प्रदूषण से एनसीआर को बचाने की तैयारी, जींद में नहीं जलेगी पराली

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प्रतीक चित्र

जींद. फसलों के अवशेष और धान की पराली के जलाने से पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. इसकी जानकारी जन-जन तक पहुंचाने के लिए कृषि विभाग की तरफ से एक विस्तृत कार्य योजना तैयार की है. योजना के तहत जिला के प्रत्येक गांव में जागरूकता शिविर (Awareness camp) आयोजित किए जाएंगे. इसके साथ-साथ जिला के 52 ऐसे गांवों जिनमें धान अधिक बोया जाता है, उन पर पूरा फोकस रहेगा ताकि कोई भी किसान धान की पराली नहीं जलाएं. यह जानकारी डीसी अमित खत्री ने सोमवार को लघु सचिवालय सभागार में कृषि विभाग द्वारा बुलाई गई बैठक की अध्यक्षता करते हुए दी.

52 गांवों जिनमें धान ज्यादा फोकस

डीसी अमित खत्री ने बताया कि जिला के 52 ऐसे गांवों है जिनमें धान की पैदावार अपेक्षाकृत अधिक होती है. इनमें जींद खंड के आठ, जुलाना के आठ, अलेवा के छह, नरवाना के बारह, उचाना के पांच, सफीदों के पांच तथा पिल्लूखेड़ा के बारह गांव हैं, इनमें किसानों को धान की पराली जलाने से होने वाले नुक्सान के बारे जागरूक किया जाएगा. पंचायत विभाग, राजस्व विभाग, कृषि विभाग, पशुपालन विभाग की तरफ से संयुक्त रूप से जागरूकता अभियान चलाया जाएगा.

बनेंगी निगरानी कमेटी

इस अभियान को गति प्रदान करने के लिए खंड और उपमंडल स्तर पर कमेटियों का गठन किया जाएगा. संबंधित एसडीएम कमेटी के नोडल अधिकारी होंगे. इनमें गांव के ऐसे किसान जो अपेक्षाकृत ज्यादा धान की फसल पैदा करता है, उन्हें इस कमेटी में शामिल किया जाएगा. इसके साथ-साथ गांव के प्रभावशाली व्यक्तियों को भी कमेटी का सदस्य बनाया जाएगा.

जींद. फसलों के अवशेष और धान की पराली के जलाने... Panchayat Times

स्थापित किए जाएंगे डैमो प्रदर्शन प्लांट

जिला की 1560 एकड़ जमीन में डेमो प्लांट स्थापित किए जाएंगे. प्रत्येक गांव में 5 एकड़ जमीन पर यह डेमो प्लांट बनाए जाएंगे. इन डेमों प्लांटों में धान की पराली और फसल के अवशेषों को बारीक करके जमीन में मिलाने की प्रक्रिया को लोग को दिखाया जाएगा ताकि किसान डेमो प्लांट से सीख लेकर धान की पराली को अपने खेत में ही बारीक करके मिट्टी में मिला सके और वह खाद का काम करेंगी. डीसी ने कृषि विभाग के अधिकारियों को सलाह दी कि वह कृषि विज्ञान केंद्र पांडु-पिंडारा और जयंती देवी मंदिर के पास सरकारी बाग नर्सरी में डैमो प्लांट विकसित कर सकते हैं. किसानों को दिया जाएगा प्रशिक्षण. उप कृषि निदेशक डॉ. सुरेंद्र मलिक ने बैठक का एजेण्डा रखते हुए बताया कि 16 से 30 नवम्बर तक जिला के 962 किसानों को हमेटी में प्रशिक्षण दिलवाया जाएगा ताकि किसान पर्यावरण प्रदूषण से बचने की सीख ले सकें.

फसल कटाई में प्रयुक्त होने वाली मशीनों के प्रयोग करने वालों की बुलाएं बैठक

डीसी ने कृषि विभाग के अधिकारियों को कहा कि वह ऐसे कृषि उपकरण और मशीन बेचने वाले लोगों की पहचान कर लें और उन्हें अपनी मशीन पर निर्धारित उपकरण लगाने के लिए प्रेरित करे. इस अभियान की जानकारी प्रत्येक ग्रामीण तक पहुंचाने के लिए कृषि विभाग द्वारा एक पब्लिसिटी वैन चलाई जाएगी. जो गांवों-गांवों में जाकर पराली जलाने से होने वाले नुक्सान की जानकारी लोगों को देगी. प्रचार-प्रसार के लिए स्कूली बच्चों की जागरूकता रैलियां निकाली जाएंगी. इसके साथ-साथ स्कूलों में फसल के अवशेष जलाने व धान की पराली जलाने से होने वाली हानियां विषय पर लेख, निबंध, कविता पाठ करवाया जायेगा. इसके अलावा ग्राम सचिवालय व अन्य सार्वजनिक जगहों पर वॉल पेटिंग करवाई जाएंगी.
होगा जिला स्तरीय कार्यक्रम

अभियान की जागरूकता के लिए 24 अगस्त को जींद की अनाज मण्डी में जिला स्तरीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. जिसमें अति संवेदनशील गांवों (अधिक धान पैदा करने वाले गांवों के किसानों को) के लोगों को बुलाया जाएगा. मौजिज लोगों को भी कार्यक्रम में बुलाया जायेगा.

जिला में स्थापित किए गए हैं कॉमन हार्वेटिंग सैंटर

जिला में हार्वेटिंग सैंटर स्थापित किए गए हैं, जिनमें से कोई भी किसान धान की पराली और अवशेषों के प्रबंधन के लिए कृषि उपकरण किराये पर ले सकता है. इसके अलावा 383 व्यक्तिगत किसानों को भी यह उपकरण 80 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध करवाने की योजना है. बैठक में नगराधीश सत्यवान सिंह मान, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी राजेश कोथ, कृषि विभाग व बैंक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया .