अब इस नाम से जानी जाएगी हिमाचल की गाय

अब इस नाम से जानी जाएगी हिमाचल की गाय

तपोवन/नई दिल्ली. अब सरकारे जगहों के नाम बदलने के बाद अब जानवरो के नाम भी बदलना शुरू कर दिया है. इसी नाम बदलने के सिलसिले के बीच जयराम सरकार पहाड़ी नस्ल के गाय को नया नाम देने जा रही है. यह हिमाचल के इतिहास में पहली बार होगा जब कोई सरकार पहाड़ी गाय और लाहौल स्पीति की ‘चुरू गाय’ का नामकरण करने का फैसला किया है.

पशुपालन विभाग ने इसका मसौदा तैयार कर दिया है और आगे की प्रक्रिया शुरू हो गई है. हिमाचल में छोटे कद की पहाड़ी नस्ल की गाय को ‘गौरी’ नाम से पुकारा जाएगा. इतना ही नहीं लाहौल स्पीती में पाई जाने वाली चारू गाय का नाम “हिम चारू” रखा जाएगा. इस बात कि पुष्टि कृषि मंत्री वीरेंद्र कंवर सिंह ने की है. बता दें कि अभी लाहौल घाटी मे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में चारू गायों की संख्या बहुत ही कम है.

अब ‘गौरी’ नाम से पहाड़ी गाय की नस्ल में सुधार कर इसे नई पहचान दिलाई जाएगी. पहाड़ी गाय को पहचान दिलाने और वांशिकी निर्धारित करने के लिए प्रस्ताव राष्ट्रीय पशु अनुवांशिकी संस्थान के पास भेजा गया है. इसके अलावा प्रदेश में बड़ी गोशाला का निर्माण कर गो विज्ञान केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिनमें नस्ल में सुधार के लिए शोध किए जाएंगे. साथ ही गाय के गोबर व गोमूत्र का वैज्ञानिक तरीके से प्रयोग में लाया जाएगा. प्रदेश के हर जिला में एक से तीन गो सेंक्चुरी बनाई जाएंगी. साथ ही बछड़ी ही पैदा किए जाने के लिए सेक्स शार्टड सीमनस्ट्रो लाने का प्रयास किया जा रहा है, साथ ही प्रदेश में प्रयोगशाला भी स्थापित की जाएगी.

कृषि मंत्री वीरेंद्र कंवर ने बताया की गायो के नाम बदलने का फ़ैसला इस लिए किया गया है की इसकी नस्ल में सुधार हो और संरक्षण-संवर्धन किया जा सके. केंद्र सरकार ने भी हिमाचल को पहाड़ी गाय के संरक्षण और संवर्धन के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट मंजूर किया है. इसके लिए जमीन कि खोज की जा रही है और उसी जमीन पर अनुसंधान केंद्र स्थापित होगा. जो गौपाल को गाय पालने के लिए सब्सिडी भी दी जाएगी. आज सड़कों पर घूमती लावारिश गायों में पहाड़ी गायों को संख्या अधिक है. इसीलिए पहाड़ी गाय के नामकरण का जो रास्ता सरकार ने अपनाया है उससे उम्मीद है कि यह काम केवल नामकरण तक न रह जाए, बल्कि इसके संरक्षण और संबर्धन पर गंभीरता से काम हो.

गाय के साथ हिमाचल के राज्यपाल आचार्य देवव्रत

गाय को राष्ट्र माता बनाने का संकल्प पारित कर केंद्र सरकार को भेजा

‘गौरी’ नाम से पहाड़ी गाय की नस्ल में सुधार कर इसे नई पहचान दिलाई जाएगी. पहाड़ी गाय को पहचान दिलाने और वांशिकी निर्धारित करने के लिए प्रस्ताव राष्ट्रीय पशु अनुवांशिकी संस्थान के पास भेजा गया है. इसके अलावा प्रदेश में बड़ी गोशाला का निर्माण कर गो विज्ञान केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिनमें नस्ल में सुधार के लिए शोध किए जाएंगे. साथ ही गाय के गोबर व गोमूत्र का वैज्ञानिक तरीके से प्रयोग में लाया जाएगा. प्रदेश के हर जिला में एक से तीन गो सेंक्चुरी बनाई जाएंगी. साथ ही बछड़ी ही पैदा किए जाने के लिए सेक्स शार्टड सीमनस्ट्रो लाने का प्रयास किया जा रहा है, साथ ही प्रदेश में प्रयोगशाला भी स्थापित की जाएगी. शीतकालीन सत्र में गोमाता को राष्ट्र माता बनाने का संकल्प पारित कर केंद्र सरकार को भेजा गया.

गुरुवार को विधायक अनिरूद्ध सिंह ने नियम-101 के तहत संकल्प चर्चा के लिए रखा, जिस पर सदन में सुरेश कश्यप, किशोरी लाल, कमलेश कुमारी, लखविंद्र सिंह राणा, हीरा लाल, विक्रमादित्य सिंह, राजेश ठाकुर और रमेश धवाला ने चर्चा में भाग लेते हुए अपने विचार रखे. संकल्प चर्चा का उत्तर देते हुए पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि राज्य में 2012 की पशु गणना के अनुसार गाय की संख्या 21.49 लाख है, जिसमें 11.65 लाख देसी और 9.84 लाख विदेशी या संकर नस्ल की हैं.

उन्होंने कहा कि गो माता को राष्ट्रीय माता घोषित करने के लिए संकल्प पास कर केंद्र सरकार को भेजा गया है. प्रदेश में गो सेवा आयोग की स्थापना की जाएगी.

यहां बनाई जाएंगी गो सेंक्चुरी

प्रदेश में हर जिला में एक और बड़े जिला में दो से तीन गौ सेंक्चुरी बनाई जाएंगी. इसमें ज्वालामुखी के मझीण में 535 कनाल भूमि, ऊना के थानाकलां और जिला सोलन के नालागढ़ में हांडाकुंडी में भूमि चयन कर टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. हमीरपुर के कलवाल और खैरी, ऊना के कृष्णा नगर, गगरेट और कतौड़ कलां, चंबा में सराली, सोलन में दाड़लाघाट, शिमला के सुन्नी और बलधार, मंडी के बल्ह और सरकाघाट तथा बिलासपुर के बलसिन्हा, दधोल, धार टटोह और बरोटा ढबवाल क्षेत्रों में गो-अभ्यारण्य बनाने की प्रक्रिया चल रही है.