महुआ से बनाया जा रहा है ऐसा पेड़ा जिसे खाकर आप कहेंगे वाह!

रांची. झारखंड में शराब के लिए प्रसिद्ध महुआ से अब पेड़ा बनाने का अनोखा प्रयास किया जा रहा है. जिससे एक नए रोजगार का श्रोत भी विकसित हो रहा है. राजधानी रांची के कांके रोड में एक गैर सरकारी स्वयंसेवी संस्था द्वारा महुआ का इस्तेमाल पेड़े बनाने के लिए किया जा रहा है जो अपने आप में एक अनोखा प्रयास है.

यह एनजीओ महिलाओं को महुआ और दूध के मिश्रण से पेड़े के रोजगार से जोड़ने का काम कर रहा है. ग्रामीण इलाकों की महिलाएं स्वादिष्ट पेड़ा बनाकर बाजार में दूध के बने पेड़ों को भी मात दे रही हैं. इस संस्था के सचिव सिद्धार्थ त्रिपाठी ने बताया कि नौ युवाओं के ग्रुप ने महुआ से पेड़े बनाने के प्रयोग को शुरू किया था. जो अब ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के रूप में सामने आ गया है.

उन्होंने बताया कि अक्सर वह ग्रामीण इलाकों में महुआ से शराब और शराब की लत से परिवारों को बर्बाद होते देखा करते थे और इसी को दूर करने के मकसद से युवाओं ने महुआ और दूध के मिश्रण से पेड़े बनाने की योजना बनाई और सफलता भी हासिल की. उन्होंने बताया कि इस वक्त लगभग 300 महिलाएं इस काम में लगी हुई हैं. हर एक ग्रुप में 70 से 80 महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जो महुआ से पेड़े बनाकर अपने परिवार का भरण पोषण कर रही हैं.

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स्वयं सहायता समूह की तरफ से बताया गया कि राजधानी रांची समेत बेड़ो, लोहरदगा, सिमडेगा और गुमला जिले से महुआ मंडी के मूल्य के हिसाब से सीधे किसानों से खरीदते हैं. फिर उसका उपयोग पेड़ा बनाने में किया जाता है. संस्था के सचिव ने बताया कि फिलहाल पूंजी की कमी है. इस वजह से एक दिन में 5 से 6 किलो ही पेड़े बनाए जा पाते हैं. हालांकि इसकी डिमांड बाजार में बढ़ती जा रही है. उन्होंने कहा कि अगर सरकार की तरफ से कोई सहायता मिले तो महुआ से पेड़े बनाने को बड़े पैमाने पर रोजगार के रूप में ग्रामीण महिलाओं को मुहैया कराया जा सकता है.

उन्होंने बताया कि महुआ से बने पेड़े दवा के रूप में भी काम आ सकते हैं. इसको लेकर शोध किया जा रहा है और पिछले तीन महीने के शोध में पता चला है कि यह जोड़ों के दर्द के लिए काफी लाभदायक है.