किसानों के लिए फसल बीमा स्वैच्छिक, अब जो किसान बैंक में जाकर बीमा कराने का विकल्प देगा उसी का काटा जाएगा प्रीमियम, जानिए क्या है ये योजना

किसानों के लिए फसल बीमा स्वैच्छिक, अब जो किसान बैंक में जाकर बीमा कराने का विकल्प देगा उसी का काटा जाएगा प्रीमियम, जानिए क्या है ये योजना - Panchayat Times
Wheat Crops Photo :- Panchayat Times

नई दिल्ली. प्राकृतिक आपदा और रोग की वजह से फसल में होने वाले नुकसान से किसानों को राहत दिलाने के लिए संचालित प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को सरकार ने अब स्वैच्छिक कर दिया है. इस वर्ष से किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना स्वैच्छिक कर दी गई है. अब गैर ऋणी एवं ऋणी दोनों प्रकार के किसानों को ही फसल बीमा के लिए बैंक में आवेदन करना होगा.

जो किसान बैंक में जाकर फसल बीमा कराने का विकल्प देगा उसकी का बीमा प्रीमियम काटा जाएगा

जो किसान बैंक में जाकर फसल बीमा कराने का विकल्प देगा उसकी का बीमा प्रीमियम काटा जाएगा. उसे ही फसल बीमा का लाभ भी मिल सकेगा. इस बीमा योजना में अब पूर्व की भांति सभी केसीसी धारकों का अपने आप से फसल बीमा नहीं होगा और न ही उसका प्रीमियम काटा जाएगा. इस वर्ष खरीफ के लिए किसान द्वारा फसल बीमा का प्रीमियम बैंक में जमा करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई सुनिश्चित की गई है.

फिलहाल जिन किसानों ने किसान क्रेडिट कार्ड या दूसरे माध्यमों से कृषि कर्ज ले रखा है, उन्हें फसल बीमा लेना अनिवार्य था. सरकार का कहना कुछ किसान संगठनों और राज्य सरकारों ने इस कार्यक्रम को लागू किए के विशेषय में कुछ चिंताएं जताई थी. उसके मद्देनजर यह निर्णय किया गया था.

2016 में शुरू हुई थी योजना

इससे पहले केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई)’ तथा ‘पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना’ (आरडब्ल्यूबीसीआईएस)’ को नया रूप देने के प्रस्तावों को मंजूरी दी थी, ताकि फसल बीमा योजना को लागू करने में आ रही चुनौतियों का समाधान किया जा सके.” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फरवरी 2016 में शुरू की गई इस फसल बीमा योजना के तहत, ऋण लेने वाले किसानों के लिये यह बीमा पालिसी लेना अनिवार्य किया गया था.

प्राकृतिक आपदा से मिलती है किसानों को आर्थिक सुरक्षा

पीएमएफबीवाई में ऐसे प्राकृतिक जोखिमों से किसान की खेती को हुए नुकसान के लिए बीमा सहायता दी जाती है जिन्हें टाला नहीं जा सकता. इसमें फसल बुवाई से पहले और कटाई के बाद तक के लिए व्यापक फसल बीमा सुरक्षा प्रदान की जाती है. इसमें खरीफ फसलों के लिए 2 फीसदी, रबी फसलों के बीमा संरक्षण के लिए 1.5 फीसदी और बागवानी एवं वाणिज्यिक फसलों के लिए 5 फीसदी की दर से बीमा प्रीमियम रखा गया है.

कृषि लोन ले चुके किसानों को फिलहाल बीमा लेना था अनिवार्य

मंत्रिमंडल फरवरी 2016 में चालू पीएमएफबीवाई और आरडब्ल्यूबीसीआईएस योजनाओं के कुछ मापदंडों एवं प्रावधानों के संशोधन को मंजूरी दी थी. उस समय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने यहां संवाददाताओं से कहा था कि, ”यह योजना सभी किसानों (दोनों पीएमएफबीवाई/आरडब्ल्यूबीसीआईएस) के लिए स्वैच्छिक बना दी गयी है.” उन्होंने कहा कि इस समय देश के करीब 58 फीसदी किसानों ने फसल कर्ज ले रखा है. बाकी 42 फीसदी ने कर्जदार नहीं लिए हैं.

फसल बीमा लेने वाले किसानों की संख्या में आएगी गिरावट

इस फैसले के बाद इन योजनाओं का लाभ लेने वाले किसानों की संख्या में तत्काल गिरावट देखने को मिल सकती है लेकिन अंतत: स्कीम को चुनने वाले किसान बढ़ेगे. मंत्री ने उस समय कहा था कि सरकार फसल बीमा पॉलिसी की जरूरत के बारे में किसानों को जागरूक करने का अभियान शुरू करेगी.

इन संशोधनों से किसान संगठनों और राज्यों द्वारा पीएमएफबीवाई योजना के बारे में उठाई गई चिंताओं को दूर करने में मदद मिलेगी. योजना में बाकी सुधार के बारे में तोमर ने कहा कि बीमा कंपनियों को व्यवसाय का आवंटन निविदा प्रक्रिया के तहत होगा जो तीन वर्षो के लिए होगा जो अभी एक से तीन वर्ष की अवधि के लिए है.

केन्द्र और राज्यों की बराबर भागीदारी

पीएमएफबीवाई/आरडब्ल्यूबीसीआईएस दोनों स्कीम में प्रीमियम सब्सिडी में में केन्द्रीय हिस्सा पूर्वोत्तर राज्यों के लिए वर्तमान 50:50 की साझा व्यवस्था से बढ़ाकर 90 फीसदी किया जाएगा.” मंत्रिमंडल के फरवरी 2020 के निर्णय के अनुसार इस योजना के अनुपालन के लिए प्रशासनिक खर्चों का प्रावधान कुल आवंटन के 3 फीसदी के बराबर होगा. इसकी व्यवस्था केंद्र सरकार तथा योजना लागू करने वाली राज्य सरकार द्वारा मिल कर किया जाएगा.

पीएमएफबीवाई/आरडब्ल्यूबीसीआईएस के अंतर्गत केन्द्रीय सब्सिडी की दर असिंचित क्षेत्रों/फसलों के लिए प्रीमियम की दर के 30 फीसदी तक सीमित होगी. इसी तरह सिंचित क्षेत्रों/फसलों के लिए यह सब्सिडी 25 फीसदी तक सीमित रखी गयी है. 50 फीसदी या उससे अधिक सिंचित क्षेत्र वाले जिलों को सिंचित क्षेत्र/जिला माना जाता है.

माध्यमPT DESK
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