राष्ट्रपति ने जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन की मंजूरी दी

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन को मंजूरी दे दी है

नई दिल्ली. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन को मंजूरी दे दी है. भाजपा ने बीते मंगलवार को पीडीपी से अपना रिश्ता तोड़ते हुए महबूबा मुफ्ती सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था. इसके बाद महबूबा मुफ्ती ने अपना इस्तीफा राज्यपाल एनएन वोहरा को सौंप दिया था. उनके पास अब सरकार चलाने के लिए बहुमत नहीं है.

राज्य में 1977 के बाद आठवीं बार और पिछले 10 सालों में चौथी बार राज्यपाल शासन लगाया गया है. राज्यपाल ने राज्य संविधान के अनुच्छेद 92 के तहत राष्ट्रपति से राज्य में राज्यपाल शासन लागू करने की सिफारिश की थी. जिसके बाद राष्ट्रपति ने इसके लिए अपनी मंजूरी दे दी है.

आठ मौकों पर कब-कब लगा राज्यपाल शासन

पहली बारः 26 मार्च 1977 से 9 जुलाई 1977 तक———–105 दिनों के लिए.

दूसरी बारः 6 मार्च 1986 से 7 नवंबर 1986 तक————246 दिनों के लिए.

तीसरी बारः 19 जनवरी 1990 से 9 अक्तूबर 1996 तक——-छह साल 264 दिनों के लिए.

चौथी बारः 18 अक्तूबर 2002 से 2 नवंबर 2002 तक———15 दिनों के लिए.

पांचवी बारः 11 जुलाई 2008 से 5 जनवरी 2009 तक——–178 दिनों के लिए.

छठी बारः 9 जनवरी 2015 से 1 मार्च 2015 तक————51 दिनों के लिए.

सातवीं बारः 8 जनवरी 2016 से 4 अप्रैल 2016 तक———-87 दिनों के लिए.

आठवीं बारः 19 जून 2018 से————————–अब तक.

‘शांति बहाल करना और विकास करवाना हमारा लक्ष्य’

जम्मू-कश्मीर में पिछले तीन साल से पीडीपी के साथ सरकार में शामिल बीजेपी ने मंगलवार को महबूबा मुफ्ती सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया. जम्मू-कश्मीर के भाजपा प्रभारी राम माधव ने नई दिल्ली के बीजेपी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस बात की जानकारी दी कि भाजपा और पीडीपी का गठबंधन टूट गया है. उन्होंने कहा कि “भाजपा जम्मू-कश्मीर में अपनी भागीदारी वापस ले रही है. जनता के जनादेश को ध्यान में रखकर गठबंधन किया गया था. पिछले 3 साल के कार्यकाल के दौरान राज्य में शांति बहाल करना और विकास करवाना हमारा लक्ष्य था. लेकिन राज्य में बढ़ते आतंकवाद और राज्य सरकार जिस तरह से अपना दायित्व ठीक से नहीं निभा पा रहे थे इसलिए हमने ये निर्णय लिया है कि हम जम्मू-कश्मीर की सरकार से अपने आप को अलग करते हैं.”

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‘4000 बंकर्स का निर्माण करवाया’

भाजपा नेता ने कहा कि “आज आतंकवाद बढ़ गया है. लोगों के मानवाधिकार खतरे में आ गए हैं. जिस प्रकार पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या हो जाती है ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को पूरी मदद की है. हर प्रकार के डेवलेपमेंट प्रोग्रेम को वहां चलाने के लिए फंड और सहयोग दिया गया. 4000 बंकर्स का निर्माण करवाया गया. राज्य सरकार का जो सुरक्षा का दायित्व था उसमें सही काम नहीं किया गया. जितने विकास काम हो सकते थे वो नहीं हो पाए. हम वर्तमान सरकार के रोल से संतुष्ट नहीं हैं इसलिए हम अलग हो रहे हैं.

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‘आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन’

राम माधव ने कहा कि “कश्मीर में जो स्थिति पैदा हो गई है और इसके साथ ही देश की सुरक्षा अखंडता की परवाह करते हुए हम राज्यपाल से अपील करते हैं कि राज्य में राज्यपाल का शासन लगाया जाए. आगे जो भी होगा हम उसके लिए विचार करेंगे. जैसा कि आप जानते हैं कि केंद्र सरकार ने रमजान के पाक महीने सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन लाया, जिसका जवाब हत्याओं के रूप में दिया गया. इसलिए हम इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि हम पीडीपी से अलग हो रहे हैं.” भाजपा के विधायकों ने इस निर्णय का समर्थन किया है. एक पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए राम माधव ने कहा कि बेशक जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल का शाषण हो जाए लेकिन आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन चालू रहेगा.