नई दिल्ली. G7 सम्मेलन का आयोजन कनाडा के कानानास्किस में हो रहा है, जिसमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump, फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron और इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni जैसे दिग्गज नेता भी शिरकत कर रहे हैं।
ट्रंप और मोदी एक मंच पर – बड़ा कूटनीतिक पल?
G7 शिखर सम्मेलन में PM Modi की मुलाकात Donald Trump से हो सकती है। हालांकि विदेश मंत्रालय ने अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है कि क्या दोनों नेताओं के बीच bilateral meeting होगी। अगर ऐसी मुलाकात होती है तो यह केवल India-US relations के लिहाज़ से ही नहीं, बल्कि India-Pakistan Ceasefire Talks के परिप्रेक्ष्य में भी महत्वपूर्ण मानी जाएगी। ट्रंप इससे पहले India-Pakistan ceasefire mediation का दावा कर चुके हैं।
ट्रंप के सीजफायर दावे और भारत की सख्त प्रतिक्रियाOperation Sindoor के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच Ceasefire कराया। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी यह घोषणा कर दी थी, जबकि भारत की तरफ से ऐसा कोई बयान पहले नहीं आया था।
भारत ने साफ किया कि किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता (third-party mediation) को स्वीकार नहीं किया जाएगा। भारत का कहना है कि पाकिस्तान की अपील के बाद ही सीमित संघर्ष विराम (limited ceasefire) को सहमति दी गई थी।
ट्रंप के और दावे – सीजफायर से लेकर Middle East तक
Donald Trump का कहना है कि जिस तरह उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर का दबाव बनाया, उसी तरह वह Israel और Iran के बीच भी शांति स्थापित कर सकते हैं। उनके मुताबिक, उन्होंने trade pressure के जरिए भारत और पाकिस्तान को शांति पर मजबूर किया। हालांकि भारत ने बार-बार कहा है कि terrorism और border conflict के मामलों में उसकी नीति स्पष्ट है—Zero Tolerance।
G7 में भारत क्या मुद्दा उठा सकता है?
इस बार के G7 सम्मेलन में पीएम मोदी दुनिया के सामने भारत का पक्ष मजबूती से रख सकते हैं। खासतौर पर: India’s stance on terrorism, Ceasefire violations और पाकिस्तान की भूमिका Global South की आवाज़ के रूप में भारत की भूमिका भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि अगर पाकिस्तान की ओर से कोई आतंकी हमला हुआ तो उसे युद्ध की शुरुआत माना जाएगा, और भारत उसका मुंहतोड़ जवाब देगा।
