नई दिल्ली. भारतीय रेलवे की एक स्टेशन एक उत्पाद (OSOP) योजना को वर्ष 2022 में आज़ादी का अमृत महोत्सव के तहत शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य रेलवे स्टेशनों को केवल यात्रा के स्थान न बनाकर स्थानीय उत्पादों के विपणन केंद्र के रूप में विकसित करना है।
योजना की प्रमुख विशेषताएं
प्रत्येक चयनित रेलवे स्टेशन पर उस क्षेत्र के एक विशिष्ट उत्पाद को बेचने की अनुमति दी जाती है। स्टेशनों पर अस्थायी या स्थायी स्टॉल लगाए जाते हैं, जहां स्थानीय कारीगर और स्वयं सहायता समूह अपने उत्पाद सीधे यात्रियों को बेच सकते हैं। कारीगरों को बिचौलियों से मुक्त सीधा बाजार उपलब्ध कराया जाता है, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी होती है। रेलवे द्वारा स्टॉल के लिए न्यूनतम शुल्क या निःशुल्क स्थान उपलब्ध कराया जाता है, ताकि छोटे उत्पादकों पर आर्थिक बोझ न पड़े।
कारीगरों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ
रेल मंत्रालय के अनुसार, OSOP योजना से जुड़े कारीगरों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कई स्थानों पर स्वयं सहायता समूहों, महिला उद्यमियों और ग्रामीण कारीगरों को पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर अपने उत्पाद बेचने का अवसर मिला है। इससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिला है।
यात्रियों के लिए भी फायदेमंद
यात्रियों को अब रेलवे स्टेशनों पर स्थानीय और पारंपरिक उत्पाद आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं। इससे उन्हें हर क्षेत्र की संस्कृति, स्वाद और शिल्प को करीब से जानने का मौका मिल रहा है, जिससे यात्रा अनुभव अधिक समृद्ध हो रहा है।
भविष्य की योजना
रेलवे मंत्रालय OSOP योजना को और अधिक स्टेशनों तक विस्तार देने, डिजिटल भुगतान, ब्रांडिंग, पैकेजिंग सुधार और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर भी काम कर रहा है, ताकि कारीगरों के उत्पादों को देश-विदेश तक पहुंचाया जा सके।
कुल मिलाकर, एक स्टेशन एक उत्पाद योजना भारतीय रेलवे की एक ऐसी पहल है, जो स्थानीय कला, संस्कृति और अर्थव्यवस्था को मजबूती देते हुए आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
