पीएम-किसान सम्मान निधि योजना का एक साल पूरा, लेकिन अब भी कई बड़ी चुनौतियां

पीएम-किसान सम्मान निधि योजना का एक साल पूरा, लेकिन अब भी कई बड़ी चुनौतियां - Panchayat Times

नई दिल्ली. केंद्र सरकार की महत्त्वाकांक्षी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना ने अपना एक वर्ष का सफर पूरा कर लिया है. इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने पीएम-किसान मोबाइल एप (PM-KISAN App) लान्च किया है. इस एप का उद्देश्य योजना की पहुंच को और अधिक व्यापक बनाना है.  इस एप के माध्यम से किसान अपने भुगतान की स्थिति जान सकते हैं, साथ ही योजना से संबंधित अन्य मापदंडों के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

पीएम-किसान योजना की क्या है वर्तमान स्थिति

मौजूदा वित्तीय वर्ष 2019-20 के केंद्रीय बजट में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लिये 75,000 करोड़ रुपए की राशि प्रदान की गई है, जिसमें से 50,850 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जारी की जा चुकी है. कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अब तक 8.45 करोड़ से अधिक किसान परिवारों को इस योजना का लाभ पहुंचाया जा चुका है, जबकि इस योजना के तहत कवर किये जाने वाले लाभार्थियों की कुल संख्या 14 करोड़ है. 

पीएम-किसान मोबाइल एप (PM-KISAN App)

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने हाल ही में दिल्ली में योजना के एक वर्ष पूरा होने पर घोषणा की है कि पीएम-किसान योजना के सभी लाभार्थियों को किसान क्रेडिट कार्ड (Kisan Credit Card-KCC) प्रदान किया जाएगा, ताकि वे आसानी से बैंक से कर्ज प्राप्त कर सकें.  मंत्री ने कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड के लिए एक व्‍यापक वितरण अभियान 29 फरवरी को आयोजित किया जाएगा, जिस दौरान देश भर में फैली 20 हजार बैंक शाखाओं में किसानों को केसीसी जारी किए जाएंगे.

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है. जिसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 24 फरवरी, 2019 को लघु एवं सीमांत किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी. इस योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को प्रतिवर्ष 6,000 रुपए की दर से प्रत्यक्ष आय सहायता उपलब्ध कराई जाती है. यह आय सहायता 2,000 रुपए की तीन समान किस्तों में लाभान्वित किसानों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष रूप से हस्तांतरित की जाती है, ताकि संपूर्ण प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके. 

शुरूआत में यह योजना केवल लघु एवं सीमांत किसानों (2 हेक्टेयर से कम जोत वाले) के लिये ही शुरू की गई थी, किंतु 31 मई, 2019 को कैबिनेट द्वारा लिये गए निर्णय के बाद यह योजना देश भर के सभी किसानों के लिए लागू कर दी गई. इस योजना का वित्तपोषण केंद्र सरकार द्वारा किया जा रहा है. इस योजना पर अनुमानतः 75 हजार करोड़ रुपए का वार्षिक व्यय आएगा.

योजना का उद्देश्य

इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य देश के लघु एवं सीमांत किसानों को प्रत्यक्ष आय संबंधी सहायता प्रदान करना है. यह योजना लघु एवं सीमांत किसानों को उनकी निवेश एवं अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिये आय का एक निश्चित माध्यम प्रदान करती है. योजना के माध्यम से लघु एवं सीमांत किसानों को साहूकारों और अनौपचारिक ऋणदाताओं के चंगुल से बचाने का प्रयास किया जा रहा है. 

क्या है बड़ी चुनौतियां

ज्ञात हो कि पश्चिम बंगाल अब तक इस योजना में शामिल नहीं हुआ है. आधिकारिक सूचना के अनुसार, पश्चिम बंगाल सरकार ने किसानों के डेटा को सत्यापित (Verified) नहीं किया है. अनुमानित आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में लगभग 70 लाख लोग योजना के लिये पात्र हैं. 

पश्चिम बंगाल के कुल पात्र किसानों में से लगभग 10 लाख किसानों ने व्यक्तिगत रूप से ऑनलाइन आवेदन किया है, किंतु किसानों के संपूर्ण डेटाबेस का राज्य सरकार द्वारा सत्यापित किया जाना अभी शेष है. बिहार में लाभार्थियों की संख्या 158 लाख है, जबकि केवल 59.7 लाख किसानों का डेटा ही अपलोड किया गया है. राज्य ने लाभार्थी आवेदन के लिये अलग पद्धति अपनाई है जिसके कारण पहचान और डेटा अपलोड करने में देरी हो रही है.

राशि काफी कम, मगर योजना का उद्देश्य किसानों की उनकी निवेश संबंधी जरूरतों को पूरा करना

देश में किसानों की मौजूदा स्थिति को देखते हुए इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता की यह योजना किसानों को एक आर्थिक आधार प्रदान करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती है. हालांकि कई विशेषज्ञों का मानना है कि योजना के तहत दी जा रही सहायता राशि अपेक्षाकृत काफी कम है, लेकिन हमें यह समझना होगा कि इस योजना का उद्देश्य किसानों को उनकी निवेश संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिये एक आर्थिक आधार प्रदान करना है, ताकि वह फसल उत्पादन में नवीन तकनीक और गुणवत्तापूर्ण बीजों का प्रयोग कर उत्पादन में बढ़ोतरी कर सकें. आवश्यक है कि योजना के मार्ग में स्थित विभिन्न बाधाओं को समाप्त कर इसे अधिक-से-अधिक किसानों के लिये लाभदायी बनाया जा सके.