सामान्य योग्यता परीक्षा (CET) का पाठ्यक्रम सामान्य होने के साथ-साथ मानक भी होगा. यह उन उम्मीदवारों के बोझ को कम करेगा, जो वर्तमान में प्रत्येक परीक्षा के लिये विभिन्न पाठ्यक्रम के अनुसार अलग-अलग पाठ्यक्रमों की तैयारियां करते हैं.

कौन-कौन सी भर्तियां शामिल होंगी

शुरुआत में, राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी (NRA) द्वारा ग्रुप B और C (गैर-तकनीकी) पदों के लिये उम्‍मीदवारों की शॉर्टलिस्‍ट करने हेतु सामान्य योग्यता परीक्षा (CET) का आयोजन किया जाएगा. कह सकते हैं कि राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी (NRA) द्वारा शुरुआत में उन परीक्षाओं के लिये सामान्य योग्यता परीक्षा (CET) का आयोजन किया जाएगा.

अब तक कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (SSC) और इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनेल सेलेक्शन (IBPS) द्वारा संचालित किया जा रहा है. बाद में इस बहु-एजेंसी निकाय के अंतर्गत कई अन्य परीक्षाओं को भी शामिल किया जा सकता है.

क्यों पड़ी आवश्यकता

वर्तमान में, सरकारी नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों को पात्रता के समान शर्तों वाले विभिन्न पदों के लिये अलग-अलग भर्ती एजेंसियों द्वारा संचालित भिन्न-भिन्न परीक्षाओं में सम्मिलित होना पड़ता है, जिसके कारण उम्मीदवारों को अलग-अलग एजेंसियों के अलग-अलग शुल्क का भुगतान करना पड़ता है और साथ ही उम्मीदवारों को परीक्षा में हिस्सा लेने के लिये लंबी दूरी भी तय करनी पड़ती है, इससे उम्मीदवारों पर आर्थिक बोझ काफी हद तक बढ़ जाता है.

इसके अलावा अलग-अलग भर्ती परीक्षाएं उम्मीदवारों के साथ-साथ परीक्षाओं का आयोजन करने वाली एजेंसियों पर भी कार्य के बोझ को बढ़ा देती हैं, जिसमें बार-बार होने वाला खर्च, सुरक्षा व्यवस्था और परीक्षा केंद्रों से संबंधित मुद्दे शामिल हैं.

सरकार के अनुसार, भारत में प्रत्येक वर्ष लगभग 1.25 लाख सरकारी नौकरियों का विज्ञापन किया जाता है, जिनमें तकरीबन 2.5 करोड़ उम्मीदवार शामिल होते हैं.

कितना है महत्त्व

सामान्य योग्यता परीक्षा (CET) के माध्यम से उम्मीदवारों के लिये कई परीक्षाओं में उपस्थित होने की परेशानी को दूर किया जा सकेगा. प्रत्येक जिले में परीक्षा केंद्रों की अवस्थिति से सामान्य तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों के उम्मीदवारों तथा विशेष रूप से महिला उम्मीदवारों को भी अधिक लाभ होगा.

सामान्य योग्यता परीक्षा (CET) के माध्यम से परीक्षा आयोजन में विभिन्न भर्ती एजेंसियों द्वारा किये जाने वाले खर्च में कमी आएगी, एक अनुमान के अनुसार, इसके कार्यान्वयन से लगभग 600 करोड़ रुपए की बचत की उम्मीद है.