जानिए गांव ‘मियां का बाड़ा’ कैसे बन गया ‘महेश नगर’

‘मियां का बाड़ा’ की जगह ‘महेश नगर’ कर दिया गया है. - Panchayat Times
प्रतीक चित्र

जयपुर. देश में कई गांवों के नामों के पीछे की कहानी बेहद दिलचस्प होती है. वहीं राजस्थान के बाड़मेर जिला में एक गांव है ‘मियां का बाड़ा’. इस नाम को सुनकर लगता है कि यहां मुसलिमों की संख्या काफी होगी पर ऐसा नहीं है. बल्कि यहां अधिकतर संख्या हिंदुओं की है. गांववाले कई दशकों से गांव का नाम बदलने की गुहार लगा रहे थे जिसे अब राजस्थान सरकार ने मान लिया है. अब गांव का नाम ‘मियां का बाड़ा’ की जगह ‘महेश नगर’ कर दिया गया है.

2000 लोगों की जनसंख्या वाले इस गांव के लोगों की शिकायत थी कि गांव के नाम से ऐसा लगता था कि यह एक खास संप्रदाय के लोगों का गांव है. जिससे उन्हें बेटे-बेटियों की शादी करने के लिए अच्छे रिश्ते भी नहीं मिलते थे. अब जब गांव का नाम भगवान शंकर के नाम पे रख दिया गया है तो ऐसी समस्याएं नहीं होंगी.

असल में इस गांव का नाम ‘महेश रो बाड़ो’ था

स्थानीय लोगों का दावा है कि असल में इस गांव का नाम ‘महेश रो बाड़ो’ था लेकिन आजादी के बाद इसका नाम ‘मियां का बाड़ा’ कर दिया गया था. अब इसका नाम ‘महेश नगर’ कर दिया गया है. बाड़मेर बॉर्डर इलाके का एक जिला है. वैसे ‘मियां का बाड़ा’ उस समय को दर्शाता है जब गांव में सभी धर्मों के लोग रहा करते थे. हालांकि, अब गांव में मुस्लिमों की संख्या बेहद कम है, इसलिए गांववालों का कहना है कि ‘मियां’ शब्द मुस्लिम लोगों के लिए इस्तेमाल होता है और यहां मुस्लिमों की आबादी बहुत कम है.

‘मियां का बाड़ा’ की जगह ‘महेश नगर’ कर दिया गया है. - Panchayat Times
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‘झुंझुनू’ जिले के ‘इस्माइल खुर्द’ का नाम बदला

इसके साथ ही राजस्थान में ‘झुंझुनू’ जिले के ‘इस्माइल खुर्द’ का नाम बदलकर ‘पिचनवा खुर्द’ और जालौर जिले के ‘नरपाड़ा’ गांव का ‘नरपुरा’ कर दिया गया है. रेल मंत्रालय, डाक विभाग और भारतीय सर्वेक्षण विभाग की तरफ से कोई आपत्ति नहीं जताने पर गृह मंत्रालय ने नाम बदल दिए हैं. इस संबंध में प्रस्ताव राजस्थान सरकार ने भेजा था.