प्रकृति महापर्व करम के रंग में रंग गया झारखंड

रांची/ नई दिल्ली. ”करम के दिन आले रे जोगिया, केकरा मुडे हरदी रंगल फेटा, केकरा मुडे जावा फूलाया, भईया कर मुडे हरदी रंगल फेटा, रे बैनी के मुडे जावा फूलाया” जैसे करमा गीतों के साथ बुधवार को परंपरागत ट्राइबल ड्रेस में सजी युवक-युवतियों की टोली ने सरना प्रार्थना के बाद मांदर की थाप पर नृत्य करना शुरू किया, तो लोगों के पांव जहां थे वहीं थिरकने लगे. मौका था रांची यूनिवर्सिटी के दीक्षांत मंडप में करम पूर्व संध्या समारोह का.

सरना नवयुवक संघ द्वारा आयोजित इस समारोह में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम में गीत, संगीत और नृत्य की ठेठ झारखंडी छटा बिखरी. इस अवसर पर संघ की पत्रिका सरना फूल के 37 वें अंक का लोकार्पण भी किया गया. इस बारे में जानकारी देते हुए सरना नवयुवक संघ के अध्यक्ष प्रोफेसर हरि उरांव ने बताया कि संघ ने 1987 से करम और सरहुल पूर्व संध्या समारोह की शुरुआत की गई है.

सरना नवयुवक संघ द्वारा आयोजित इस समारोह में शहर के विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों की टीमों ने कुड़ूख, मुंडारी, संथाली, नागपुरी और खडिय़ा भाषा के गीतों पर सामूहिक नृत्य पेश किया. गुरुवार को झारखंड सहित पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और बिहार में प्रकृति पर्व करमा का उत्सव मानाया जाएगा. इस पर्व में आदिवासी-मूलवासी समुदाय लोग परंपरागत गीत-संगीत पर लोग झूमते हैं.

करम महोत्सव आज 

रांची यूनिवर्सिटी के डॉ. राम दयाल मुंडा अखरा मोरहाबादी में गुरुवार को सुबह 11 बजे करम महोत्सव की धूम रहेगी. इसमें झारखंड के जानेमाने संस्कृतिकर्मियों के साथ ही शिक्षाविद और स्टूडेंट्स करम पर्व के गीत-संगीत समारोह में शिरकत करेंगे. इसके साथ ही सरना संघ मोरहाबादी और चडरी सरना समिति में भी सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होगा.

प्रकृति की उपासना का महापर्व है करम पर्व 

करमा पर्व झारखंड प्रकृति से जुड़ा है, जिसे झारखंड में भादो शुक्ल पक्ष एकादशी के दिन धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन अखरा में करमा पेड़ की तीन डालियों को पवित्रता पूर्वक गाड़कर उसकी पूजा-अर्चना की जाती है. इस दिन कोटवार द्वारा समुदाय के लोगों को करम कथा सुनने के लिए बुलाया जाता है. करमा दउरा या थाली में पूजन सामग्री को तेल, सिंदूर, धूप-हवन, खीरा, चूड़ा, जावा फूल, अरवा चावल, दूध, फल, फूल को सजाकर दउरा में दीपक जलाते हुए अखरा में लाते हैं.

इस दिन युवक और युवतियां करमा पेड़ के किनारे करमा के गानों पर थिरकते हैं. करमा पूजा के कई चरण होते हैं, जिसमें करमा के लिए जावा उठाना, करम काटने जाते समय पूजन करना, करमा डाल को अखड़ा में गाड़ते समय प्रार्थना करना, पाहन द्वारा करम पूजा करना शामिल है. करम कहानी सुनने से पहले एक मुर्गे की बलि भी दी जाती है.