रेलवे ने लॉकडाउन में फंसे लोगों को घर पहुंचाने के लिए शुरू की ‘श्रमिक स्पेशल’ ट्रेन लाखों लोगों को मिलेगा फायदा

रेलवे ने लॉकडाउन में फंसे लोगों को घर पहुंचाने के लिए शुरू की 'श्रमिक स्पेशल' ट्रेन लाखों लोगों को मिलेगा फायदा - Panchayat Times
'श्रमिक स्पेशल' ट्रेन

नई दिल्ली. रेल मंत्रालय ने कोरोना वायरस (कोविड-19) के मद्देनजर किये गये लॉकडाउन के कारण विभिन्न स्थानों पर फंसे प्रवासी श्रमिकों, तीर्थयात्रियों, पर्यटकों, छात्रों और अन्य लोगों को उनके राज्यों तक पहुंचाने के लिए ‘श्रमिक स्पेशल’ ट्रेन चलाने का फैसला किया है.

इसकी शुरुआत शुक्रवार को मजदूर दिवस के मौके पर 6 ‘श्रमिक स्पेशल’ रेलगाड़ियों को रवाना कर की गई. इन विशेष ट्रेनों में केवल राज्य सरकारों द्वारा नामित और पंजीकृत लोगों को ही यात्रा की अनुमति होगी. ट्रेन में सफर करने के लिए यात्रियों को किसी भी प्रकार का भुगतान नहीं करना होगा.

रेल मंत्रालय में सूचना एवं प्रचार विभाग के कार्यकारी निदेशक राजेश दत्त बाजपेई ने बीते शुक्रवार को बताया कि गृह मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देश के अनुसार मानक प्रोटोकॉल्‍स के अनुसार इन फंसे हुए लोगों को भेजने वाली और उनकी अगवानी करने वाली संबंधित दोनों राज्‍य सरकारों के अनुरोध पर ये विशेष रेलगाड़ियां एक जगह से दूसरी जगह के बीच चलेंगी. रेलवे और राज्‍य सरकारों की ओर से समन्‍वयन और “श्रमिक स्‍पेशल्‍स’’ के सुचारु परिचालन के लिए वरिष्‍ठ अधिकारियों को नोडल अधिकारी नियुक्‍त किया जाएगा.

6 श्रमिक विशेष रेलगाड़ियां

उन्होंने बताया कि आज लिंगमपल्ली से हटिया, अलुवा से भुवनेश्वर, नासिक से लखनऊ, जयपुर से पटना और कोटा से हटिया के लिए 6 श्रमिक विशेष रेलगाड़ियां चलाई गई. एक अनुमान के अनुसार एक ट्रेन में एक हजार से 12 सौ तक यात्री सवार हुए. ऐसे में लगभग 6 से 7 हजार लोग कल तक अपने परिजनों के पास होंगे.

ट्रेन में सोशल डिस्टेंस और मास्क जरूरी

अगर आप भी प्रवासी मजदूर हैं और घर वापसी की उम्मीद में हैं तो आपको मास्क अपने साथ हमेशा रखना होगा. यानी बिना मुंह पर मास्क लगाए आप यात्रा नहीं कर सकेंगे. इसके अलावा, आपको ट्रेन में भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा. यही वजह है कि रेलवे सीटों के अनुसार ही लोगों को ट्रेन में ले जाएगा.

उन्होंने लोगों से अपील की कि वह किसी भी परिस्थिति में राज्य सरकारों की अनुमति के बिना रेलवे स्टेशनों का रुख न करें. हम किसी भी व्यक्ति को कोई टिकट जारी नहीं करेंगे. हम केवल उन यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने की अनुमति देंगे, जिन्हें राज्य सरकार के अधिकारी रेलवे स्टेशनों पर लाएंगे. राज्य सरकार को यह तय करने का अंतिम अधिकार है कि हमारी गाड़ियों में कौन यात्रा करेगा.

राज्य सरकारें करेंगी किराए का भुगतान

बाजपेई ने यात्री किराए के संबंध में स्पष्ट किया कि शुक्रवार से शुरू हुई श्रमिक विशेष ट्रेनों में स्लीपर मेल एक्सप्रेस ट्रेन के किराए के साथ सुपरफास्ट शुल्क और 20 रुपये भोजन-पानी के शामिल होंगे. रेलवे ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों को अपने पास से कुछ भी खरीदने की जरूरत नहीं, उनके खर्च का वहन राज्य सरकारें करेंगी. महीनेभर तक सेवाएं निलंबित रहने के बाद रेलवे ने पहली यात्री ट्रेन इन मजदूरों के लिए शुक्रवार को हैदराबाद से झारखंड के लिए सुबह साढ़े चार बजे रवाना की जिसमें कुल 1200 लोग सवार थे.

राज्‍यों द्वारा की जाएगी जांच

उन्होंने कहा कि यात्रियों को भेजने वाले राज्‍यों द्वारा उनकी जांच की जाएगी और यात्रा की अनुमति केवल उन्‍हीं लोगों को दी जाएगी जिनमें कोई लक्षण नहीं पाया जायेगा. भेजने वाली राज्‍य सरकारों को इन लोगों को ट्रेन में बिठाने के लिए निर्धारित रेलवे स्‍टेशन तक सैनिटाइज्‍ड बसों में बैठाकर सामाजिक दूरी के नियमों और अन्‍य सावधानियों का पालन करते हुए जत्‍थों में लाना होगा. प्रत्‍येक व्‍यक्ति के लिए फेस कवर लगाना अनिवार्य होगा. भेजने वाले राज्‍यों द्वारा शुरुआती स्‍टेशन पर उनके लिए भोजन और पानी उपलब्‍ध कराया जाएगा.

उन्होंने कहा कि गंतव्य तक पहुंचने पर, राज्य सरकार द्वारा यात्रियों की अगवानी की जाएगी. वहीं उनकी स्क्रीनिंग, यदि आवश्यक हो क्‍वारंटीन और रेलवे स्टेशन से आगे की यात्रा जैसे सभी तरह के प्रबंध करेगी. राष्ट्र के सामने मौजूद संकट की इस घड़ी में भारतीय रेल के सभी अधिकारी और कर्मचारी साथी भारतवासियों की सेवा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और सभी का समर्थन और सहयोग चाहते हैं.