नई दिल्ली. कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के G-RAM-G रोजगार गारंटी योजना को लेकर दिए गए बयान पर सियासी घमासान तेज हो गया है। राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि “G-RAM-G क्या है”, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस पर ‘एंटी-हिंदू मानसिकता’ रखने का आरोप लगाया है। राहुल गांधी ने G-RAM-G योजना की आलोचना करने वालों से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि भाजपा की यह नई कानून व्यवस्था, कांग्रेस के 20 साल पुराने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MNREGA) की जगह लाई गई है।
‘G-RAM-G क्या है, मुझे नहीं पता’—राहुल गांधी
दिल्ली के जवाहर भवन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि मुझे नहीं पता कि G-RAM-G क्या है। यह कार्यक्रम MNREGA को समर्पित था। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी इसी तरह की टिप्पणी की।
BJP का पलटवार
राहुल गांधी के बयान पर भाजपा ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और कहा कि वे भगवान राम के विरोधी हैं। पार्टी नेताओं ने कहा कि राहुल गांधी की टिप्पणी से कांग्रेस की ‘हिंदू विरोधी सोच’ उजागर हो गई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा की प्रतिक्रिया ने अप्रत्यक्ष रूप से विपक्ष की उस आपत्ति को रेखांकित कर दिया है, जिसके तहत नई योजना में महात्मा गांधी की जगह भगवान राम के नाम का उपयोग किया गया है।
‘मोदी MNREGA खत्म करना चाहते हैं’-राहुल
कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कहा कि MNREGA ने हर गरीब को रोजगार का अधिकार दिया था, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खत्म करना चाहते हैं। उन्होंने 2020 में लागू किए गए कृषि कानूनों का भी जिक्र किया, जिन्हें बाद में किसान आंदोलन के दबाव में वापस लेना पड़ा था। किसानों ने एकजुट होकर काले कृषि कानून वापस करवा दिए। अगर हम फिर एकजुट हुए तो ये लोग डर जाएंगे और मोदी जी पीछे हटेंगे, MNREGA फिर से शुरू होगा।
खड़गे बोले-महात्मा गांधी का नाम मिटाने की कोशिश
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि भाजपा यह सब महात्मा गांधी का नाम सार्वजनिक स्मृति से हटाने के लिए कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस बजट सत्र में इस मुद्दे को फिर से संसद में उठाएगी।
राज्यों में बढ़ता विरोध
राहुल गांधी और खड़गे के बयान ऐसे समय आए हैं, जब विपक्ष भाजपा पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है।
कम से कम दो राज्यों कर्नाटक (जहां कांग्रेस सत्ता में है) और तमिलनाडु (जहाँ DMK सरकार है) ने MNREGA के समर्थन में विधानसभा प्रस्ताव लाने के संकेत दिए हैं।
इसी मुद्दे पर कर्नाटक विधानसभा में उस समय हंगामा हो गया, जब राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने सरकार द्वारा तैयार भाषण पढ़ने से इनकार कर दिया, जिसमें G-RAM-G योजना की आलोचना थी। वहीं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भी ऐसे ही प्रस्ताव की घोषणा की है।
G-RAM-G योजना क्या है || G RAM G Explained
काम के गारंटीड दिन
G-RAM-G में 125 दिन के रोजगार की गारंटी
MNREGA में यह सीमा 100 दिन थी
शर्त: केंद्र सरकार द्वारा क्षेत्र को ‘ग्रामीण’ घोषित किया जाना जरूरी
फंडिंग व्यवस्था
MNREGA में केंद्र सरकार करीब 90% खर्च उठाती थी
G-RAM-G में राज्यों को 40% खर्च देना होगा
पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों को केवल 10% योगदान
केंद्र शासित प्रदेशों को 100% फंडिंग जारी रहेगी
सरकार का कहना है कि इससे राज्यों की वित्तीय जिम्मेदारी बढ़ेगी, जबकि विपक्ष का दावा है कि इससे राज्यों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और रोजगार के अवसर सीमित होंगे।
फंड रोकने का अधिकार
केंद्र सरकार गंभीर अनियमितताओं के मामले में फंड रोक सकती है
सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दे सकती है
काम का स्वरूप
पंचायत स्तर पर काम देने की व्यवस्था पहले जैसी ही
लेकिन अब काम के मानक, डिजाइन और सामग्री केंद्र तय करेगा
योजना के तहत काम चार श्रेणियों में बांटा गया है
जल सुरक्षा
ग्रामीण बुनियादी ढांचा
आजीविका से जुड़ी संपत्तियाँ
जलवायु अनुकूलन
आलोचकों का कहना है कि इससे पंचायतों की स्वायत्तता कम होगी और स्थानीय जरूरतों के अनुसार काम तय करने की क्षमता घटेगी।
