नई दिल्ली. National Council of Educational Research and Training (NCERT) द्वारा जारी कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में पहली बार न्यायपालिका के सामने मौजूद चुनौतियों को विस्तार से शामिल किया गया है। “हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका” अध्याय में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ और ‘मामलों का भारी बैकलॉग’ प्रमुख समस्याओं के रूप में उल्लेखित हैं।
क्या हैं बताई गई प्रमुख चुनौतियां?
पुस्तक के अनुसार, न्यायपालिका में विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आती रही हैं। साथ ही, मामलों के अत्यधिक लंबित होने के पीछे कई कारण बताए गए हैं, जैसे—
पर्याप्त संख्या में जजों की कमी
जटिल कानूनी प्रक्रियाएं
कमजोर आधारभूत संरचना
पुरानी किताबों (NCF 2005 आधारित) में न्यायपालिका की संरचना, स्वतंत्रता और भूमिका का उल्लेख था, लेकिन भ्रष्टाचार का जिक्र नहीं था। हालांकि, उसमें यह जरूर कहा गया था कि “Justice delayed is justice denied” — यानी न्याय में देरी, न्याय से वंचित करने के समान है।
सुप्रीम कोर्ट से लेकर जिला अदालतों तक लंबित मामले
नई पुस्तक में लंबित मामलों के अनुमानित आंकड़े भी दिए गए हैं:
Supreme Court of India – लगभग 81,000 मामले
उच्च न्यायालय – करीब 62,40,000 मामले
जिला व अधीनस्थ अदालतें – लगभग 4,70,00,000 मामले
जवाबदेही और शिकायत तंत्र का उल्लेख
किताब में बताया गया है कि न्यायाधीश आचार संहिता से बंधे होते हैं और न्यायपालिका के पास आंतरिक जवाबदेही तंत्र मौजूद है। शिकायतों के लिए केंद्रीयकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (CPGRAMS) के माध्यम से प्रक्रिया स्थापित है। 2017 से 2021 के बीच 1,600 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं।
गंभीर आरोपों की स्थिति में संसद महाभियोग प्रस्ताव पारित कर जज को हटा सकती है, बशर्ते विधिवत जांच के बाद उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए।
पूर्व मुख्य न्यायाधीश का बयान
पुस्तक में पूर्व मुख्य न्यायाधीश B R Gavai का जुलाई 2025 का वक्तव्य भी उद्धृत किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के भीतर भ्रष्टाचार और दुराचार की घटनाएं सार्वजनिक विश्वास को प्रभावित करती हैं, लेकिन पारदर्शी और त्वरित कार्रवाई से भरोसा दोबारा स्थापित किया जा सकता है।
छात्रों से पूछे गए महत्वपूर्ण सवाल
किताब में ‘इलेक्टोरल बॉन्ड’ और ‘सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम’ से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए छात्रों से पूछा गया है कि इन मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया और क्यों।
पुस्तक में बताया गया है कि सरकार द्वारा शुरू की गई इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक करार दिया, क्योंकि मतदाताओं को यह जानने का अधिकार है कि राजनीतिक दलों को चंदा कौन दे रहा है। वहीं, आईटी एक्ट में जोड़े गए एक प्रावधान को 2015 में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ मानते हुए रद्द कर दिया गया था।
नई शिक्षा नीति के तहत बदलाव
NCERT नई किताबें National Education Policy (NEP 2020) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा के अनुरूप तैयार कर रहा है। कक्षा 1 से 8 तक की नई पुस्तकें जारी की जा चुकी हैं। कोविड-19 के बाद 2005 की पाठ्यचर्या आधारित पुस्तकों को “रैशनलाइज” कर सामग्री का बोझ कम किया गया था।
नई किताब में न्यायपालिका की भूमिका के साथ-साथ उसकी चुनौतियों और जवाबदेही तंत्र को शामिल करना पाठ्यक्रम में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।
