पलामू में भगवान का दिया सबकुछ, फिर भी गरीबी…

पलामू की धरती कभी धन्य थी लेकिन आज सबसे अधिक गरीब... Panchayat Times
प्रतीक चित्र

मेदिनीनगर. पलामू की धरती कभी धन्य थी लेकिन आज सबसे अधिक गरीबी वाले इलाकों में से एक है. जहां एक और पलामूवासी देशव्यापी सामाजिक, राजनीतिक और नैतिक पतन के शिकार हुए हैं वहीं इनकी कुछ विशेष समस्याएं भी हैं. इनसे निरंतर जूझने की नियति सी बन गई है. पलामू जिला में नदी नाले और पहाड़ों की कोई कमी नहीं है. वर्षा होती तो है लेकिन ढलुवा जमीन होने के कारण पानी तेज गति से जिले के बाहर चली जाती है. जिससे धरती प्यासी ही रह जाती है. पलामू का यह दुर्भाग्य रहा है कि यहां के लोगों को अक्सर ही सूखा का सामना करना पड़ता है. जमीन से रोजी-रोटी नहीं जुटने से लोग अन्य साधन तलाशते हैं. सरकारी नौकरियां यहां दुर्लभ है. चूंकि यदा-कदा रिक्तियों के विरुद्ध कई हजार गुणा उम्मीदवार होते हैं.

उद्योग-धंधे के मानचित्र पर से यह जिला गायब है. जबकि यहां पर पर्यटन और खनिज पदार्थों पर आधारित उद्योग धंधे स्थापित कर रोजगार के अवसर बढ़ाये जा सकते हैं लेकिन आज तक इस पर कोई सक्रिय कार्रवाई नहीं हुई है.
जिले के अधिकारियों का इस संबंध में कहना है कि यहां के घने जंगलों में जहां पर पलामू के प्राकृतिक दृश्यों की भरमार है और खनिज पदार्थ उपलब्ध हैं वहां पर उग्रवादियों का डेरा है. इस स्थिति में सिर्फ यही कहा जा सकता है कि यहां पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं, खनिज संपदा की भरमार है लेकिन ये सभी चीजें सिर्फ कागजी आंकड़े तक ही सीमित रह गए हैं.

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जब तक पलामू के भीतरी इलाके में स्वछंद वातावरण नहीं बनेगा तब तक यहां पर उद्योग-धंधों को स्थापित नहीं किया जा सकता है. जिले में रचनात्मक रोजगार के अभाव में युवा पीढ़ी की दिशा भ्रामक हो गई है. नशाखोरी, कुशिक्षा, कुपोषण व दिशाहीनता में डूबी युवा पीढ़ी को आर्थिक व राजनीतिक स्वार्थी की टकराहट ने अंधकार में धकेला है. रोजगार के अभाव की मार यहां के प्रसिद्ध रहे घने वनों पर भी पड़ी है.

यहां पर वर्तमान में इमानदारी से पहल नहीं की जा रही. वैकल्पिक रोजगार के अभाव में व्यक्ति वही करता है, जो वे कर रहे हैं. जब मात्र नंगे पहाड़ रह जाएंगे, तो भूखे मरने या कानून हाथ में लेने की नौबत आ जाएगी. आज इस ओर सक्रिय कार्यवाई करने की आवश्यकता है. आज अधिकांश क्षेत्रों में सिंचाई व्यवस्था सफल नहीं हुई, इस कारण आज यहां पर सभी जगह पानी की किल्लत हो गई है.