पौंग बांध विस्थापितों के हक लिए लड़ी जाएगी लड़ाई : जय राम ठाकुर

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फाइल फोटो :जय राम ठाकुर

शिमला. मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने कहा कि पौंग बांध निर्माण को लेकर भू-अधिग्रहण का कार्य 1961 में शुरू हुआ था, और 1971 में पूरा हुआ था. वर्ष 1972 में 75 हजार 261 एकड़ भूमि पर 226 गांव पूरी तरह से और 113 गांव आंशिक रुप से प्रभावित हुए थे. पौंग बांध निर्माण से 20 हजार 722 परिवार प्रभावित हुए थे.

इस दौरान कई  परिवारों को राजस्थान में भूमि प्राप्त करने के लिए पात्रता प्रमाण पत्र जारी किए गए, जबकि हज़ारों परिवारों को पात्र ही नहीं माना गया. उन्होंने कहा कि 1188 मुरब्बे आंबटित नहीं हो पाए हैं, जबकि 2180 मुरब्बे अब भी लंबित हैं. मुख्यमंत्री ने यह जानकारी तपोवन में शीत सत्र के तीसरे दिन देहरा से विधायक होशियार सिंह की ओर से नियम 130 के तहत लाए गए प्रस्ताव के जबाव में दी.

उहोंने कहा कि राजस्थान सरकार के समक्ष मामला जोर-शोर से उठाया जाएगा. हाईकोर्ट की कॅमेटी जिसमें हिमाचल और राजस्थान के उच्च अधिकारी शामिल हैं की पिछले 24 वर्षों से लंबित बैठक भी जल्द ही करवाई जाएगी. इसके साथ ही राजस्थान से हिमाचल के हक प्राप्त करने के लिए कानूनी लड़ाई भी लड़ी जाएगी. इससे पूर्व विधायक होशियार सिंह ने कहा कि पौंग विस्थापित 1965 से दयनीय स्थिति से गुजर रहे हैं.

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पुनर्वास की सही प्रकार से व्यवस्था किए बिना ही 1972 में अढ़ाई लाख के करीब लोगों को उठाकर राजस्थान में भेज दिया गया. तब से लेकर अपने हकों के लिए विस्थापित परिवार बीकानेर, जैसलमेर, शिमला में कानूनी, सरकार और अधिकारियों से लड़ाई लड़ रहे हैं.

होशियार सिंह ने कहा कि गलत कानून बनाकर नियम छह-ए के तहत 90 प्रतिशत मुरब्बों को रद्द कर दिया गया है. विस्थापितों को 1188 मुरब्बे ही अब तक अलोट हो पाए हैं, रिफ्यूजी बन चुके लोगों में से राजस्थान में अब तक 50 के करीब हत्याएं हो चुकी हैं.

उन्होंने कहा कि सरकार को 1410 फुट पानी के स्तर को नीचे उतारकर एक हज़ार फुट पहुंचाकर 60 हज़ार लोगों को बसाने की व्यवस्था करनी चाहिए. इस दौरान निर्वासित तिब्बती सरकार के कार्यक्रम चलते प्रस्ताव पर सदन में अन्य सदस्यों की चर्चा नहीं हो पाई. जिसे लेकर विधायक राकेश पठानिया ने भी नाराजगी जताई.