राजस्थान : तीन सौ साल पुराना ऐतिहासिक सूर्यकुंड क्या डंपिंग ग्राउंड बन जाएगा

ओबरी कस्बे को लोग कुंड वाला (कंडवारू) गांव कहते हैं- Panchayat Times

डूंगरपुर. जिला मुख्यालय से तीस किलोमीटर दूर स्थित सागवाड़ा तहसील का ओबरी गांव सूर्यकुंड नाम से प्रसिद्ध है. लेकिन इस कस्बें का तीन सौ वर्ष पुराना सूर्यकुंड अपना अस्तित्व खोता जा रहा है. ओबरी कस्बे को लोग कुंड वाला (कंडवारू) गांव कहते हैं. रखरखाव के अभाव से उपेक्षित ऐतिहासिक कुंड अब बदबू मारते पानी का एक गढ्डा और डंपिंग ग्राउंड बन कर रह गया है. सूर्यकुंड के उपरी भाग के मकानों में बने शौचालयों का गंदा पानी भी पाइप लाइन से कुंड में समाहित हो रहा है जिससे ग्राम पंचायत भी परेशान है. वही सूर्यकुंड में शौचालय के गंदे पानी से पूरा परिसर बदबू मार रहा है और वातावरण दूषित भी हो रहा है.

कुंड की हालत ऐसी है कि एक समय ऐतिहासिक पर्यटन के रूप में विकसित हो रहे इस कुंड पर अब किसी की निगाह नहीं है. यही कारण है कि पानी के पुराने जलस्त्रोत को सहेजने और जल स्तर को बढ़ाने के लिए सरकार जल स्वावलंबन जैस अभियान भी चला रही है लेकिन सूर्यकुण्ड पर कुछ काम नहीं हुआ है. अब सूर्यकुंड अपना अस्तित्व खोता जा रहा है. आधुनिक वाटर पार्क, स्वींमिग पुल को कभी मात देने वाला यह सूर्यकुंड नकारा बनकर रह गया है. सूर्यंकुड पर फैली गंदगी और बदबू के कारण लोग अब नहीं जा रहे हैं. इस कुंड के उपर से आ रहे नाले पर बना एक एनिकट में कुड़ा कचरा भरा होने से आसपास गन्दगी का अंबार लग रहा है. मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ रहा है. इससे आसपास की आबादी अक्सर बीमारियों की चपेट में रहती है. साथ ही इस नाले में गांव का कचरा और नालियों का गंदा पानी के साथ अब उपरी भाग के घरों के लोगों ने शौचालय के गंदे पानी की निकासी भी इस सूर्यकुण्ड में दे रखी है. साथ ही ये नाला विदेशी बबूल, झाड़ियां, प्लास्टिक और चीथड़ों और गंदगी से अटा हुआ होने के कारण पानी की निकासी में भी रूकावट आ रही है.

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आठ साल पहले तत्कालिन सरंपच पन्नालाल मीणा के कार्यकाल में नाले की साफ सफाई करवाई गई थी. उसके बाद 25 अगस्त 2016 में सागवाडा प्रधान रेखा रोत, तत्कालिन एसडीएम दीपेन्द्रसिंह राठौड, पंचायत समिति सदस्य योगेश संघवी व जनप्रतिनिधि नटवरलाल मोड पटेल, शंकरलाल सुरमणा, भोपालिंसह, घनश्याम सोनी, सरफराज ने इस धरोहर को बचाने के लिए श्रमदान भी किया था. इसके बाद ना तो पंचायत ने इसकी सुध ली और ना ही आला अधिकारियों ने और ना ही किसी जनप्रतिनिध ने इसकी तरफ रूख किया. जिसकी वजह से धीरे-धीरे यह सूर्यकुंड एक डंपिंग ग्राउन्ड में तब्दिल हो गया. पिछले एक दशक से कस्बें के इस सूर्यकुंड पर पत्थरों से निकलता गौमुखी पानी अब भी बह रहा है लेकिन रखरखाव के अभाव में आसपास गंदगी फैल रही है. वर्ष 1998 में ग्राम पंचायत ओबरी के सरपंच गोविन्द बुनकर ने खुली पडी गौमुखी को टंकी बनाकर बंद कर दिया था तब से पानी की आवक निरन्तर जारी है जो आज भी पेयजल के उपयोग में लाई जा सकती है लेकिन उसके बाद भी किसी ने इसकी सुध नही ली. कभी गौमुखी पानी पूरे गांव की प्यास बुझाया करती थी जो आज बदहाल स्थिती में है.

क्या कहते हैं गांव के लोग

ओबरी गांव के नेपालसिंह चौहान ने कहा ओबरी की शान सूर्यकुंड ही है. प्रशासन और ग्राम पंचायत द्वारा इसका स्थाई और समुचित ध्यान देकर वापस इस अनमोल धरोहर को आबाद करना चाहिए. इसके लिए प्रशासन के साथ साथ ग्रामीणों का सहयोग आवश्यक है. गांव के ही सुभाष चन्द्र कलाल ने कहते हैं- 300 वर्ष पुराने इस सूर्यकुण्ड को समय रहते बचाना आवश्यक है. समय समय पर पानी की आवक हेतु पुख्ता प्रबंध करवाने चाहिए. इस कुण्ड का पानी पशुओं तक के लिए भी काम का नहीं आ रहा है. इस हेतु जनसहयोग एवं भामाशाह एवं युवाआें को मिलकर इसे पुनः आबाद करना चाहिए ताकि डंपिंग ग्राउन्ड जैसी स्थिती नहीं रहे.

ओबरी गांव के दिलीप दवे ने कहा कि जनसहयोग के अलावा प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को भी इस ओर ध्यान देना चाहिए. समय-समय पर जल स्वावलंबन अभियान में भी इस कुण्ड की सफाई एवं जल आवक के पुख्ता प्रबंध करने चाहिए और ग्राम पंचायत द्वारा कुड़ा कचरा एवं गंदगी फैलाने वाले पर उचित दण्ड का प्रावधान रखना चाहीए और जिस किसी ने शौचालय के गंदे पानी की निकासी के पानी के पाईप सूर्य कुण्ड की तरफ है, उन पर प्रशासन और ग्राम पंचायत द्वारा नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए.

गांव के हेमन्त दर्जी ने कहा कि इस ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखने में बाधा डालने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और पाबंद कर प्रतिमाह वार्ड पंच से सफाई संबंधी सूचना लेकर ही सफाईकर्मी को भुगतान करना चाहिए.