देश की सोन चिरैया को बचा रहा राजस्थान

देश की सोन चिरैया को बचा रहा राजस्थान

नई दिल्ली. चंबल के बीहड़ों पर आधारित फिल्म सोन चिरैया भले ही रिलीज से पहले ही चर्चा में है लेकिन आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि देश की भी एक सोन चिरैया है जो विलुप्त होने की कगार खड़ी है. सोन चिरैया एक पक्षी भी है, जो कभी मोर के साथ नेशनल बर्ड बनने की की होड़ में थी लेकिन अब खात्मे की कगार पर है.

स्थिति यह है कि देश में महज 150 की संख्या ही रह गई है. जिसमें से लगभग 120 सोन चिरैया राजस्थान के जोधपुर में हैं. यह खुलासा भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के ताजा शोध में हुआ है. सोन चिरैया शुतुरमुर्ग जैसी बड़े आकार वाली पक्षी है. ये करीब एक मीटर लंबी और 10 से 15 किलो के वजन की होती है. कई लोग इसे सोहन चिड़िया, हुकना, गुरायिन भी कहते हैं. राजस्थान में इसे गोडावण भी कहते हैं. लुप्त होती सोन चिरैया को बचाने के लिए राजस्थान के कोटा जिले के सोरसन में सोन चिरैया प्रजनन केन्द्र खोला जा रहा है. जिससे इस पक्षी का संरक्षण हो सके और इसकी संख्या बढ़ सके.

राजस्थान का राज्य पक्षी सोन चिरैया

सोन चिरैया भारत और पाकिस्तान के शुष्क एवं अर्ध-शुष्क घास के मैदानों में पाई जाती है. उड़ने वाली पक्षियों में यह सबसे अधिक वजनी पक्षियों में है. बड़े आकार के कारण यह शुतुरमुर्ग जैसी प्रतीत होती है. यह राजस्थान का राज्य पक्षी है. देश में यह पक्षी पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तमिलनाडु राज्यों के घास के मैदानों में व्यापक रूप से पाया जाता था. किंतु अब यह पक्षी कम जनसंख्या के साथ राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और संभवतः मध्य प्रदेश राज्यों में पाई जाती है.

इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN)की संकटग्रस्त प्रजातियों पर प्रकाशित होने वाली लाल डाटा पुस्तिका में इसे ‘गंभीर रूप से संकटग्रस्त’ श्रेणी में तथा भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची 1 में रखा गया है. इस विशाल पक्षी को बचाने के लिए राजस्थान सरकार ने एक प्रोजेक्ट शुरू किया था. इस प्रोजेक्ट का विज्ञापन “मेरी उड़ान न रोकें” जैसे मार्मिक वाक्यांश से किया गया है. भारत सरकार के वन्यजीव निवास के समन्वित विकास के तहत किये जा रहे ‘प्रजाति रिकवरी कार्यक्रम (Species Recovery Programme)’ के अंतर्गत चयनित 17 प्रजातियों में गोडावण भी सम्मिलित है.

राजस्थान में सोन चिरैया जैसलमेर के मरू उद्यान, सोरसन (बारां) व अजमेर के शोकलिया क्षेत्र में पाई जाती है. यह पक्षी अत्यंत ही शर्मिली है और सघन घास में रहना इसका स्वभाव है. यह सर्वाहारी पक्षी है. इसकी खाद्य आदतों में गेहूँ, ज्वार, बाजरा आदि अनाजों का भक्षण करना शामिल है किंतु इसका प्रमुख खाद्य टिड्डे आदि कीट हैं. यह पक्षी साँप, छिपकली, बिच्छू आदि भी खाती है. यह पक्षी बेर के फल भी पसंद करती है.