जनऔषधि परियोजना: 6,209 केंद्र जहां मिलती हैं 50 से 90 फीसदी तक सस्ती दवाएं

जनऔषधि परियोजना: 6,209 जनऔषधि केंद्र जहां मिलती हैं 50 से 90 फीसदी तक सस्ती दवाएं - Panchayat Times

नई दिल्ली/रांची. आज भारत सरकार द्वारा दूसरा जनऔषधि दिवस मनाया जा रहा है. जेनरिक दवाओं के उपयोग के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए हर साल 7 मार्च को जनऔषधि दिवस मनाया जाता है. इसकी शुरुआत 7 मार्च 2019 से हुई थी. आज हम आपके इस योजना के बारे में बतानें जा रहे है :-

2008 में शुरू हुई जन योजना, विभिन्न दवाओं और दवाओं के मूल्य निर्धारण पर केंद्रित है. 2014 में केवल 86 केंद्रो से, आज देश के 728 जिलों में से 700 को कवर करते हुए 6,209 जन आयुष केंद्र है.

क्या है जेनरिक दवाइयां

दरअसल जेनरिक दवाएं बिना ब्रांड की दवाएं होती हैं. जो समान रूप से सुरक्षित हैं और ब्रांडेड दवाइयों जैसी ही लाभकारी हैं. चिकित्सकीय प्रक्रिया के लिए जेनरिक दवाएं ब्रांडेड दवाइयों की तुलना में बेहद सस्ती हैं. सबसे ज्यादा फायदा कीमत को लेकर है. ब्रांडेड दवाइयों की तुलना में जेनरिक दवाइयां बहुत सस्ती हैं. कई दवाइयां तो 90 प्रतिशत तक पैसा बचा देती हैं. जेनरिक दवाइयों की औसत कीमत ब्रांडेड दवाइयों से 40-60 प्रतिशत तक कम है.

आम आदमी के बचे 2200 करोड़ रुपये

जन औषधि केंद्र को विश्व की सबसे बड़ी खुदरा दवा श्रृंखला माना जाता है. देश के 728 जिलों में से 700 जिलों में 6209 जन औषधि केंद्र खोले गए हैं. इसके जरिए न सिर्फ देश के हजारों लोगों को नियमित आय का जरिया मिला है. इन केंद्रों में वित्त वर्ष 2019-20 में 383 करोड़ रुपये से अधिक की कुल बिक्री हुई और इससे आम नागरिकों के लिए कुल 2200 करोड़ रुपये की बचत हुई.

जनऔषधि योजना का जिम्मा संभाल रही ब्यूरो आफ फार्मा पीएसयू ऑफ इंडिया (बीपीपीआई) का कहना है कि करीब 700 जिलों में अबतक 6209 के करीब जनऔषधि केंद्र खोले जा चुके हैं. इनमें 900 दवाएं और 174 मेडिकल इक्यूपमेंट उपलब्ध हैं.

इन केंद्रों में बाजार भाव से 50 फीसदी से 90 फीसदी तक सस्ती दवाएं उपलब्ध हैं.

हर महीने आय का जरिया

सरकार 2024 तक जनऔषधि योजना का विस्तार हर जिले में करना चाहती है. इसके तहत आप भी इन 3 श्रेणियों में केंद्र खोल सकते है:-

  1. पहली कैटेगरी में कोई भी व्यक्ति, बेरोजगार फार्मासिस्ट, डॉक्टर, रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर केंद्र खोल सकता है.
  2. दूसरी कैटेगरी में ट्रस्ट, एनजीओ, प्राइवेट हॉस्पिटल, सोसायटी और सेल्फ हेल्प ग्रुप को जनऔषधि केंद्र खोलने का अवसर मिलेगा.
  3. तीसरी कैटेगरी में राज्य सरकारों की ओर से नियुक्त की गई एजेंसी होगी.

इसके लिए रिटेल ड्रग सेल्स का लाइसेंस जन औषधि केंद्र के नाम से होना चाहिए. वहीं, 120 वर्गफुट एरिया में दुकान होनी जरूरी है.

सरकार करती है सहायता

सरकार जनऔषधि केंद्र खोलने पर 2.5 लाख रुपये तक की सहायता करती है. जनऔषधि केंद्र से दवा बेचने पर मिलने वाले को 20 फीसदी लाभ के अलावा हर महीने की बिक्री पर अलग से 15 फीसदी इंसेंटिव (Bonus) मिलता है. 20 फीसदी मार्जिन का मतलब है कि आप महीने में जितनी दवाओं की बिक्री करेंगे, उसका 20 फीसदी कमिशन के रूप में मिलेगा.

वहीं, इंसेंटिव की अधिकतम सीमा 10 हजार रुपये प्रति माह होगी. इंसेंटिव तब तक मिलेगा, जब तक कि 2.5 लाख रुपये पूरे न हो जाएं. नक्सल प्रभावित और उत्तर पूर्व के राज्यों में इंसेंटिव की अधिकतम सीमा 15 हजार रुपये प्रति माह है.

योजना के तहत आप को क्या लाभ मिलेंगे?

  1. दवा की प्रिंट कीमत पर 20% तक का मुनाफा.
  2. दो लाख रुपये तक की एकमुश्त वित्तीय मदद.
  3. PMBJP के तहत खोले गए जन औषधि केंद्र को 12 महीने की बिक्री का 10% अतिरिक्त इंसेंटिव दिया जायेगा. यह रकम हालांकि अधिकतम 10000 रुपये हर महीने होगी.
  4. उत्तर पूर्वी राज्य, नक्स्ल प्रभावित इलाके, आदिवासी क्षेत्रों में यह इंसेंटिव 15% हो सकती है. यहां भी रुपये के संदर्भ में यह रकम अधिकतम 15000 रुपये हो सकती है.