सूरजकुंड मेले में मिट्टी के बने घरेलू सामान बनेंगे दर्शकों के आकर्षण का केंद्र

सूरजकुंड मेले में मिट्टी के बने घरेलू सामान बनेंगे दर्शकों के आकर्षण का केंद्र-Panchayat Times
फाइल फोटो

फरीदाबाद. 33वें अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड मेले के शुरु होने में अब मात्र आठ दिन का समय बचा हुआ है, ऐसे में जहां मेले की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है. वहीं पिछले दो दिनों हुई बरसात ने मेले की तैयारियों में बाधा पहुंचाने का काम किया है. हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों की माने तो इस बारिश से मेले में किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं आएगी. इसके साथ ही मेला तय की गई तारीख और समय पर होगा.

उधर मेले में अपनी विभिन्न कलाकृतियों को दर्शाने के लिए जहां देशी और विदेशी शिल्पकार उत्साहित है. वहीं मेले में इस बार मिट्टी के बने घरेलू सामान भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बनेंगे. बड़खल क्षेत्र की एसजीएम नगर की कुम्हारवाड़ा वाली गली के चेतराम प्रजापति और उनका पूरा परिवार मिट्टी से आकर्षक फ्लावर पॉट, दही की हांडी, गिलास, जग और कई घरेलू सामान बनाने में जुटा है. इनके अलावा अलग-अलग आकार के गमले और आकर्षक मूर्तियां भी बनाई जा रही हैं.

सूरजकुंड मेले में मिट्टी के बने घरेलू सामान बनेंगे दर्शकों के आकर्षण का केंद्र
साभार इंटरनेट

चेतराम प्रजापति का मिट्टी के बर्तन और आकर्षक कृतियां बनाने का काम पुश्तैनी है. एक वक्त था जब चेतराम प्रजापति के दादा सन्नू राम और पिता ज्ञासी राम इस काम से जुड़े थे. अब चेतराम प्रजापति के दादा और पिता स्वर्ग सिधार चुके हैं. लेकिन चेतराम ने अपना पुश्तैनी काम नहीं छोड़ा है. इन दिनों चेतराम के साथ उनकी पत्नी विद्या देवी, बेटा पवन प्रजापति और देवी राम भी इसी काम में लगे हैं. देवी राम प्रजापति कहते हैं कि एक फरवरी से शुरू होने वाले सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले से डेढ़-दो महीने पहले ही मिट्टी के आकर्षक सामान बनाने की तैयारी शुरू कर देते हैं. घर में ही भट्टी लगी हुई है.

पहले चाक से जरूरत के मुताबिक कृतियों या बर्तनों को आकार दिया जाता है, फिर भट्टी में इन्हें पकाया जाता है. मेले के अलावा उनका परिवार स्कूल व कॉलेजों में जाकर भी बच्चों को मिट्टी की आकर्षक कृतियां बनाने का हुनर सिखाते हैं. मेले से ज्यादा उम्मीदें रहती हैं, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में कद्रदान और खरीदार मिल जाते हैं.

महाराष्ट्र के जायकों के साथ संस्कृति से रूबरू होंगे पर्यटक

मेले में इस बार पर्यटकों को थीम स्टेट महाराष्ट्र की संस्कृति के अलावा वहां के स्वादिष्ट व्यंजनों का जायका लेने का मौका मिलेगा. वहीं दर्शकों को महाराष्ट्र की संस्कृति को दर्शाने वाले लोक नृत्य को भी देखने का मौका मिलेगा. पर्यटकों का सूरजकुंड मेले में महाराष्ट्र का प्रसिद्ध वड़ापाव, मोदक और पुरणपोल के लजीज स्वाद चखने को मिलेगा. इसके अलावा लावणी पोवड़ा, मछुआरों का कोली नृत्य जैसे लोक सांस्कृतिक नृत्य भी देखने का मौका मिलेगा. इसके अलावा बॉम्बे चौपाटी की भेलपूड़ी, तांबड़ा-पांडारा रसा, स्पेशल कोल्हापुरी मटन, कांदा पोहे, उपमा, पिटला भाकर, थालीपीट, शीरा (हलवा), समुद्री केकड़े तथा मालवण क्षेत्र का चटकारे लेकर खाया जाने वाला सी फूड भी परोसा जाएगा.

सूरजकुंड मेला के प्रबंध निदेशक राजेश ने बताया के महाराष्ट्र की सांस्कृतिक प्रस्तुति के तहत विश्व प्रसिद्ध लावणी नृत्य के अलावा, पोवाड़ा, तमाशा, दशावतार पारंपरिक नृत्य कला के साथ-साथ मार्शल आर्ट, खतरनाक तलवारबाजी और दंडा पट्टा के नाम उल्लेखनीय है. उन्होंने बताया कि थीम स्टेट हस्तशिल्प में वर्ली पेंटिंग, चित्रकाठी पेंटिंग, तांबे के बर्तन, आदिवासी कागज जाल मुखौटे, इचलकरंजी के चांदी के आभूषण, पैठनी और नौ गज की साड़ियां, कोल्हापुरी चप्पलों के अलावा मेजबान हरियाणा के गोहाना का जलेबा, राजस्थानी दालबाटी चूरमा, पंजाब की मक्के की रोटी, सरसों का साग और छोले भटूरे, दिल्ली की चाट, कुल्फी, पिज्जा, बर्गर जैसे स्टाल हर साल की भांति इस बार मेला परिसर में सजेंगे.