पतंजलि संग झारखंड में खेती का होगा कायाकल्प

रांची. ग्लोबल एग्रीकल्चर एंड फूड समिट के समापन समारोह - Panchayat Times

रांची. ग्लोबल एग्रीकल्चर एंड फूड समिट के समापन समारोह में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने 2022 तक राज्य के किसानों की आय चार गुनी करने का आह्वान किया. इसके साथ ही उन्होंने राज्य के 28 लाख किसानों से वादा किया कि झारखंड सरकार उन्हें हर तरह की सुविधा मुहैया करायेगी.

मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि राज्य में ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए झारखंड सरकार सभी 24 जिलों में जैविक उत्पाद कलस्टर सेंटर का निर्माण कराएगी और उसकी ब्रैंडिंग झारखंड जैविक (जेजे) के तहत की जाएगी. पतंजलि के साथ करार कर सरकार सभी जैविक उत्पादों के लिए बाजार भी मुहैया कराएगी. राज्य के गरीब और आदिवासी किसानों को नये और आधुनिक उपकरण सस्ती दरों पर मिले, इसके लिए मुख्यमंत्री ने रियायत पर कृषि उपकरण उपलब्ध कराने की योजना का भी ऐलान किया.

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रघुवर दास ने बाबा रामदेव को धन्यवाद देते हुए कहा कि झारखंड के मधु को पतंजलि खरीदेगी और झारखंड सरकार इसके लिए पतंजलि की मदद से राज्य में ही मधु प्रोसेसिंग प्लांट लगाने जा रही है. साथ ही मुख्यमंत्री ने आह्वान किया कि सभी किसान आज प्रति बूंद, ज्यादा फसल के नारे को अपने जीवन में आत्मसात करें. जल संचय और सूक्ष्म सिंचाई से हम राज्य में कृषि क्रांति ला सकते हैं. ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए ही झारखंड सरकार ने ग्लोबल एग्रीकल्चर एंड फूड समिट का आयोजन किया है. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने झारखंड के अन्नदाता किसानों का धन्यवाद करते हुए कहा कि झारखंड के किसान भाइयों की मेहनत से 3 साल में कृषि फसल विकास दर में 19% बढ़ोतरी हुई है. इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक 2013-14 में कृषि फसल विकास दर 4.5% (माइनस 4.5 फीसदी) थी जो 2016-17 में बढ़कर +14.2% (14.2 फीसदी) हो गई है. ग्लोबल सम्मिट में राज्य के 20 हजार से अधिक किसानों ने भाग लिया.

मुख्यमंत्री रघुवर दास के संबोधन के मुख्य बिंदु

1. 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने की दिशा में सरकार प्रतिबद्ध है. 2014 में पहली बार किसान कल्याण मंत्रालय बनाया गया. किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर करने के लिए बनाए गये स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट में दिए गए सुझावों पर अमल किया गया.                                                                                                2. ’प्रति बूंद अधिक फसल’’ के सिद्धांत पर पर्याप्त संसाधनों के साथ सिंचाई पर विशेष बल.
3. प्रत्येक खेत की मिट्टी की गुणवत्ता के अनुसार गुणवत्ता वाले बीज और पोषक तत्वों का प्रावधान.
4. कटाई के बाद फसल नुकसान को रोकने के लिए गोदामों और कोल्डचेन में बड़ा निवेश.
5. खाद्य प्रसंस्करण के माध्यम से मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहन.
6. राष्ट्रीय कृषि बाज़ार एवं सभी 585 केन्द्रों पर कमियों को दूर करने के लिए ई-प्लेटफार्म का कार्यान्‍वयन.
7. जोखिम कम करने के लिए कम कीमत पर फसल बीमा योजना की शुरुआत.
8. डेरी-पशुपालन, मुर्गी-पालन, मधुमक्खी-पालन, मेढ़ पर पेड़, बागवानी व मछली पालन जैसे संबद्ध कार्यकलापों को बढ़ावा देना.
9. राष्ट्रीय गोकुल मिशन के जरिये सरकार ने पशुओं के देसी नस्ल को संरक्षित करने की पहल की है. देश में दूसरी श्वेत क्रांति लाने के लिए केंद्र सरकार ने 28 जुलाई 2014 को राष्ट्रीय गोकुल मिशन की शुरुआत की.
10. दुधारू पशुओं के स्वदेशी नस्लों का विकास और संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया.
11. स्वदेशी पशु के लिए नस्ल सुधार कार्यक्रम. इससे पशुओं में आनुवांशिक सुधार और पशुओं की संख्या में वृद्धि संभव होगी.
12. दूध उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाने की कोशिश. साहीवाल, राठी, देउनी, थारपारकर, रेड सिन्धी और अन्य कुलीन स्वदेशी नस्लों के जरिए बाकी नस्लों को उन्नत बनाना.