अराकू घाटी में विकसित कॉफी के लिए प्रीमियम टैग

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नई दिल्ली. कॉफी बोर्ड ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्‍तनम जिले में स्थित अराकू घाटी के जनजातीय समुदायों की ओर से विकसित की जाने वाली कॉफी की विशिष्‍ट पहचान के संरक्षण के लिए भौगोलिक संकेतों यानि जीआई टैग के लिए के पंजीकरण के लिए आवेदन किया है. इसकी जानकारी वाणिज्‍य एवं उद्योग राज्‍य मंत्री सी.आर. चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित प्रश्‍न के उत्‍तर में दी.

अराकू घाटी भारत में आंध्र प्रदेश राज्य के विशाखापट्टनम जिले में एक पर्वतीय स्थान है. यह घाटी पूर्वी घाट पर स्थित है और कई जनजातियों का निवास स्थान है. अराकू घाटी दक्षिण भारत में सबसे कम प्रदूषित क्षेत्रों में से एक है तथा वाणिज्यिक रूप से कम उपयोग किया हुआ पर्यटक स्थल है. यहां के प्राकृतिक सौंदर्य ने टॉलीवुड की कई फिल्मों जैसे हैपी डेज कथा में अपनी जगह बनाया है.

अराकू घाटी अपने कॉफी पौधरोपण के लिए प्रसिद्ध है. आदिवासियों की ओर से उत्पादित भारत का पहला जैविक कॉफी ब्रांड सन २००७ में जारी किया गया था. केन्‍द्र सरकार कॉफी बोर्ड के जरिए ‘एकीकृत कॉफी विकास परियोजना’ क्रियान्वित कर अराकू घाटी में कॉफी उत्‍पादन को बढ़ावा दे रही है.

इस योजना में पुनर्रोपण एवं विस्तार, जल संचयन एवं सिंचाई बुनियादी ढांचे का निर्माण और कॉफी एस्टेट के परिचालन के मशीनीकरण के लिए वित्‍तीय सहायता प्रदान करना शामिल है. इसके अलावा क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के आयोजन और संबंधित क्षेत्रों में प्रदर्शन के लिए तकनीकी सहायता भी दी जाती है. एसएचजी और उत्‍पादक समूहों के लिए प्रति किलोग्राम 10 रुपये का प्रोत्‍साहन देकर कॉफी बोर्ड अराकू कॉफी के सामूहिक विपणन को सुविधाजनक बना रहा है.

अराकू घाटी क्षेत्र में उत्‍पादित होने वाली अराबिका कॉफी एक उत्‍तम गुणवत्‍ता वाली विशेष कॉफी के रूप में अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर लोकप्रिय हो गई है. कॉफी बोर्ड ने देश में उत्‍पादित होने वाली विभिन्‍न कॉफी किस्‍मों के लिए उनकी भौगेलिक विशिष्‍टता के आधार पर विशेष लोगो विकसित किए हैं.

कॉफी बोर्ड हर साल आयोजित की जाने वाली ‘फ्लेवर ऑफ इंडिया-द फाइन कप अवार्ड’ प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए कॉफी उत्‍पादकों को प्रोत्‍साहित करता है. इस प्रतियोगिता का आयोजन कॉफी बोर्ड द्वारा किया जाता है.

क्या होता है जीआई टैग:

विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के सदस्य देश होने के नाते भारत ने जियोग्राफिकल इंडिकेशन ऑफ गुड्स (रजिस्ट्रेशन एंड प्रोटेक्शन) एक्ट 1999 को 15 सितंबर 2003 से लागू किया है. इसका मकसद मूल उत्पाद की गुणवत्ता और प्रतिष्ठा को बनाए रखना है, इसके चलते इन्हें वैश्विक बाजारों में भी बढ़त मिलती है. ”

जिस तरह बौद्धिक संपदा अधिकारों में कॉपीराइट, पेटेंट और ट्रेडमार्क को शामिल किया जाता है जो होल्डर्स या निर्माताओं के अधिकार सुरक्षित रखते हैं, उसी तरह जियोग्राफिकल इंडीकेशन टैग होता है जिसके तहत ये माना जाता है कि संबंधित उत्पाद उस जगह की ही पैदाइश है और उस खास भोगोलिख क्षेत्र में बनाई या उगाई जाती है.