नई दिल्ली. गुरुवार को भारत ने Vibhajan Vibhishika Smriti Diwas 2025 मनाया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री Narendra Modi ने 1947 में हुए India Partition के दौरान लाखों लोगों द्वारा झेली गई उथल-पुथल, विस्थापन और पीड़ा को याद किया। प्रधानमंत्री ने इसे इतिहास का एक दुखद अध्याय बताया और कहा कि उस समय अनगिनत लोगों को अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा,
“Vibhajan Vibhishika Smriti Diwas हमें हमारे इतिहास के उस दुखद अध्याय की याद दिलाता है, जिसमें अनगिनत लोगों ने unimaginable suffering और displacement झेली। यह दिन उनके courage, resilience और नए जीवन की शुरुआत की शक्ति का सम्मान करता है।”
प्रधानमंत्री ने देशवासियों से सद्भाव, national unity और social harmony को मजबूत करने का आह्वान भी किया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी किया श्रद्धांजलि अर्पित
केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने कहा कि देश के विभाजन और विस्थापन से पीड़ित लोगों की पीड़ा को हम कभी नहीं भूलेंगे। उन्होंने लिखा,
“Vibhajan Vibhishika Smriti Diwas हमें याद दिलाता है कि विभाजन के दौरान हिंसा, शोषण और विस्थापन ने लाखों जीवन को प्रभावित किया। मैं उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ जिन्होंने अपनी जान गंवाई।”
भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा का संदेश
J.P. Nadda ने इस अवसर पर national unity और anti-national forces के खिलाफ एकजुट रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा,
“इस दिन हमें याद है कि 1947 में लाखों लोगों ने अपनी जान, घर और संपत्ति खोई। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, विभाजन की स्मृति को जीवित रखना राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण कदम है।”
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस की पृष्ठभूमि
भारत में 14 अगस्त को 1947 में हुए Partition of India के दौरान विस्थापित हुए और अपनी जान गंवाने वाले लाखों लोगों के संघर्ष और बलिदान की स्मृति में Vibhajan Vibhishika Smriti Diwas मनाया जाता है।
ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के बाद पाकिस्तान अलग मुस्लिम देश के रूप में बना।
इस दौरान लगभग 2 करोड़ लोग प्रभावित हुए और हजारों परिवारों को अपने पैतृक गाँव और शहर छोड़ने पड़े।
विभाजन के समय हुई सांप्रदायिक हिंसा में लाखों लोगों ने अपनी जान गंवाई।
प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय नेता इस दिन national unity, social harmony और tolerance का संदेश देते हैं, ताकि देशवासी अपने इतिहास से सीख लें और देश के निर्माण में योगदान करें।
