नई दिल्ली. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जस्टिस यशवंत वर्मा को पद से हटाने की मांग से जुड़े आरोपों की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय जांच समिति का पुनर्गठन किया है। लोकसभा की आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, पुनर्गठित समिति 6 मार्च 2026 से प्रभावी होगी।
यह समिति मूल रूप से पिछले वर्ष मार्च में गठित की गई थी, जब जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास से कथित तौर पर जली हुई नकदी के बंडल मिलने के बाद उनके हटाने की मांग उठी थी।
पुनर्गठित समिति में शामिल सदस्य
नए पैनल में शामिल हैं:
जस्टिस अरविंद कुमार, न्यायाधीश, Supreme Court of India
जस्टिस चंद्रशेखर, मुख्य न्यायाधीश, Bombay High Court
बी. वी. आचार्य, वरिष्ठ अधिवक्ता, Karnataka High Court
जस्टिस अरविंद कुमार और बी. वी. आचार्य पहले भी इस समिति के सदस्य थे, जबकि जस्टिस चंद्रशेखर को नए सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। उन्होंने Manindra Mohan Shrivastava की जगह ली है, जो Madras High Court के मुख्य न्यायाधीश हैं।
क्या है मामला?
यह मामला जस्टिस यशवंत वर्मा के आधिकारिक आवास से कथित रूप से बिना हिसाब-किताब की और आंशिक रूप से जली नकदी बरामद होने से जुड़ा है। उस समय वे Delhi High Court में कार्यरत न्यायाधीश थे।
आंतरिक जांच के बाद तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश Sanjiv Khanna ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने की सिफारिश भेजी थी। इसके बाद 21 जुलाई 2025 को संसद के दोनों सदनों में जस्टिस वर्मा को हटाने के लिए प्रस्ताव पेश किया गया था।
आगे की प्रक्रिया
पुनर्गठित समिति आरोपों और परिस्थितियों की समीक्षा जारी रखेगी। समिति सबूतों की जांच कर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी, जिसके आधार पर संसदीय प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई तय होगी।
