हिमाचल प्रदेश में नहीं बहाल होगी पुरानी पेंशन योजना

हिमाचल में कम आयु की विधवाओं को पेंशन देने पर विचार : मुख्यमंत्री-Panchayat Times
प्रतीक चित्र

शिमला. हिमाचल प्रदेश में पुरानी पेंशन योजना (ओल्ड पेंशन स्कीम) बहाल नहीं होगी. मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने गुरुवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान कहा कि प्रदेश के वित्तीय संसाधन पुरानी पेंशन स्कीम को बहाल करने की इजाजत नहीं देते.

मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल को छोड़कर शेष सभी राज्यों ने नई पेंशन स्कीम को लागू कर दिया है. पश्चिम बंगाल भी अब अधिक देर तक पुरानी पेंशन योजना को जारी नहीं रख पाएगा, क्योंकि उसकी वित्तीय हालत बहुत खस्ता है और वहां कर्मचारियों को सिर्फ आधा वेतन मिल रहा है.

इससे पूर्व नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री और माकपा विधायक राकेश सिंघा के मूल सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल पेंशन मामले में भारत सरकार के नियमों को लागू करता है, जबकि वेतनमान के मामले में पंजाब का अनुसरण करता है. हिमाचल प्रदेश पेंशनमें वेतन और पेंशन पर हर साल 19 हजार करोड़ रुपए हर साल खर्च हो रहे हैं. जबकि सरकार को विभिन्न करों से 10 हजार करोड़ रुपए प्रति वर्ष का राजस्व प्राप्त होता है.

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मुख्यमंत्री ने सदन को अवगत करवाया कि प्रदेश में करीब एक लाख 36 हजार 931 पेंशनर हैं. पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों पर छह हजार छह सौ साठ करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने एनपीएस योजना को वर्ष 2004 को लागू किया थाए जबकि प्रदेश सरकार ने इसे एक साल पहले ही वर्ष 2003 में लागू कर दिया था. उस समय राज्य में कांग्रेस की सरकार थी. एनपीएस के तहत सरकार के अंशदान को एक अप्रैल 2019 से 10 फीसदी से बढ़ाकर 14 फीसदी कर दिया गया है. इससे प्रदेश के 80 हजार एनपीएस कर्मचारियों को हर साल 175 करोड़ रुपए का लाभ होगा.

इससे पूर्व नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि सत्ता में आने पर भाजपा सुविधा की राजनीति कर रही है.  विपक्ष में रहते हुए भाजपा इस मामले को जोर.शोर से उठाती थी, लेकिन आज उसकी भाषा बदल गई है.उन्होंने कहा कि प्रदेश व केंद्र की सरकार को मिलाकर डबल ईंजन सरकार चल रही है. इसलिए मुख्यमंत्री को संसाधनों की बात नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने पुरानी पेंशन को बंद किया था. उन्होंने सरकार से पेंशनरों को 65, 70 व 75 वर्ष का लाभ देने की मांग भी की.वहीं, राकेश सिंघा ने प्रतिपूरक प्रश्न में वर्ष 2003 से 2017 के बीच असामायिक मौत का शिकार हुए एनपीएस के तहत आने वाले कर्मचारियों के आश्रितों को 10 लाख रुपए ग्रेच्युटी देने की मांग की.