सुरेश जोशी फिर बने आरएसएस के सरकार्यवाह

नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की नागपुर में चल रही अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में सुरेश जोशी (भैय्याजी) को आगामी 3 वर्ष (2018-2021) के लिए आरएसएस का सरकार्यवाह पुनर्निर्वाचित किया गया. सरकार्यवाह संघ के सर्वोच्च कार्यकारी अधिकारी होते हैं. सरसंघचालक के बाद यह आरएसएस का दूसरा सबसे बड़ा महत्वपूर्ण पद होता है.

शनिवार को शनिवार को अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के प्रात: सत्र में भैयाजी जोशी ने संघ कार्यस्थिति का ब्यौरा प्रस्तुत कर अपने कार्यकाल की समाप्ति की घोषणा की और उत्तर क्षेत्र संघचालक बजरंग लाल गुप्त को सरकार्यवाह के निर्वाचन की प्रक्रिया सम्पन करने का आग्रह किया. बजरंग लाल ने मध्य क्षेत्र संघचालक अशोक सोहनी को चुनाव अधिकारी नियुक्त किया. चुनाव अधिकारी ने संघ संविधान के प्रावधान के अनुसार चुनाव प्रक्रिया आरंभ की.

उन्होंने उपस्थिति प्रतिनिधियों से सरकार्यवाह के लिए नाम आमंत्रित किए. पश्चिमी क्षेत्र संघचालक जयंतीभाई भडेसिया ने सरकार्यवाह पद के लिए सुरेश जोशी (भैय्याजी) का नाम प्रस्तावित किया. इस प्रस्ताव का समर्थन पूर्व उत्तर प्रदेश क्षेत्र संघचालक वीरेन्द्र पराक्रमादित्य, दक्षिण क्षेत्र कार्यवाह राजेन्द्रन, असम क्षेत्र कार्यवाह डॉ. उमेश चक्रवर्ती और कोंकण प्रांत सह कार्यवाह विठल कांवले ने किया. अन्य नाम का प्रस्ताव न आने के कारण निर्वाचन अधिकारी ने सुरेश जोशी को आगामी 3 वर्ष (2018-2021) के लिए सरकार्यवाह पुनर्निर्वाचित घोषित किया.

अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा संघ के निर्णय प्रक्रिया को आगे बढ़ानेवाली सर्वोच्च मंडल है. इस प्रतिनिधि सभा में संघ के सर्वोच्च कार्यकारी अधिकारी अर्थात सरकार्यवाह का चुनाव होता है. आरएसएस के सरकार्यवाह का चुनाव प्रति 3 वर्ष के बाद नागपुर में ही होता है, क्योंकि संघ का मुख्यालय नागपुर में है.

सन 1950 की प्रतिनिधि सभा में सरकार्यवाह के रूप में प्रभाकर बलवंत दाणी उपाख्य भैयाजी दाणी का चुनाव हुआ. वे 1950 से 1956 तक सरकार्यवाह के पद पर रहे. इसी तरह 1956 से 1962 तक एकनाथ रानडे, 1965 से 1973 मधुकर दत्तात्रय उपाख्य बालासाहेब देवरस और 1973 से 1979 तक माधवराव मुले इस पद पर रहे. इन सभी सरकार्यवाहों के साथ एक विशेष बात जुड़ी है, वह विशेष बात यह है कि ये सभी डॉ. हेडगेवार के सानिध्य में बड़े हुए थे.

सरकार्यवाह के रूप में 1979 से 1987 तक प्रोफ़ेसर राजेंद्र सिंह उपाख्य रज्जु भैया, 1987 से 2000 तक हो.वे.शेषाद्रि, 2000 से 2009 तक मोहन भागवत ने दायित्व संभाला. उसके बाद 2009 से अब तक भैयाजी जोशी इस पद पर कार्यरत हैं.

इंदौर के रहने वाले हैं सुरेश जोशी (भैय्याजी)

मूल इंदोर निवासी सुरेश सदाशिव जोशी भैय्याजी जोशी के नाम से जाने जाते हैं. वह बाल्यकाल से संघ स्वयंसेवक हैं. स्नातक तक पढ़ाई करने के बाद उन्होंने कुछ वर्ष तक मुम्बई में नौकरी की. इसके बाद 1975 से संघ प्रचारक के रूप में जीवन शुरू किया. सुरेश जोशी महाराष्ट्र में जिला और विभाग प्रचारक रहे. उसके बाद प्रांत सेवाप्रमुख बने. पश्चिम क्षेत्र सेवाप्रमुख के नाते दायित्व निभाने के बाद 1998 से 2003 तक संघ के अखिल भारतीय सेवाप्रमुख थे. 2003 में सहसरकार्यवाह के रूप में पहली बार निर्वाचित हुए. उसके बाद से लगातार इस पद पर हैं.