नई दिल्ली. हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर चल रही सियासी हलचल के बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने बुधवार को कहा कि राज्य में 31 मई तक पंचायत चुनाव करा दिए जाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर चुनाव में देरी को लेकर बेवजह का विवाद खड़ा करने का आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि सरकार पंचायत चुनाव को लेकर पूरी तरह गंभीर है और चुनाव कार्यक्रम न्यायिक निर्देशों तथा प्रशासनिक सुविधा को ध्यान में रखकर तय किया गया है।
स्कूल परीक्षाओं और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को ध्यान में रखकर लिया फैसला CM बोले- शिक्षकों की चुनाव ड्यूटी के कारण परीक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो, इसलिए मई में कराए जाएंगे चुनाव मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चाहती थी कि पंचायत चुनाव मई महीने में ही कराए जाएं, ताकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन भी हो और स्कूल परीक्षाएं भी प्रभावित न हों।
उन्होंने कहा, “हम चाहते थे कि चुनाव मई में हों, ताकि स्कूल परीक्षाओं पर असर न पड़े, क्योंकि चुनाव ड्यूटी में शिक्षकों की भी तैनाती की जाती है।” इस बयान के जरिए सुक्खू ने साफ संकेत दिया कि सरकार चुनाव को टालने के बजाय व्यवस्थित तरीके से कराने की तैयारी कर रही है।
आरक्षण रोस्टर में 5% बदलाव को लेकर भी सरकार ने दी सफाई
डिप्टी कमिश्नरों को सीमित अधिकार देने के फैसले को बताया व्यावहारिक कदम पंचायत चुनाव से पहले आरक्षण रोस्टर में 5% तक बदलाव की अनुमति को लेकर उठे विवाद पर भी मुख्यमंत्री ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यह फैसला जमीनी स्तर की विसंगतियों को दूर करने के लिए लिया गया है।
सुक्खू ने कहा,
“कई जगहों पर ऐसी सीटें OBC के लिए आरक्षित थीं, जहां उनकी आबादी बेहद कम थी। ऐसी विसंगतियों को दूर करने के लिए डिप्टी कमिश्नरों को सीमित अधिकार दिए गए हैं।” मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह फैसला राजनीतिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक और सुधारात्मक कदम है।
SC, ST, OBC और महिलाओं को आबादी के आधार पर मिलेगा आरक्षण
CM सुक्खू ने कहा- पंचायतों में आरक्षण तय नियमों और जनसंख्या के अनुसार ही लागू होगा । मुख्यमंत्री ने दोहराया कि पंचायत चुनाव में आरक्षण प्रक्रिया पहले से तय नियमों के अनुसार ही लागू होगी।
उन्होंने कहा कि पंचायतों में आरक्षण अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और महिलाओं को उनकी जनसंख्या के अनुपात के आधार पर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा,
“यह एक व्यावहारिक और सुधारात्मक कदम है, इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।”
विधानसभा में BJP के वॉकआउट पर भी सुक्खू ने साधा निशाना
कहा- विपक्ष का मकसद रचनात्मक बहस नहीं, सिर्फ सुर्खियों में बने रहना है। विधानसभा में BJP के वॉकआउट पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि BJP इस मुद्दे को राजनीतिक फायदा लेने के लिए उठा रही है, जबकि इस पर रचनात्मक बहस की जा सकती थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मुद्दा नियम 67 के तहत स्थगन प्रस्ताव के योग्य नहीं था। उन्होंने कहा, “इस विषय को नियम 130 या नियम 62 के तहत भी उठाया जा सकता था। स्थगन प्रस्ताव असाधारण परिस्थितियों के लिए होते हैं, राजनीतिक भाषणों के लिए नहीं।”
‘BJP के पास अब हंगामे के अलावा कुछ नहीं बचा’
CM बोले- विपक्ष मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय केवल राजनीतिक भाषण दे रहा है। सुक्खू ने BJP पर हमला जारी रखते हुए कहा कि विपक्ष के पास अब वॉकआउट और हंगामा करने के अलावा कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि BJP विधायक, जिनमें रणधीर शर्मा भी शामिल हैं, ने इस मुद्दे को प्रक्रियात्मक सवाल के बजाय राजनीतिक मंच की तरह इस्तेमाल किया।
मुख्यमंत्री ने कहा,
“स्थगन प्रस्ताव में कोई स्पष्टता नहीं थी। यह साफ तौर पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश थी।” पंचायत चुनाव को लेकर अब स्थिति साफ, सियासत अभी बाकी, CM के ऐलान के बाद चुनाव की तस्वीर स्पष्ट, लेकिन कांग्रेस-BJP के बीच टकराव जारी। मुख्यमंत्री सुक्खू के इस ऐलान के बाद अब यह साफ हो गया है कि हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव 31 मई तक कराए जाएंगे।
हालांकि, चुनाव की तारीख को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कांग्रेस और BJP के बीच नया सियासी मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में पंचायत चुनाव के साथ-साथ आरक्षण और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा भी और गरमा सकता है।
