आईटी मामलों की संसदीय समिति पेगासस के जरिये कथित रूप से हुई जासूसी से जुड़े मामले पर गृह मंत्रालय समेत कई विभागों के अधिकारियों से 28 जूलाई को करेगी पूछताछ

आईटी मामलों की संसदीय समिति पेगासस के जरिये कथित रूप से हुई जासूसी से जुड़े मामले पर गृह मंत्रालय समेत कई विभागों के अधिकारियों से 28 जूलाई को करेगी पूछताछ - Panchayat Times
Shashi Tharoor chairman of the Standing Committee on IT

नई दिल्ली. कांग्रेस के नेता और तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली आईटी मामलों की संसदीय समिति पेगासस साफ्टवेयर के जरिये कथित रूप से हुई जासूसी से जुड़े मामले पर गृह मंत्रालय समेत कई विभागों के सरकारी अधिकारियों से 28 जूलाई को पूछताछ करेगी.

पेगासस मामला एक गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंता

बता दें कि इस मामले पर शशि थरूर ने 19 जूलाई को ट्वीट कर कहा था कि पेगासस मामला एक गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंता है और सरकार को इस पर अपना स्पष्टीकरण देना चाहिए. थरूर ने कहा, यह साफ हो चुका है कि भारत में फोन की जांच दरअसल पेगासस की घुसपैठ थी.

उन्होंने कहा था कि यह उत्पाद केवल सरकारों को ही बेची जाती है, तो सवाल उठता है कि किस सरकार को बेचा गया. यदि भारत सरकार कहती है कि उसने नहीं किया, तो किसी और सरकार ने किया. तब तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा का और भी गंभीर मामला है.

क्या है पूरा मामला

17 से अधिक मीडिया संस्थानों के अंतरराष्ट्रीय संगठन ने खुलासा किया है कि केवल सरकारी एजेंसियों को ही बेचे जाने वाले इजराइल के जासूसी साफ्टवेयर पेगासस के जरिए भारत के दो केन्द्रीय मंत्रियों, 40 से अधिक पत्रकारों, विपक्ष के तीन नेताओं और एक न्यायाधीश सहित बड़ी संख्या में कारोबारियों और अधिकार कार्यकर्ताओं के 300 से अधिक मोबाइल नंबर, हो सकता है कि हैक किए गए हों.

राहुल गांधी का भी नाम

19 जूलाई को जारी रिपोर्टस के अनुसार कांग्रेस नेता राहुल गांधी, चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर और दो मंत्रियों को भी इस स्पाइवेयर के जरिये निशाना बनाया गया है.

मंत्रियो के भी नाम

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इन नंबरों को 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले 2018-2019 के बीच निशाना बनाया गया था. इस लिस्ट में सबसे चौंकाने वाला नाम केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का है, जिन्हें पीएम मोदी ने हाल ही अपने कैबिनेट में शामिल किया है. उन्होंने आईटी मंत्री के रूप में रविशंकर प्रसाद की जगह ली. इनको जब 2018-19 में निशाना बनाया गया, तब ये सांसद थे.