नई दिल्ली: कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पश्चिम एशिया की स्थिति पर दिए गए बयान को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने लोकसभा में देश को हालात की जानकारी तो दी, लेकिन अपने बयान में कोई नई बात नहीं कही। साथ ही उन्होंने मांग की कि इस मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए, ताकि सभी दल अपना पक्ष रख सकें।
‘PM ने कुछ नया नहीं कहा’
प्रियंका गांधी ने संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री ने जो कहा, वह पहले से सामने आ चुकी जानकारी ही थी। उनके मुताबिक, देश को मौजूदा स्थिति के बारे में अवगत कराया गया, लेकिन बयान में ऐसा कुछ नहीं था जिसे नया या विशेष कहा जा सके।
संसद में चर्चा की मांग
कांग्रेस नेता ने कहा कि उनकी ओर से चर्चा के लिए नोटिस दिया गया है और उस पर सदन में बहस होनी चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि पश्चिम एशिया जैसे गंभीर अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर संसद में सभी पक्षों को अपने विचार रखने का मौका मिलना चाहिए। उनके अनुसार, इस तरह की चर्चा लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करेगी और सरकार की नीति पर भी स्पष्टता आएगी।
PM मोदी ने क्या कहा था
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में अपने बयान में कहा था कि पश्चिम एशिया की स्थिति चिंताजनक है और इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था व आम लोगों की आजीविका पर पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि संकट के समय भारतीयों की सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है और केंद्र सरकार संवेदनशील, सतर्क तथा हरसंभव मदद के लिए तैयार है।
होर्मुज जलडमरूमध्य और सप्लाई पर चिंता
प्रधानमंत्री ने कहा था कि युद्ध शुरू होने के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य से कार्गो मूवमेंट एक बड़ी चुनौती बन गया है। इसके बावजूद सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि गैस और ईंधन की आपूर्ति पर न्यूनतम असर पड़े। उन्होंने यह भी बताया कि भारत अपनी 60 फीसदी एलपीजी जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, इसलिए अनिश्चित आपूर्ति के बीच घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दी जा रही है।
LPG उत्पादन बढ़ाने की बात
पीएम मोदी ने अपने बयान में कहा कि सरकार देश में एलपीजी उत्पादन बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रही है, ताकि बाहरी संकट का असर घरेलू उपभोक्ताओं पर कम पड़े। उन्होंने संघर्ष से पैदा हुई आर्थिक, मानवीय और राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का भी जिक्र किया।
राजनीतिक बहस तेज होने के संकेत
प्रियंका गांधी के बयान के बाद साफ है कि पश्चिम एशिया का मुद्दा संसद के भीतर राजनीतिक बहस का विषय बन सकता है। विपक्ष चाहता है कि सरकार केवल बयान तक सीमित न रहे, बल्कि सदन में विस्तृत चर्चा कर अपने रुख और तैयारी को विस्तार से सामने रखे।
