भारतवर्ष के 31 सेंटर में नौणी विवि बना नंबर वन सेंटर

सोलन. डाॅ.वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विवि नौणी के फूड सांईस एंड टेक्नोलोजी डिर्पाटमेंट के एकरिप सेंटर को देश भर मे बेस्ट सेंटर के अर्वाड 2018-19 से नवाजा गया है. हाल ही में तमिलनाडू एग्रीकल्चर युनिवर्सीटी में देशभर के ऑल इंडीया कोर्डीनेटीड रिसर्च प्रोजेक्ट सेंटर की वार्षिक बैठक के दौरान आईसीएआर कि ओर से नौणी विवि के सेंटर को यह अर्वाड दिया गया.

नौणी विवि के सेंटर को यह अर्वाड देश भर के 31 एकरिप सेंटर मे से दिया गया है. आपको बता दें कि सेंटर को यह अवार्ड प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी विकसीत करने मशीनरी को विकसित करने विभिन्न तकनीकों का विस्तारीकरण करने एवं सेंटर द्वारा विकसित तकनीकों को व्यवसाईकरण करने के लिए किए गए सराहनीय कार्यों के लिए दिया गया है.

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वहीं सेंटर की इस उपलब्धी पर विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. अंजु धिमान ने एकरिप सेंटर नौणी टीम के सदस्यों डाॅ. देविना वैद्य डाॅ. मनीषा कौशल और डाॅ. अनिल गुप्ता को उनकी इस उपलब्धी पर बधाई दी. उम्मीद जताई की यह टीम इसी तरह के सराहनी कार्य करती रहेगी. जिससे किसानों बागवानों को लाभ मिल सके.

वहीं, डाॅ. देविना वैद्य ने बताया कि हाल ही में तमिलनाडू एग्रीकल्चर युनिवर्सीटी मे देशभर के ऑल इंडीया कोर्डीनेटीड रिसर्च प्रोजेक्ट सेंटर की वार्षिक बैठक के दौरान नौणी विवि के सेंटर को यह अवार्ड दिया गया. नौणी विवि के सेंटर को यह अर्वाड देश भर के 31 एकरिप सेंटर में से दिया गया है.

हिमाचल में डेहलिया फूल की खेती को मिलेगा बढ़ावा

डॉ. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, धौलाकुआं को देश में डेहलिया फूल की टेस्टिंग का ‘लीड सेंटर’ (Lead centre of dahlia testing) के रूप में नामित किया गया है. भारत सरकार के कृषि सहकारिता और किसान कल्याण विभाग के पौधा किस्म और कृषक अधिकार प्राधिकरण ने धौलाकुआं अनुसंधान केंद्र को इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय स्तर का ‘लीड सेंटर’ बनाया है. जिससे आने वाले समय में राज्य में डेहलिया की खेती को बढ़ावा मिलेगा. क्योंकि यह पहली बार है किसी परियोजना के तहत इस फूल को विभिन्न किस्मों को हिमाचल में टेस्टिंग के लिए लाया गया है. स्टेशन पर चल रहे अनुसंधान से आने वाले समय में प्रदेश के किसानों के बीच डेहलिया की व्यावसायिक खेती को लोकप्रिय बनाने में मदद मिलेगी.

आपको बता दें कि इस अनुसंधान केंद्र को फूलों पर शोध कार्य करते ज्यादा समय नहीं हुआ है. केंद्र ने वर्ष 2012 में सजावटी पौधों पर काम शुरू किया गया था. पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में अनुसंधान केंद्र ने काफी प्रगति की है. पौधा किस्म और कृषक अधिकार प्राधिकरण ने 2016-17 में 18 लाख रुपए की राशि की एक परियोजना इस केंद्र को स्वीकृत की थी. इसके तहत, आकार और श्रेणियों की 50 से अधिक किस्में उत्तराखंड और आसपास के क्षेत्रों से केंद्र पर लाई गई.