नई दिल्ली. गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी एक अलग ही तेवर में नजर आ रहे हैं. राहुल के इस बदले तेवर ने कांग्रेस में भी एक नई ऊर्जा भरने में मदद की है.
राहुल गांधी लोगों से जुड़ने का कोई भी मौका छोड़ना नहीं चाह रहे हैं. वह हर तरीका अपनाकर गुजरातियों में घुल मिल जाना चाहते हैं. जिसके लिए कभी वह मंदिर-मंदिर मत्था टेकते नजर आए, कभी वह नाचते गाते, तो कभी वह जलेबी-फाफड़ा खाते हुए दिखाई दिए. इसके अलावा युवाओं के साथ सेल्फी हो या कारोबारियों के बीच जाकर उनसे बातचीत, राहुल कोई भी कसर नहीं छोड़ना चाह रहे हैं.
सोशल मीडिया पर भी ऐक्टिव
जमीनी भागदौड़ के अलावा राहुल को पता है कि सोशल मीडिया का महत्त्व क्या है. वह लगातार सोशल मीडिया से भी विरोधियों पर वार करने से भी नहीं चूक रहे हैं. उनके कुत्ते पीडी का वीडियो हो या फिर गब्बर सिंह का जुमला, कई तरह के जुमलों और हैश टैग्स के साथ वह ट्विट कर हमले बोल रहे हैं.

राहुल के अंदर आया यह बदलाव उनकी रैलियों में भी साफ देखा जा सकता है. वह एक दिन में कई रैलियों और सभाओं में जा रहे हैं और अपने भाषण में जुमलों का इस्तेमाल कर बीजेपी पर वार कर रहे हैं. राहुल के सोमवार दौरे पर नजर डालें तो एक दिन में ही वह तकरीबन 25 छोटी-बड़ी सभाओं में शरीक हुए.
उत्तर गुजरात पर नजर

22 साल से सत्ता पर काबिज बीजेपी को टक्कर देने के लिए कांग्रेस पूरी रणनीति बनाकर चल रही है. राहुल ने अभी उत्तर गुजरात का दौरा किया. उत्तर गुजरात में कुल 6 जिलों में 32 सीटें हैं. जिसमे 12 सीटें पाटीदार बाहुल्य, 10 ठाकोर और 4 आदिवासी समुदाय के लोग शामिल हैं.
उत्तर गुजरात में कांग्रेस की पकड़ मजबूत है और दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस को जिग्नेश, अल्पेश और हार्दिक का भी साथ है. जाहिर सी बात है कि कांग्रेस की नजर इन 32 सीटों पर है.

राहुल गांधी की फुर्ती और लगातार रैलियों का असर ही है कि सत्ता पर काबिज बीजेपी ने कई वरिष्ठ नेताओं को गुजरात के चुनावी रण में उतार दिया है. गुजरात चुनाव का फैसला कुछ भी हो लेकिन राहुल के इस बदले अंदाज ने गुजरात चुनाव को काफी दिलचस्प बना दिया है.