राज्यसभा में भी पास हुए तीन लेबर बिल, विपक्ष ने कहा ‘मजदूर’ की परिभाषा को सीमित कर रहा है ये बिल, जानिए इनके लागू होने के बाद क्या कुछ बदलेगा

राज्यसभा में भी पास हुए तीन लेबर बिल, विपक्ष ने कहा ‘मजदूर’ की परिभाषा को सीमित कर रहा है ये बिल, जानिए इनके लागू होने के बाद क्या कुछ बदलेगा - Panchayat Times
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नई दिल्ली. राज्यसभा में बुधवार को तीन लेबर कोड बिलों (Labour Code Bills) को पारित कर दिया गया है. इन तीनों बिल को कल लोकसभा में पारित किया गया था. आज यह बिल राज्यसभा से भी पारित हो गए. सरकार का दावा है कि यह बिल श्रम क्षेत्र में बड़े सुधार लाएंगे. इनमें ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन बिल- 2020, इंडस्ट्रियल रिलेशन बिल- 2020 और सोशल सिक्योरिटी बिल- 2020 शामिल हैं.

वहीं विपक्ष इस बात को लेकर विरोध में है कि ये बिल ‘मजदूर’ की परिभाषा को सीमित कर रहे हैं. इसमें प्लेटफॉर्म श्रमिक, ट्रेनी, आईटी श्रमिक, स्टार्टअप्स, असंगठित और अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों को तमाम फायदों के दायरे से बाहर छो़ड़ दिया जा रहा है.

इन तीन बिल को पेश करते हुए श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने कहा–

“इन सभी विधेयकों को इससे पहले 2019 में भी लोकसभा में पेश किया गया था. इसके बाद इन्हें संसद की स्थायी समिति के पास जांच के लिए भेजा गया. सभी हितधारकों के साथ चर्चा के बाद स्थायी समिति ने एक रिपोर्ट दी. श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने इन सभी 233 सिफारिशों का अध्ययन किया और 74 फीसदी सिफारिशों को सरकार ने स्वीकार किया है.”

इंडस्ट्रियल रिलेशन बिल- 2020

इस विधेयक के पास होने के बाद कंपनी का अधिकार ओर बढ़ा है. अब जिन कंपनियों में कर्मचारियों की संख्या 300 से कम है, वे सरकार से मंजूरी लिए बिना ही कर्मचारी को नौकरी से निकाल सकेंगी. अब तक ऐसा वे कंपनियां कर सकती थीं, जिनमें 100 से कम कर्मचारी हों. लेकिन अब नए बिल में इस सीमा को बढ़ाया गया है.

छंटनी की इजाजत उन्हीं को दी जाएगी, जिनके कर्मचारियों की संख्या पिछले 12 महीने में हर रोज औसतन 300 से कम ही रही हो. सरकार अधिसूचना जारी कर इस न्यूनतम संख्या को बढ़ा भी सकती है. नए कानून के अनुसार कोई भी कंपनी, फैक्ट्री में काम करने वाले कर्मचारियों को सजा देने, निकालने, प्रमोशन में पक्षपात जैसे नियम पूरी तरह से कंपनी के हाथों में आ जाएगें.

सोशल सिक्योरिटी बिल- 2020

सोशल सिक्योरिटी कोड एक राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड के निर्माण का प्रस्ताव करती है जो असंगठित श्रमिकों, गि​ग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए उपयुक्त योजना तैयार करने की जिम्मेदारी लेगा. यह श्रमिकों के इन वर्गों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में भी लाता है जिसमें जीवन और विकलांगता बीमा, भविष्य निधि, स्वास्थ्य और मातृत्व लाभ और कौशल उन्नयन शामिल हैं. इस कोड में श्रमिकों के तीन वर्गों को सामाजिक सुरक्षा रकम प्रदान करने के लिए एक सामाजिक सुरक्षा कोष के गठन का भी प्रस्ताव है.

उदाहरण के लिए, मान लीजिए विकास किसी कंपनी में चार साल काम करके नौकरी छोड़ देता है. अब तक के नियम के मुताबिक, ग्रैच्युटी पाने के लिए विकास को उस कंपनी में कम से कम पांच साल की नौकरी करनी होती. लेकिन नए बिल के मुताबिक, कोई शख्स किसी कंपनी में सिर्फ तीन साल काम करके ही ग्रैच्युटी पाने का हकदार बन जाएगा.

ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन बिल- 2020

ये बिल कंपनियों को छूट देगा कि वे अधिकतर लोगों को कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर नौकरी दे सकें. साथ ही कॉन्ट्रैक्ट को कितनी भी बार और कितने भी समय के लिए बढ़ाया जा सकेगा. इसके लिए कोई सीमा तय नहीं की गई है. वो प्रावधान भी अब हटा दिया गया है, जिसके तहत किसी भी मौजूदा कर्मचारी को कॉन्ट्रैक्ट वर्कर में तब्दील करने पर रोक थी.

महिलाओं के लिए वर्किंग आवर (काम के घंटे) सुबह 6 बजे से लेकर शाम 7 बजे के बीच ही रहेगा. शाम 7 बजे शाम के बाद अगर काम कराया जा रहा है, तो सुरक्षा की जिम्मेदारी कंपनी की होगी.

कोई भी कर्मचारी एक हफ्ते में छह दिन से ज्यादा काम नहीं कर सकता. ओवरटाइम कराने पर उस दिन का दोगुना पैसा. बिना अपॉइंटमेंट लेटर के किसी की भर्ती नहीं.

विपक्ष ने किया विरोध

कांग्रेस के मनीष तिवारी और शशि थरूर ने इस बिल का विरोध किया. मनीष तिवारी ने कहा कि ये बिल कर्मचारियों के अधिकारों पर हमला है. मंत्री को तुरंत ये बिल वापस लेना चाहिए और इस पर व्यापक बहस होना चाहिए.

शशि थरूर ने कहा कि ये तीनों बिल कर्मचारियों के हड़ताल करने के अधिकार को खत्म करते हैं. साथ ही राज्य को, केंद्र को ये अधिकार देते हैं कि कभी भी, किसी भी कर्मचारी को निकाला जा सके.