जामताड़ा | समस्या फतेहपुर पंचायत के खिजुरिया गांव के गुणाधर महतो की जिनका डेढ़ साल पहले राशन कार्ड से नाम हटा, कई बार शिकायत दी लेकिन हुआ कुछ नहीं

जामताड़ा | समस्या फतेहपुर पंचायत के खिजुरिया गांव के गुणाधर महतो की जिनका डेढ़ साल पहले राशन कार्ड से नाम हटा, कई बार शिकायत दी लेकिन हुआ कुछ नहीं - Panchayat Times
Gunadhar Mahto

जामताड़ा. देश के लगभग हर गांव में पंचायती राज व्यवस्था कायम है. जिसके तहत अंतिम व्यक्ति को लाभ दिलाने के लिए जनता अपना वार्ड सदस्य भी चुनती है. इसके अलावा हर गांव में हर पार्टी के कुछ एक नेता जी आपको मिल जाएंगे. लेकिन ये लोग जनता की सेवा करना शायद भूल जाते है. जब जब जिस पार्टी की सत्ता आती है. जनता की जो समस्या हो उसको दूर करने का प्रयास तक नहीं करते. कहा जाए तो अपना स्वार्थ पूरा होने के बाद लोग जनता की समस्याओं को जानने तक भी प्रयास नहीं करते.

फतेहपुर पंचायत के खिजुरिया गांव के  गुणाधर महतो की समस्या

हम आपको ऐसी एक सच्चाई बताने जा रहे हैं. बात हो रही है जामताड़ा के फतेहपुर प्रखंड के फतेहपुर पंचायत का खिजुरिया गांव की. गांव में एक व्यक्ति है गुणाधर महतो जो एक दैनिक मजदूर है, गरीब है. लेकिन सरकारी सिस्टम कहिए या डीलर की मनमानी. इस गरीब को राशन से भी वंचित कर दिया गया है. गुणाधर के अलावा उसके घर के एक और सदस्य उनकी पतोहू का भी नाम राशन कार्ड से हटा दिया गया है.

डेढ़ साल पहले राशन कार्ड से हटा नाम

सबसे बड़ी बात यह है कि गुणाधर महतो जिसका लगभग डेढ़ साल पहले राशन कार्ड से नाम हटा दिया गया उसके गांव में इसकी सुध ना तो वार्ड सदस्य ने ली ना ही मुखिया ने और ना ही किसी नेता ने. लिहाजा वह अभी तक राशन कार्ड में नाम नहीं चढ़ा सका हैं. कहने को तो सरकारी जो सिस्टम है उसमें एक आदमी का यदि नाम कट जाए तो वह प्रखंड का चक्कर लगाते लगाते थक भी जाए तो भी उसका नाम नहीं चड़ पाता है.

बहरहाल जो भी हो इस संबंध में गुणाधर महतो ने कहा कि वह कई बार प्रखंड का चक्कर लगाया लेकिन उसका काम नहीं हुआ. डीलर को भी कहा उसने भी अनाप-शनाप जवाब दिया. जब से नया राशन कार्ड दिया गया है. उसके साथ उसका भी नाम हटा दिया गया है. वह कहता है कि इस वजह वह परेशान है.

मुझे बार बार चक्कर लगाना ठीक नहीं लगता

गुणाधार महतो कहते हैं कि पहले सबों को राशन मिलता था. लेकिन अब मेरा और मेरे बेटे की बहू का नाम गायब है. घर संचालन में भी बहुत दिक्कत हो रही है कोई मदद भी नहीं कर रहा है और मैं दैनिक मजदूर हूं. मुझे बार बार चक्कर लगाना ठीक नहीं लगता.

खैर सवाल तो पूरे सिस्टम पर भी लग सकता है लेकिन यह गरीब है लाचार है कमजोर है इसीलिए यह लड़ नहीं सकता. वही इस संबंध में समाजसेवी हराधन मंडल ने कहा कि गरीब को उसका हक मिलना चाहिए और जो भी दोषी है उस पर कार्रवाई होनी चाहिए. तभी समाज में विभाग की छवि साफ रहेगी.