उत्तर को दक्षिण से जोड़ना समय की जरूरत : बंडारू दत्तात्रेय

शिमला. हिमाचल के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय का कहना है कि देश की एकता के लिए उत्तर को दक्षिण से जोड़ना समय की जरूरत है. नशा मुक्त हिमाचल के साथ-साथ राज्य में पर्यटन विकास उनकी प्राथमिकता है. पर्यटन विकास के मुद्दे को लेकर वह तेलंगाना और प्रदेश सरकार दोनों से बात करेंगे. उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़ने में पर्यटन की अहम भूमिका हो सकती है. उनकी कोशिश रहेगी कि विभिन्न माध्यमों से दोनों क्षेत्रों को जोड़कर एकरूपता लाने का प्रयास किया जाए. फिर चाहे वह रेलवे हो अथवा परिवहन का कोई और माध्यम. शिमला में प्रदेश राजभवन में राज्यपाल पद की शपथ लेने के बाद बंडारू दत्तात्रेय पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में यह बात कही.

राज्यपाल ने प्रदेश में बढ़ रहे नशे को लेकर चिंता जताई और इसे सबके सहयोग से खत्म करने की बात कही. उन्होंने कहा कि देवभूमि में नशे का कोई स्थान न हो, सात्विकता हो, सकारात्मकता हो, आध्यातम के साथ हम बच्चों को अच्छे संस्कार दें ऐसा कोशिश रहेगी. नशे जैसी बुराई के खिलाफ हम मिलकर काम करेंगे. सब के सहयोग से हिमाचल के विकास के लिए काम किया जाएगा.

बंडारू दत्तात्रये ने कहा कि उन्होंने राजनीतिक क्षेत्र में लंबे समय तक जनसेवा की है.अब संविधानिक पद पर जि मेदारी का निर्वाहन करना है. राज्यपाल के पद पर वह संविधान के दायरे में रह कर प्रदेश के विकास में सहयोग कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें जो यह नई जिम्मेदारी सौंपी है, उसे वह पूरी तरह से निभाएंगे.

राज्यपाल ने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि सरकार व विपक्ष के समन्वय से प्रदेश में विकास की गति को आगे बढ़ाएंगे. उन्होंने कहा कि कुछ बिन्दुओं पर कार्य करने की रूपरेखा तैयार की है, जिनमें पहला, प्रदेश में पर्यटन विकास में सहयोग. यहां हाई एंड टूरिज़म को कैसे प्रोत्साहित किया जाए ताकि यहां आने वाला पर्यटक राज्य के अंदरूनी क्षेत्रों में भी जा सके. दूसरा, धार्मिक पर्यटन को और विकसित किया जाए.

उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण है यहां की प्रकृति को बचाये रखना. यहां का सौंदर्य बना रहे, हरियाली, जंगल, नदियां प्रदूषित न हों और विश्वस्तर तक आकर्षण बना रहे, इसके लिए सबके सहयोग से कार्य करने की आवश्यकता है. विशेष तौर पर स्कूल के बच्चे इस मुहिम में हमारे ए बेसेडर की भूमिका निभा सकते हैं. स्वयं सेवी संगठन और वन विभाग के सहयोग से इस मिशन को हम आगे लेकर जाएंगे. उन्होंने संस्कृति का संवद्र्धन पर भी बल दिया ताकि भावी पीढ़ी अपने संस्कारों से बंधी रहे.

उन्होंने हिमाचल प्रदेश देवभूमि है और इसे वीरभूमि भी कहा जाता है. यहां की उच्च पर परंपराएं, समृद्ध संस्कृति और रीति-रिवाज़ हैं, जो इस पहाड़ी प्रदेश को अन्यों से अलग करता है. वह इसे अपना सौभाग्य समझते हैं कि हिमालय की गोद में बसे इस प्रदेश में राज्यपाल के रूप में कार्य करने का मौका मिला है. प्रकृति ने हिमाचल को अपार सौंदर्य प्रदान किया है.