बर्फानी तेंदुए को बचाने की कवायद लाहौल-स्पीति और चंबा में शुरू

पांवटा साहिब के आंजभोज क्षेत्र में तेंदुए का आतंक- Panchayat Times
प्रतीक चित्र

शिमला. हिमाचल प्रदेश के जनजातीय इलाकों लाहौल-स्पीति और चंबा के पांगी क्षेत्र में बर्फानी तेंदुए को बचाने की कवायद शुरू हो गई है. इसके लिए हिमाचल प्रदेश में 7.23 करोड़ डॉलर लागत की इस संरक्षित हिमालयन परियोजना को क्रियान्वित किया जा रहा है.

अतिरिक्त मुख्य सचिव (वन) तरूण कपूर ने बुधवार को एक बैठक में कहा कि इस परियोजना की कार्य अवधि छः वर्षों यानी 2024 तक निर्धारित की गई है. इस परियोजना को प्रदेश के लाहौल स्पिति और चंबा जिला के पांगी क्षेत्र में चलाया जाएगा. उन्होंने आशा व्यक्त की कि परियोजना के क्रियान्वयन से प्रदेश के इन दूरदराज क्षेत्रों में बर्फानी तेन्दुए एवं अन्य वन्य प्राणियों के संरक्षण में सहायता मिलेगी.

वैश्विक महत्व रखने वाली वन्य प्राणी

उन्होंने कहा कि परियोजना का उददेश्य उच्च हिमालय के अल्पाईन चारागाहों एवं वनों के सतत् प्रबन्धन को बढ़ावा देना है. उन्होंने कहा कि परियोजना से वैश्विक महत्व रखने वाली वन्य प्राणी, जिसमें वर्फानी तेन्दुआ शामिल है, के संरक्षण एवं उनके वास को बचाने में सहायता मिलने के साथ-साथ स्थानीय लोगों को जीविकार्जन एवं उनके सामाजिक-आर्थिक विकास के नए अवसर उपलब्ध होंगे.

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तरूण कपूर ने कहा कि स्थानीय लोगों की वनों पर निर्भरता रहती है, जिससे यहां के प्राकृतिक संसाधनों पर हमेशा दबाब बना रहता है, जिसमें खास तौर पर औषधिय पौधों का गैर वैज्ञानिक दोहन, वन्य प्राणियों का अवैध व्यापार तथा वन्य प्राणी अपराध शामिल हैं. परियोजना के तहत इन खतरों को कम करने के लिए राष्ट्रीय उद्यानों के मध्य स्थित क्षेत्र जहां बर्फानी तेन्दुए और अन्य वन्य जीवों के वास स्थल हैं, उन स्थलों के प्रबन्धन पर विशेष बल दिया जाएगा ताकि वहां के संसाधनों का सतत् उपयोग कर जीविका अर्जित करने के क्षेत्रों में विविधता ला कर स्थानीय लोगों की आजीविका में वृद्धि की जा सके जिससे प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव की कमी एवं वन्य प्राणी अपराध को कम लाने में सहायता मिलेगी.