शिमला. आधुनिकता से केवल लोगों का लाइफस्टाइल नहीं बदला. बल्कि आधुनिक विज्ञान व तकनीक खेती बाड़ी पर भी नई छाप छोड़ रही है. हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में जहां किसान के लिए अपने हर खेत-खलिहान की रखवाली आसान बात नहीं. जब बंदर, जंगली जानवरों को फसल तबाह करने से रोकने में किसी का जोर नहीं. ऐसी परिस्थिति में पॉलीहाउस खेती का नया विकल्प बनकर किसानों के सामने आए है.
पॉलीहाउस जिसमें किसान 12 महीने फसल लहलहा पा रहे है. बाहरी विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं व कीट पंतगों से तो इसमें फसल बच ही रही है, साथ ही सब्जी, फूल जो पॉलीहाउस में उगाए जाते है, उन्हें अनुकुल वातावरण, हवा, पानी मिल रहा है. नतीजतन बेमौसमी सब्जी भी किसान इसके जरिये उगा पा रहे है.
सब्जी के अतिरिक्त अधिकांश किसानों ने सब्जी उगाने की बजाय फूलों को अपना व्यवसाय चुन लिया है. खेती तो है मगर फूलों की. जिसमें पहले से अधिक गुणा अधिक पैदावार व मुनाफा मिल रहा है. हिमाचल के ऊंचाई वाले इलाके हो या फिर मध्यम पर्वतीय व मैदानी क्षेत्र सैकड़ों किसानों का रुझान पॉलीहाउस लगाने की ओर बढ़ा है.
बच्चों ने अपनाया खेती को
शिमला ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के धमून पंचायत की यदि बात करें तो यहां किसानों के युवा बच्चों ने भी खेती को अपनाया है. किसी दफ्तर में बैठकर काम करने व रोजगार की तलाश में भटकने की बजाय कई युवाओं ने पॉलीहाउस लगाकर खेती करना शुरू कर दिया है. जिससे सालाना कई गुणा मुनाफा मिल रहा है. कुल मिलाकर देखें तो सौ में से 25 प्रतिशत कृष्कों ने इस खेती को अपनाया है.
महाकाली फ्लावर एंड वेजिटेबल काॅपरेटिव प्राइवेट लिमिटेड के नाम से सोसायटी इस क्षेत्र में काम कर रही है. इस सोसायटी के सदस्य गोपाल ठाकुर का कहना है कि आज कल खेतों में शिमला मिर्च नहीं उगती, लेकिन पाॅलीहाउस में इन दिनों भी शिमला मिर्च, टमाटर, पालक आदि देखें जा सकते है. जबकि सर्दी में खेतों में इन्हें कोहरा खराब कर देता है. मगर पाॅलीहाउस फसल के लिए घर की तरह है, जहां इनका ख्याल ओर भी बेहतर तरीके से रखा जा सकता है. कृषि व बागवानी विभाग इसके लिए किसानों को आर्थिक मदद भी देता है. सोसायटी नए लोगों को इसके बारे में बताती है. जिसके बाद कई युवा इस व्यवसाय से जुड़े है. यदि फूलों की बात करें तो कार्नेषन, लिलियम के फूल लगाने में भी किसानों का रूझान बढ़ा है. जिसकी सप्लाई सीधे दिल्ली जैसे बड़े शहरों में पहुंचती है. अच्छे दाम जिसके बदले मिल रहे है. हां यह जरूर है कि कई किसानों ने सब्जी उगाने से मुंह मोड़कर केवल फूलों की खेती पर ही ध्यान केंद्रित कर दिया है.

85 प्रतिशत सब्सिडी
पाॅलीहाउस लगाने के लिए किसानों को 85 प्रतिशत सब्सिडी मिलती है. जिसमें भी 35 प्रतिशत राज्य व 50 प्रतिशत केंद्र सरकार अनुदान देती है और 15 प्रतिशत किसान को खर्च करने है. मगर एक किसान 2000 सेक्वेयर तक ही सब्सिडी के तहत पॉलीहाउस लगा सकता है. इससे अधिक सक्वेयर मीटर पर यदि किसान पॉलीहाउस लगाना चाहे तो फिर अपने खर्चे पर लगा सकते है.
एग्रीकल्चर डवेल्पमेंट ऑफिसर पवन सैणी
पवन सैणी का कहना है कि पॉलीहाउस के साइज 40 से 1000 स्क्वायर मीटर के होते है. जिनमें 40, 100, 125,250,500,544 व 1000 स्क्वायर मीटर के विभिन्न आकार के पॉलीहाउस लगाए जा सकते है. किसी भी मौसम अच्छा या बुरा इसमें सब्जी व फूल उगाए जा सकते है. किसान इस योजना का लाभ उठाने के लिए एक एप्लीकेशन के साथ ततीमा व जमाबंदी लगाकर कृषि विभाग को दे सकता है. जिसके बाद विभाग किसान को सात दिन का प्रषिक्षण देता है और इस तरह पाॅलीहाउस लगाने की स्वीकृति मिलती है.

500 सेक्वेयर मीटर में ढाई लाख नेट इनकम
कई सालों से पॉलीहाउस में सब्जी व फूल उगा रहे धमून पंचायत के कलीमू गांव के किसान गोपाल ठाकुर का कहना है कि 500 सक्वेयर की यदि बात करें तो इतने पॉलीहाउस में नेट इनकम ढाई लाख रुपये सालाना हो जाती है. जबकि पहले खेतों में तय नहीं था कि कुछ कमाई भी होगी या नहीं. फसल खराब होने का भी डर नहीं रहता.