प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना: बनाई गई ग्रामीण सड़कों को मरम्मत की जरूरत लेकिन राज्य नहीं कर रहे हैं खर्च

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नई दिल्ली. केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने 18 सितंबर को बीजद के सांसद अमर पटनायक को राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर देते हुए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के बारे में जानकारी दी.

योजना

उन्होंने बताया कि एकमुश्त विशेष हस्तक्षेप के रूप में PMGSY के पहले चरण की शुरुआत साल 2000 में की गई. PMGSY का प्रमुख उद्देश्य निर्धारित जनसंख्या वाली असंबद्ध बस्तियों को ग्रामीण संपर्क नेटवर्क प्रदान कर ग्रामीण क्षेत्रों का सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण करना है.

योजना के अंतर्गत 2001 की जनगणना के अनुसार, 500+ से ज्यादा मैदानी क्षेत्र तथा 250 से ज्यादा ग्रामीणों वाली पूर्वोत्‍तर, पर्वतीय, जनजातीय और रेगिस्‍तानी क्षेत्र में सभी मौसमों के अनुकूल सड़को को मुख्य सड़क से जोड़ना था, ताकि क्षेत्र का समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास हो सके. भारत सरकार द्वारा वर्ष 2013 में समग्र दक्षता में सुधार हेतु ग्रामीण सड़क नेटवर्क में 50,000 किमी. के उन्नयन के लिये PMGSY-II की शुरुआत की गई.

कई चुनौतियां

PMGSY के अंतर्गत बनाई गई ग्रामीण सड़क नेटवर्क को वर्तमान में मरम्मत की तत्काल आवश्यकता है, लेकिन राज्य इन सड़कों के रखरखाव के लिये पर्याप्त मात्रा में खर्च नहीं कर रहे हैं. योजना क्रियान्वयन के नोडल मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय के लिये यह एक चिंता का विषय है.

मंत्रालय के एक अनुमान के अनुसार, योजना के अंतर्गत बनाई गई सड़कों के रखरखाव के लिये साल 2020-21 से प्रारंभ होकर अगले पांच साल की अवधि के दौरान 75,000-80,000 करोड़ रुपए खर्च करने की आवश्यकता होगी. राज्यों द्वारा चालू वित्त वर्ष में 11,500 करोड़ रुपए खर्च किये जाने की आवश्यकता है और साल 2024-25 तक आवश्यक राशि बढ़कर 19,000 करोड़ रुपए होने का अनुमान है.

अब तक लगभग 1.5 लाख बस्तियों को आपस में जोड़ने के लिये 6.2 लाख किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण

योजना के प्रारंभ होने के बाद से अब तक लगभग 1.5 लाख बस्तियों को आपस में जोड़ने के लिये 6.2 लाख किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण किया जा चुका है. इन सड़कों में से लगभग 2.27 लाख किमी. से अधिक लंबाई की सड़कें 10 वर्ष से अधिक और लगभग 1.79 लाख किमी. लंबी सड़कें 5 से 10 वर्ष तक पुरानी है. इन सभी को मिलाकर लगभग 67% सड़कों के उचित रखरखाव की आवश्यकता है.

राज्य ग्रामीण सड़क विकास एजेंसियों में प्रशिक्षित और अनुभवी कर्मचारियों का बार-बार तबादला योजना निगरानी की प्रभावशीलता को बाधित करता है. कुछ राज्यों द्वारा ऑनलाइन निगरानी प्रबंधन और लेखा प्रणाली पर नियमित रूप से योजना की भौतिक और वित्तीय प्रगति को अद्यतन नहीं करना भी चिंता का विषय है.

बिहार, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और ओडिशा सहित नौ राज्य सड़कों के निर्माण में पिछड़े

PMGSY के कैग ऑडिट में देखा गया कि बिहार, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और ओडिशा सहित नौ राज्य सड़कों के निर्माण में पिछड़े हुए थे.

वर्ष 2019 में 1,25,000 किमी. के समेकन के लिये PMGSY-III को प्रारंभ किया गया था

ग्रामीण कृषि बाजार (GrAMs), उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों और अस्पतालों को प्रमुख ग्रामीण संपर्क मार्गों से जोड़ने हेतु वर्ष 2019 में 1,25,000 किमी. के समेकन के लिये PMGSY-III को प्रारंभ किया गया.

PMGSY के तहत ग्रामीण सड़कों का निर्माण और विकास ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में प्रस्तावित ज्यामितीय डिजाइन और भारतीय सड़क कॉन्ग्रेस (Indian Road Congress-IRC) के मैनुअल और अन्य प्रासंगिक IRC कोड और मैनुअल के अनुसार किया जाता है. मंत्रालय द्वारा योजना के अंतर्गत कार्य संबंधित राज्य सरकारों द्वारा प्रस्तुत ‘विस्तृत परियोजना रिपोर्ट’ (DPR) के आधार पर स्वीकृत किये जाते हैं.

लागत अनुमान तैयार करते समय भौगोलिक और संबंधित कारकों को ध्यान में रखा जाता हैं

सड़क निर्माण कार्यों के लिये लागत अनुमान तैयार करते समय भौगोलिक और संबंधित कारकों को ध्यान में रखा जाता हैं. PMGSY-I के अंतर्गत पात्र बस्तियों के आधार पर और PMGSY-II तथा III के मामले में सड़कों की लंबाई के आधार पर लक्ष्य आवंटित किये जाते हैं.

योजना में विशेष वितरण के उपाय के रूप में केंद्र सरकार पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में परियोजना लागत का 90% वहन करती है, जबकि अन्य राज्यों में केंद्र सरकार लागत का 60% वहन करती है.